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अन्ना ने नष्ट की 39 बीघा की चना मटर की फसल

Thu, 09 Dec 2021 10:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Dec 2021 10:39 PM IST
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गोशाला के बाहर खड़े किसान - फोटो : ORAI
कदौरा। गोशाला का गेट व तार तोड़ कर निकले मवेशियों ने 39 बीघे चना और मटर की फसल रौंद दी। किसानों ने जिम्मेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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थाना क्षेत्र के ग्राम चन्दरसी में बुधवार की रात गोशाला का गेट व तोड़ कर निकले 50 अन्ना मवेशियों ने गांव के किसानों की 39 बीघे की चना, मटर व मसूर की फसल रौंद दी। सुबह जब किसानों ने मवेशियों को खेतों में घुसे देखा तो हड़कंप मच गया। किसानों ने मवेशियों को हांक कर गोशाला में बंद किया। गोशाला में चारे पानी का इंतजाम न होने पर आक्रोशित किसानों ने गोशाला कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि गोशाला में व्यवस्थाएं न होने से अक्सर गोशाला से निकल कर मवेशी किसानों की फसल बर्बाद कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। मवेशियों ने किसान विजयपाल की 4 बीघे मटर, शिवराज 8 बीघे मटर, संतोष 2 बीघे मसूर, हरिकांत 2 बीघे मटर, शिवकुमार 2 बीघे मटर आदि की फसल रौंद दी। किसानों का आरोप है कि गांव में स्थित गोशाला में चारे पानी की व्यवस्था नहीं है। मवेशी अक्सर गेट व तार तोड़ कर निकल जाते हैं और खेतों को निशाना बनाते हैं। कई बार मुख्यमंत्री पोर्टल व ब्लाक में शिकायत भी की। पर सुनवाई नहीं हुई है। इस संबंध में एसडीएम के के सिंह ने बताया कि मौके पर बीडीओ कदौरा को गोशाला निरीक्षण के निर्देश दिए है।
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गोशाला में मवेशी बंद करने पर विवाद
कदौरा। थाना क्षेत्र के ग्राम कानाखेड़ा में गुरुवार सुबह छह किसानों ने गांव में घूम रहे 12 अन्ना मवेशियों को हांक कर गोशाला बंद करने गए। तो वहां पर मौजूद चरवाहों इंद्रजीत व बाबूलाल ने मना कर दिया। बोले, गोशाला में मवेशी क्षमता से अधिक है। इस पर किसान व चरवाहों में विवाद हो गया। विवाद बढ़ते बढ़ते हाथापाई तक पहुंच गया। आक्रोशित किसानों ने गोशाला के गेट का ताला तोड़ कर मवेशियों को गोशाला में जबरन बंद कर दिया। ग्राम प्रधान सन्तोष कुमार ने बताया कि बंद मवेशी पशुपालकों के है। इसकी शिकायत उन्होंने पुलिस से की है। (संवाद)
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फोटो-18-पंचायत भवन में बंधे जानवर। संवाद
पंचायत भवन में बंाध रहे मवेशी
माधौगढ़। शासन प्रशासन की सख्ती के बाद भी ग्रामीण सरकारी भवनों पर कब्जा हैं। ऐसा ही मामला रामहेतपुरा गांव का हैं। 1995 में रामहेतपुरा को आंबेडकर गांव का दर्जा दिया गया था। यहां पर 6.50 लाख की लागत से पंचायत भवन का निर्माण कराया गया। भवन पर थान सिंह ने कब्जा कर लिया। यहां तक जानवरों के साथ-साथ भूसा और घास रखने लगे। प्रधान विनोद कुमार का कहना हैं कि परिसर पर जानवर बांधने का विरोध किया तो लड़ने को उतारू हो गए। यही नहीं बाउंड्री तोड़ दी गई। पंचायत भवन पर एक भी मीटिंग नहीं कर सके। जानवर परिसर पर बांधे जा रहे हैं। चारा अंदर रखा हैं। प्रधान का कहना हैं कि एडीओ पंचायत छेदालाल को अवगत कराने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। बीडीओ दीपक यादव का कहना हैं कि जानकारी नहीं हैं। शीघ्र ही जांच करवाकर पंचायत भवन खाली कराया जाएगा।
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