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लेखपाल सहित पांच के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज
Updated Tue, 08 May 2018 12:48 AM IST
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जौनपुर। सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के पाल्हामऊ गांव निवासी मेवालाल (88) की भूमि का गलत तरीके से बैनामा करने के आरोप में वादी की दरखास्त पर कोर्ट ने राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) व लेखपाल समेत पांच के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज किया है। साथ ही थाने से आख्या तलब किया है।
पाल्हामऊ निवासी पप्पू सोनकर ने कोर्ट में 156 (3) के तहत दरख्वास्त दिया कि उसके पिता मेवालाल वृद्ध हैं। वादी की पड़ोसी महिला अभियुक्त जमीन के विक्रय के लिए घर आकर पिता को बहलाती फुसलाती थी। नशा के लिए पैसे भी देती थी। उसने अन्य आरोपियों की साजिश से वादी के पिता से 5 अक्टूबर 2017 को उनकी जमीन विक्रय करने की अनुमति प्रदान करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिलवाया था। अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन के अंतरण की अनुज्ञा कलेक्टर कुछ विशेष परिस्थितियों में दे सकते है। प्रार्थना पत्र में कहा गया था वह असाध्य रोग से ग्रसित हैं। आमदनी का कोई जरिया नहीं है और बिना जमीन की बिक्री के इलाज संभव नहीं है। जिलाधिकारी के आदेश के अनुक्रम में राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) व लेखपाल द्वारा आख्या दी गई कि मेवालाल निमोनिया व फुसफुस जैसे असाध्य रोग से ग्रसित हैं। बिमारी के कारण उन पर कर्ज का बोझ है। कानूनी प्रावधान के तहत ऐसी बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा जांच आवश्यक है। बिना विशेषज्ञ डॉक्टर की रिपोर्ट के राजस्व अधिकारियों ने 25 जनवरी 2018 को गलत तरीके से भूमि विक्रय की अनुमति प्रदान कर दी। जमीन का विक्रय पिता मेवालाल द्वारा अभियुक्त महिला के पक्ष में 27 जनवरी 2018 को किया गया। बैनामा दस्तावेज दस्तावेज में पिता मेवालाल द्वारा व्यापार के लिए रुपये की आवश्यकता का हवाला देते हुए जमीन का विक्रय किया गया। जबकि विक्रय की अनुमति असाध्य बीमारियां दिखाकर प्राप्त की गई थी। आरोपियों की इस धोखाधड़ी व जालसाजी के खिलाफ थाना व एसपी को दरखास्त के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। तब वादी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिस पर कोर्ट ने आख्या तलब किया है।
पाल्हामऊ निवासी पप्पू सोनकर ने कोर्ट में 156 (3) के तहत दरख्वास्त दिया कि उसके पिता मेवालाल वृद्ध हैं। वादी की पड़ोसी महिला अभियुक्त जमीन के विक्रय के लिए घर आकर पिता को बहलाती फुसलाती थी। नशा के लिए पैसे भी देती थी। उसने अन्य आरोपियों की साजिश से वादी के पिता से 5 अक्टूबर 2017 को उनकी जमीन विक्रय करने की अनुमति प्रदान करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिलवाया था। अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन के अंतरण की अनुज्ञा कलेक्टर कुछ विशेष परिस्थितियों में दे सकते है। प्रार्थना पत्र में कहा गया था वह असाध्य रोग से ग्रसित हैं। आमदनी का कोई जरिया नहीं है और बिना जमीन की बिक्री के इलाज संभव नहीं है। जिलाधिकारी के आदेश के अनुक्रम में राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) व लेखपाल द्वारा आख्या दी गई कि मेवालाल निमोनिया व फुसफुस जैसे असाध्य रोग से ग्रसित हैं। बिमारी के कारण उन पर कर्ज का बोझ है। कानूनी प्रावधान के तहत ऐसी बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा जांच आवश्यक है। बिना विशेषज्ञ डॉक्टर की रिपोर्ट के राजस्व अधिकारियों ने 25 जनवरी 2018 को गलत तरीके से भूमि विक्रय की अनुमति प्रदान कर दी। जमीन का विक्रय पिता मेवालाल द्वारा अभियुक्त महिला के पक्ष में 27 जनवरी 2018 को किया गया। बैनामा दस्तावेज दस्तावेज में पिता मेवालाल द्वारा व्यापार के लिए रुपये की आवश्यकता का हवाला देते हुए जमीन का विक्रय किया गया। जबकि विक्रय की अनुमति असाध्य बीमारियां दिखाकर प्राप्त की गई थी। आरोपियों की इस धोखाधड़ी व जालसाजी के खिलाफ थाना व एसपी को दरखास्त के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। तब वादी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिस पर कोर्ट ने आख्या तलब किया है।
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