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2005 के बाद नहीं बने है एक भी शौचालय व शौचालय
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:03 AM IST
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धर्मापुर। एक तरफ सूबे की वर्तमान सरकार गरीब जनता के लिए सुविधाओं का अंबार लगा रही है। वहीं जिम्मेदार भी पलीता लगाने से नहीं चूक रहे हैं।धर्मापुर ब्लाक के कमरही गांव में 2005 के बाद से अब तक न तो शौचालय बनवाया गया है और न ही लोगों को रहने के लिए छत ही नसीब कराया गया है।जिससे आज भी अधिकांश लोग खुले मं शौच करने और झोपड़ी में रहने को विवश हैं।
करमही गांव की दलित बस्ती की आबादी लगभग 150 है। 20 से 25 घर हैं। इस दलित बस्ती के लोगों का आरोप है कि 2005 के बाद न तो एक भी शौचालय बने हैं और न ही एक भी सरकारी आवास बनवाया गया है। जिन एक दो लोगों को मिला भी तो वह अभी तक अर्धनिर्मित हैं। जिसके कारण आज भी लोगों को अपना गुजर बसर झोपड़ियों में करना पड़ रहा है। हालांकि गांव के एक दो लोगों को ग्राम प्रधान द्वारा विशेष पैरवी करवाने पर आवास मिला तो लेकिन आज तक उस पर छत नही पड़ सकी है। गांव के राजेश, बेचू, लौटन आदि ने बताया कि शौचालय तो मिला लेकिन धन नहीं मिलने से वह आज तक अर्ध निर्मित है। वहीं गांव की चंपा देवी पत्नी सतीराम ने बताया कि उन्हें 17 मार्च को सरकारी आवास मिला लेकिन आजतक आवास का छत नहीं बन पाया है। जिससे वे आज भी झोपड़ी में रहने को विवश हैं।
मानक के अंतर्गत आने वाले सभी लोगों को शौचालय व आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जब दीवार तैयार हो जाती है, तब ग्राम विकास अधिकारी द्वारा रिपोर्ट लगाई जाती है। इसके बाद पैसा फिर दिया जाता है। अगर इसमें कही कोई कमी है तो जांच कर तुरंत कार्यवाई की जाएगी। - अशोक कुमार मौर्य, एडीओ पंचायत
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करमही गांव की दलित बस्ती की आबादी लगभग 150 है। 20 से 25 घर हैं। इस दलित बस्ती के लोगों का आरोप है कि 2005 के बाद न तो एक भी शौचालय बने हैं और न ही एक भी सरकारी आवास बनवाया गया है। जिन एक दो लोगों को मिला भी तो वह अभी तक अर्धनिर्मित हैं। जिसके कारण आज भी लोगों को अपना गुजर बसर झोपड़ियों में करना पड़ रहा है। हालांकि गांव के एक दो लोगों को ग्राम प्रधान द्वारा विशेष पैरवी करवाने पर आवास मिला तो लेकिन आज तक उस पर छत नही पड़ सकी है। गांव के राजेश, बेचू, लौटन आदि ने बताया कि शौचालय तो मिला लेकिन धन नहीं मिलने से वह आज तक अर्ध निर्मित है। वहीं गांव की चंपा देवी पत्नी सतीराम ने बताया कि उन्हें 17 मार्च को सरकारी आवास मिला लेकिन आजतक आवास का छत नहीं बन पाया है। जिससे वे आज भी झोपड़ी में रहने को विवश हैं।
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मानक के अंतर्गत आने वाले सभी लोगों को शौचालय व आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जब दीवार तैयार हो जाती है, तब ग्राम विकास अधिकारी द्वारा रिपोर्ट लगाई जाती है। इसके बाद पैसा फिर दिया जाता है। अगर इसमें कही कोई कमी है तो जांच कर तुरंत कार्यवाई की जाएगी। - अशोक कुमार मौर्य, एडीओ पंचायत
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