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डा. रजनीश श्रीवास्तव व डा. अरशद पर वाद दर्ज
Updated Tue, 22 May 2018 11:32 PM IST
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जौनपुर। लापरवाही के चलते महिला की मौत और फर्जीवाड़े के मामले में सीजेएम ने मंगलवार को दो चिकित्सकों के खिलाफ वाद दर्ज किया है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को मामले की जांच कर आख्या देने का निर्देश जारी किया है।
बक्शा इलाके के मझौली गांव निवासी राजेश मौर्या ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया कि उनकी मां यशोदा को बुखार व पेट दर्द की शिकायत थी। उन्होंने 15 नवंबर 2017 को मड़ियाहूं पड़ाव स्थित डा. रजनीश श्रीवास्तव के नर्सिंग होम में उन्हें भर्ती कराया। डॉ. अरशद व डॉ. रजनीश ने उनका इलाज किया। जांच में डेंगू नेगेटिव पाया गया। डॉ. अरशद ने आठ यूनिट ब्लड चढ़ाया। तबियत ठीक न होने पर 18 नवंबर को डॉ. अरशद ने उन्हें नोवा हॉस्पिटल वाराणसी रेफर कर दिया। वहां जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। 19 नवंबर को उसकी मां कोमा में चली गई और 21 नवंबर को उसकी मौत हो गई। डाक्टरों से इलाज के दस्तावेज मांगे गए तो वे हीलाहवाली करने लगे। उसके बाद मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत की गई। मुख्यमंत्री कार्यालय के रिपोर्ट मांगने पर डॉ. अरशद ने आधे अधूरे प्रपत्र भेजे। पर्ची पर डॉ. अरशद का रजिस्ट्रेशन नंबर 30708 तथा एमबीबीएस की डिग्री लिखी थी। पता चला कि यह पंजीकरण नंबर बनारस के किसी चिकित्सक का है। उसके बाद डा. अरशद ने 12 मार्च 2018 को फर्जी प्रपत्रों के आधार पर पंजीकरण कराया, जो गलत था। डॉ. अरशद खुद को एमबीबीएस चिकित्सक बताकर मरीजों का गलत इलाज करते रहे। दोनों मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। उनके खिलाफ थाना लाइन बाजार, एसपी व उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद सीजेएम न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया है। जिस पर सीजेएम ने वाद दायर कर जांच का आदेश दिया है।
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बक्शा इलाके के मझौली गांव निवासी राजेश मौर्या ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया कि उनकी मां यशोदा को बुखार व पेट दर्द की शिकायत थी। उन्होंने 15 नवंबर 2017 को मड़ियाहूं पड़ाव स्थित डा. रजनीश श्रीवास्तव के नर्सिंग होम में उन्हें भर्ती कराया। डॉ. अरशद व डॉ. रजनीश ने उनका इलाज किया। जांच में डेंगू नेगेटिव पाया गया। डॉ. अरशद ने आठ यूनिट ब्लड चढ़ाया। तबियत ठीक न होने पर 18 नवंबर को डॉ. अरशद ने उन्हें नोवा हॉस्पिटल वाराणसी रेफर कर दिया। वहां जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। 19 नवंबर को उसकी मां कोमा में चली गई और 21 नवंबर को उसकी मौत हो गई। डाक्टरों से इलाज के दस्तावेज मांगे गए तो वे हीलाहवाली करने लगे। उसके बाद मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत की गई। मुख्यमंत्री कार्यालय के रिपोर्ट मांगने पर डॉ. अरशद ने आधे अधूरे प्रपत्र भेजे। पर्ची पर डॉ. अरशद का रजिस्ट्रेशन नंबर 30708 तथा एमबीबीएस की डिग्री लिखी थी। पता चला कि यह पंजीकरण नंबर बनारस के किसी चिकित्सक का है। उसके बाद डा. अरशद ने 12 मार्च 2018 को फर्जी प्रपत्रों के आधार पर पंजीकरण कराया, जो गलत था। डॉ. अरशद खुद को एमबीबीएस चिकित्सक बताकर मरीजों का गलत इलाज करते रहे। दोनों मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। उनके खिलाफ थाना लाइन बाजार, एसपी व उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद सीजेएम न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया है। जिस पर सीजेएम ने वाद दायर कर जांच का आदेश दिया है।
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