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पशु-पक्षियों को पानी के लिए नदी खोद दिया कुंआ
Updated Thu, 10 May 2018 12:15 AM IST
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खोदा कुआं
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मीरगंज। वरुणा नदी में साल भर पानी भरा रहता था। मगर यह नदी अब मृतप्राय हो गई है। गर्मी बढ़ने के साथ ही नदी में पानी बिलकुल सूख गया है। ऐसे में पशु-पंछियों के लिए पीने का पानी इलाके में कहीं नहीं बचा है। इसको देखते हुए एक संत ने नदी में कुआं खोद कर उनकी प्यास बुझाने का बंदोबस्त किया है।
क्षेत्र के बसेरवा गांव में वरुणा नदी के किनारे बसा है। वरुणा के सूखने के बाद गांव में पशुओं के लिए पेयजल का संकट हो गया था। भीषण गर्मी के चलते क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में तालाब भी सूख चुके हैं। उनमें कीचड़ हो गया है। कहीं पानी है भी तो वह मटमैला हो गया है। जानवरों को पेयजल की घोर किल्लत का सामना करना पड़ रहा था। कबीर मठ गद्दी बड़ेया आश्रम के संत भोला दास ने नदी के बीचोबीच एक कुआं खोद डाला है। कुएं तक पशुओं के आसानी से पहुंचने के लिए उन्होंने कुएं को ढलानदार बना दिया है। ढाल ऐसा बनाया गया है कि पशुओं को उतरने में दिक्कत न हो। सैकड़ों पशु-पंछी रोजाना इस कुएं से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। रात्रि में जंगली जानवरों के झुंड भी इस कुएं से प्यास बुझा रहे हैं। ब्रम्हचारी भोला दास का कहना है कि पशुओं की समस्या को देखते हुए ही उन्होंने कुआं खोदा है।
क्षेत्र के बसेरवा गांव में वरुणा नदी के किनारे बसा है। वरुणा के सूखने के बाद गांव में पशुओं के लिए पेयजल का संकट हो गया था। भीषण गर्मी के चलते क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में तालाब भी सूख चुके हैं। उनमें कीचड़ हो गया है। कहीं पानी है भी तो वह मटमैला हो गया है। जानवरों को पेयजल की घोर किल्लत का सामना करना पड़ रहा था। कबीर मठ गद्दी बड़ेया आश्रम के संत भोला दास ने नदी के बीचोबीच एक कुआं खोद डाला है। कुएं तक पशुओं के आसानी से पहुंचने के लिए उन्होंने कुएं को ढलानदार बना दिया है। ढाल ऐसा बनाया गया है कि पशुओं को उतरने में दिक्कत न हो। सैकड़ों पशु-पंछी रोजाना इस कुएं से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। रात्रि में जंगली जानवरों के झुंड भी इस कुएं से प्यास बुझा रहे हैं। ब्रम्हचारी भोला दास का कहना है कि पशुओं की समस्या को देखते हुए ही उन्होंने कुआं खोदा है।
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