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जब वतन को पड़े लहू की जरूरत.....
Updated Fri, 11 May 2018 12:24 AM IST
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चंदवक थाना क्षेत्र के परसौड़ी दानगंज स्थित कबीर मठ में सबद, रमैनी, कीर्तन खिचड़ी और सधुक्कड़ी भाषा के भजन सुन श्रोता भाव विभोर हुए तो देर रात्रि तक चले कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में कवियों ने कविता पाठ के माध्यम से राष्ट्रभक्ति का भाव जगाया। राजनैतिक व सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार के साथ हास्य व्यंग सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
कार्यक्रम की शुरुआत पवन पांडेय की सरस्वती वंदना से हुई। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे डॉ. बहादुर अली ख़ान मिनाई ने लोगों में देश भक्ति का जज्बा भरते हुए अपनी रचनाओं से खूब वाहवाही बटोरी। उनकी रचना जब वतन को पड़े लहू की जरूरत, फेहरिस्त में पहले मेरा नाम लिख लेना, जहां दांव पर लग जाए मुल्क की आबरू वहां मेरी जिंदगी का इंतकाम लिख देना...। को लोगों ने खूब पसंद किया। सूबेदार पांडेय ने जइसन पइसा वइसन माल...। मंडी में हर माल बिकत हव सुनाकर भ्रष्टाचार पर प्रहार किया। मुन्ना घायल की गजल तुम्हारी यादों के चंद आंसू हमारी आंखों में पल रहे हैं...। को खूब सराहा गया। राजनीतिक भ्रष्टाचार पर कटाक्ष करते हुए नंदलाल समीर ने कुछ यूं पढ़ा यदि मैं मंत्री का बाप होता अजट बजट सब साफ होता। नंदलाल राढ़ी ने मंहगाई, शिक्षा और नशा पर हास्य कविता सुनाकर उपस्थित जनों को खूब हंसाया। साहब लाल सहज ने वर्तमान सामाजिक परिवेश पर व्यंग कसते हुए सुनाया पाती में जब बइठ के न खाया तब समझा ई पिछड़ापन हौ। प्राइमरी में जब लड़का पढ़इबा त समझा ई पिछड़ापन हौ। इसके अलावा बंजर जौनपुरी, दिनेश दिनकर, मुन्ना वाचाल, श्रीपति सिंह एवं पवन पांडेय ने कविता सुनाकर वाहवाही लूटी। अध्यक्षता मदन मोहन शुक्ल और संचालन डॉ. बहादुर अली खान मिनाई ने की। प्रायोजक बाबा बालक दास एवं डा. कृष्ण कुमार यादव ने सभी के प्रति आभार जताया। इस मौके पर गुल्ली पांडेय, जीत बहादुर सिंह ,प्रमोद पांडेय एवं दिलीप उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत पवन पांडेय की सरस्वती वंदना से हुई। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे डॉ. बहादुर अली ख़ान मिनाई ने लोगों में देश भक्ति का जज्बा भरते हुए अपनी रचनाओं से खूब वाहवाही बटोरी। उनकी रचना जब वतन को पड़े लहू की जरूरत, फेहरिस्त में पहले मेरा नाम लिख लेना, जहां दांव पर लग जाए मुल्क की आबरू वहां मेरी जिंदगी का इंतकाम लिख देना...। को लोगों ने खूब पसंद किया। सूबेदार पांडेय ने जइसन पइसा वइसन माल...। मंडी में हर माल बिकत हव सुनाकर भ्रष्टाचार पर प्रहार किया। मुन्ना घायल की गजल तुम्हारी यादों के चंद आंसू हमारी आंखों में पल रहे हैं...। को खूब सराहा गया। राजनीतिक भ्रष्टाचार पर कटाक्ष करते हुए नंदलाल समीर ने कुछ यूं पढ़ा यदि मैं मंत्री का बाप होता अजट बजट सब साफ होता। नंदलाल राढ़ी ने मंहगाई, शिक्षा और नशा पर हास्य कविता सुनाकर उपस्थित जनों को खूब हंसाया। साहब लाल सहज ने वर्तमान सामाजिक परिवेश पर व्यंग कसते हुए सुनाया पाती में जब बइठ के न खाया तब समझा ई पिछड़ापन हौ। प्राइमरी में जब लड़का पढ़इबा त समझा ई पिछड़ापन हौ। इसके अलावा बंजर जौनपुरी, दिनेश दिनकर, मुन्ना वाचाल, श्रीपति सिंह एवं पवन पांडेय ने कविता सुनाकर वाहवाही लूटी। अध्यक्षता मदन मोहन शुक्ल और संचालन डॉ. बहादुर अली खान मिनाई ने की। प्रायोजक बाबा बालक दास एवं डा. कृष्ण कुमार यादव ने सभी के प्रति आभार जताया। इस मौके पर गुल्ली पांडेय, जीत बहादुर सिंह ,प्रमोद पांडेय एवं दिलीप उपस्थित रहे।
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