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शाही पुल के बीच ऐतिहासिक शेर की प्रतिमा पर अवैध कब्जा
Updated Wed, 04 Jul 2018 12:12 AM IST
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जौनपुर। जौनपुर की पहचान शाही पुल के बीच के हिस्से पर बने ऐतिहासिक शेर की प्रतिमा के हर तरफ स्थानीय दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है। धीरे-धीरे इसका ऐतिहासिक महत्व समाप्त करने पर लोग तूले हुए हैं। स्थिति यह है कि गोपी घाट पर आने जाने के रास्ते पर भी अवैध निर्माण कर लिया गया है।
शाही पुल के बीच ऐतिहासिक शेर की प्रतिमा की बिल्डिंग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की है। इसका बोर्ड भी लगा हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस संस्था के ध्यान नहीं देने से अवैध कब्जा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इस शेर से ठीक सटी हुई पुरातत्व की लाइब्रेरी भी है। जिसके नीचे नदी के तट पर भगवान गोमतेश्वर महादेव का मंदिर भी है। मंदिर जाने का सीधा रास्ता इन दुकानों के बीच बने एक बेहद पुराने ऐतिहासिक इमारत से होकर जाता है। बावजूद इसके कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। इस धरोहर पर प्रशासन की लापरवाही के कारण कूड़ा फेंककर बंद कर दिया गया है। शेर के बगल से एक रास्ता नीचे पुलिया की तरफ भी जाता है। जिसकी चौड़ाई करीब 12 फुट है। इसमें सात फुट लोगों ने दीवाल चलाकर कब्जा कर लिया है। स्थानीय लोगों के कई बार शिकायत के बाद भी पैमाइश कराकर कब्जा नहीं हटाया गया। जिसकी वजह से ऐतिहासिक धरोहर का वजूद खतरे में है। डीएम के निरीक्षण से स्थानीय लोगों की आस जगी है। उनकी मांग है कि रास्ते से अतिक्रमण हटाया जाए।
शाही पुल के बीच ऐतिहासिक शेर की प्रतिमा की बिल्डिंग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की है। इसका बोर्ड भी लगा हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस संस्था के ध्यान नहीं देने से अवैध कब्जा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इस शेर से ठीक सटी हुई पुरातत्व की लाइब्रेरी भी है। जिसके नीचे नदी के तट पर भगवान गोमतेश्वर महादेव का मंदिर भी है। मंदिर जाने का सीधा रास्ता इन दुकानों के बीच बने एक बेहद पुराने ऐतिहासिक इमारत से होकर जाता है। बावजूद इसके कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। इस धरोहर पर प्रशासन की लापरवाही के कारण कूड़ा फेंककर बंद कर दिया गया है। शेर के बगल से एक रास्ता नीचे पुलिया की तरफ भी जाता है। जिसकी चौड़ाई करीब 12 फुट है। इसमें सात फुट लोगों ने दीवाल चलाकर कब्जा कर लिया है। स्थानीय लोगों के कई बार शिकायत के बाद भी पैमाइश कराकर कब्जा नहीं हटाया गया। जिसकी वजह से ऐतिहासिक धरोहर का वजूद खतरे में है। डीएम के निरीक्षण से स्थानीय लोगों की आस जगी है। उनकी मांग है कि रास्ते से अतिक्रमण हटाया जाए।
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