{"_id":"68cc530d6cfc064d200a04e4","slug":"water-filled-in-huts-living-on-the-road-orai-news-c-224-1-ori1005-134780-2025-09-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jalaun News: झोपड़ियों में भरा पानी, सड़क पर गुजर-बसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jalaun News: झोपड़ियों में भरा पानी, सड़क पर गुजर-बसर
विज्ञापन
फोटो - 22 जुग्गी झोपड़ी में भरा पानी। संवाद फोटो -23 जलभराव के कारण झोपड़ियां से बाहर हुए बच्चें। संवाद
फोटो - 24 चौक पड़ा फैक्टरी का नाला। संवाद
तीन माह से जलभराव होने से परेशान लोगों ने की पालिका से लगाई गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
कोंच। कई महीनों से क्षेत्र में डेरा डाले खानाबदोश लोगों की झोपड़ियां तीन माह से पानी में डूबी हैं। जिससे वह लोग सड़क पर डेरा डाल कर जिंदगी गुजार रहे हैं। उन्हें सिर छुपाने की भी जगह नहीं है। जलभराव हो जाने से बच्चों समेत अन्य लोग झोपड़ियां छोड़ कर सड़क पर खुले आसमान के नीचे दिन काट रहे हैं। उन लोगों ने पालिका से जलनिकासी कराने की मांग की है।
पिछले कई सालों से फतेहपुर जिले के रहने वाले खानाबदोश लोग अपने परिवार के साथ कस्बे के फैक्ट्ररी एरिया में जुग्गी झोपड़ी बना कर रह रहे है। बारिश हो जाने से पिछले तीन माह से उनके झोपड़ियों में पानी भर गया है। जिससे वह सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। दिनरात सड़कों पर ही खाना बनाकर खा रहे हैं। जलभराव के कारण कीड़े - मकोड़े निकलते रहते है। जिससे उन्हें काटने का डर बना रहता है। वहां आस पास के खंभों की लाइटें भी खराब पड़ी है। इलाकाई लोगों ने बताया कि नाला जाम होने से जलभराव की समस्या बनी हुई है। जुग्गी - झोपड़ी में रहने वाले रामकुमार, फूलचंद, रामू, राजू, पुत्तन, कलियां, अशोक, रमेश, भारतीय राजरानी, आशादेवी, लक्ष्मीदेवी, कल्पना मीना आदि का कहना है कि तीन माह से झोपड़ियों में पानी भरा है हम लोग सड़कों पर दिन रात काट रहे है कोई सुनने वाला नहीं है। वार्ड सभासद से जलनिकासी के लिए कई बार कहा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने पालिका से जलनिकासी व इलाके में प्रकाश व्यवस्था ठीक कराने की मांग की है।
फोटो - 25 पुत्तन
बारिश में तिरपाल ओढ़कर खड़े रहे हम लोग
झोपड़ी में रहने वाले पुत्तन का कहना है कि झोपड़ियों में भरा पानी मुसीबत बना हुआ है। महिलाओं से लेकर बच्चे तक सड़कों पर पड़े हुए है। हम लोग बारिश में तिरपाल ओढ़कर खड़े रहते है। कहीं सिर छिपाने तक कि जगह नहीं हैं।
विज्ञापन
फोटो -26 आशा देवी
कोई नहीं सुनता हम गरीबों की
महिला आशा देवी का कहना है कि काफी सालों से यहां डेरा डालकर दो वक्त की रोटी खा रहे है लेकिन झोपड़ियों में भरा सड़क पर खाना पीना से लेकर सोने तक को मजदूर है। छोटे छोटे बच्चें भी बिना झोपड़ियों से सड़कों पर भटक रहे है। जलभराव की समस्या को झेलते झेलते तीन माह हो चुके हैं। लेकिन हम लोगों की कोई सुनने वाला नहीं है।
विज्ञापन
फोटो - 24 चौक पड़ा फैक्टरी का नाला। संवाद
तीन माह से जलभराव होने से परेशान लोगों ने की पालिका से लगाई गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
कोंच। कई महीनों से क्षेत्र में डेरा डाले खानाबदोश लोगों की झोपड़ियां तीन माह से पानी में डूबी हैं। जिससे वह लोग सड़क पर डेरा डाल कर जिंदगी गुजार रहे हैं। उन्हें सिर छुपाने की भी जगह नहीं है। जलभराव हो जाने से बच्चों समेत अन्य लोग झोपड़ियां छोड़ कर सड़क पर खुले आसमान के नीचे दिन काट रहे हैं। उन लोगों ने पालिका से जलनिकासी कराने की मांग की है।
पिछले कई सालों से फतेहपुर जिले के रहने वाले खानाबदोश लोग अपने परिवार के साथ कस्बे के फैक्ट्ररी एरिया में जुग्गी झोपड़ी बना कर रह रहे है। बारिश हो जाने से पिछले तीन माह से उनके झोपड़ियों में पानी भर गया है। जिससे वह सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। दिनरात सड़कों पर ही खाना बनाकर खा रहे हैं। जलभराव के कारण कीड़े - मकोड़े निकलते रहते है। जिससे उन्हें काटने का डर बना रहता है। वहां आस पास के खंभों की लाइटें भी खराब पड़ी है। इलाकाई लोगों ने बताया कि नाला जाम होने से जलभराव की समस्या बनी हुई है। जुग्गी - झोपड़ी में रहने वाले रामकुमार, फूलचंद, रामू, राजू, पुत्तन, कलियां, अशोक, रमेश, भारतीय राजरानी, आशादेवी, लक्ष्मीदेवी, कल्पना मीना आदि का कहना है कि तीन माह से झोपड़ियों में पानी भरा है हम लोग सड़कों पर दिन रात काट रहे है कोई सुनने वाला नहीं है। वार्ड सभासद से जलनिकासी के लिए कई बार कहा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने पालिका से जलनिकासी व इलाके में प्रकाश व्यवस्था ठीक कराने की मांग की है।
विज्ञापन
फोटो - 25 पुत्तन
बारिश में तिरपाल ओढ़कर खड़े रहे हम लोग
झोपड़ी में रहने वाले पुत्तन का कहना है कि झोपड़ियों में भरा पानी मुसीबत बना हुआ है। महिलाओं से लेकर बच्चे तक सड़कों पर पड़े हुए है। हम लोग बारिश में तिरपाल ओढ़कर खड़े रहते है। कहीं सिर छिपाने तक कि जगह नहीं हैं।
विज्ञापन
फोटो -26 आशा देवी
कोई नहीं सुनता हम गरीबों की
महिला आशा देवी का कहना है कि काफी सालों से यहां डेरा डालकर दो वक्त की रोटी खा रहे है लेकिन झोपड़ियों में भरा सड़क पर खाना पीना से लेकर सोने तक को मजदूर है। छोटे छोटे बच्चें भी बिना झोपड़ियों से सड़कों पर भटक रहे है। जलभराव की समस्या को झेलते झेलते तीन माह हो चुके हैं। लेकिन हम लोगों की कोई सुनने वाला नहीं है।