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नदी का उफान जारी, प्रशासन ने खाली कराए निचले इलाके
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बिलौड मे डूबा प्राथमिक विद्यालय छत पर बैठे लोग
- फोटो : ORAI
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उरई। मध्यप्रदेश व राजस्थान में हो रही भारी बारिश की वजह से जिले की नदियां उफान पर है। जहां यमुना ने खतरे के निशान के पार कर लिया है। तो वहीं बेतवा भी उफान पर है। नदी में पानी भरने से नदी पटटी के गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है। वहीं कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिससे प्रशासन ने निचले इलाकों को पूर्णता खाली कराया लिया है। वहीं जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने सभी उपजिलाधिकारियों व लेखपालों को निर्देश दिए है कि बाढ़ की स्थिति पर लगाता नजर बनाए रखे। वहीं स्वास्थ्य व पशुपालन विभाग के अधिकारियों को भी अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकाल का प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। जिले में बाढ़ से फिलहाल को जनहानि की सूचना नहीं है। पर सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न होने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
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खतरे के निशान से 3 मीटर ऊपर बह रही यमुना
कई गांव बाढ़ की चपेट में, नाव से हो रहा आवागमन
संवाद न्यूज एजेंसी।
कालपी। यमुना का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। इससे नदी किनारे बसे दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। गुरुवार को यमुना ने खतरे के निशान से 108 मीटर से 3 मीटर ऊपर बह रही है। हालांकि जिला प्रशासन लगातार सतर्क व सक्रिय है। सभी बाढ़ राहत चौकियों के कर्मचारी लगातार राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।
लगातार हो रही बारिश के कारण चंबल नदी में पानी छोड़ने से यमुना का जलस्तर सोमवार से तेजी से बढ़ना शुरू हुआ था जो मंगलवार को 105 मीटर, बुधवार को खतरे के निशान को पार करते हुए 108.30 सेमी के पार पहुंच गया था। गुरुवार को जलस्तर अपने इस वर्ष के अधिकतम रिकॉर्ड जलस्तर 111 मीटर रिकॉर्ड किया गया। केंद्रीय जल आयोग के प्रभारी रूपेश कुमार ने बताया कि मौजूदा समय में यमुना का जलस्तर 8 से 10 सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है। अभी पानी और बढ़ने के आसार हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की मदद व आवागमन हेतु नावों की व्यवस्था की गई है। यह भी निर्देश जारी किये गये हैं कि बाढ़ में अधिक भार न लादा जाए। इसके अलावा क्षेत्रीय तैराकों को भी मौके पर लगाया गया है। यमुना में बढ़ रहे पानी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। हर स्थिति से निपटने की कवायद की जा रही है। यमुना नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी की वजह से यमुना पट्टी के ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। जोंधर रपटा तो जलमग्न हो ही गया व कालपी-मंगरौल मार्ग व आसपास के अधिकांश गांव में नदी का पानी घुस गया। कई गांवों का संपर्क टूट गया है।
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इन गांवों में भरा पानी
नदी पट्टी के गांव मंगरौल, मैनुपुर, कीरतपुर, देवकली, हीरापुर, गुढ़ापुरवा, कुटरा, नरहान आदि गांवों में यमुना नदी का पानी आ गया है। प्रशासन ने निचले इलाकों को पूर्णता खाली करा लिया है। वहीं ग्रामीणों की मदद के लिए नावों को लगाया गया है।
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पुल बना सेल्फ ी प्वाइंट
एक ओरयमुना में आई बाढ़ की वजह से नदी पट्टी के गांवों में हाहाकार मचा हुआ है। तो वहीं दूसरी ओर शहर इलाके के लोगों के लिए उत्साहित नजर आ रहे है। स्थिति यह है कि इस समय यमुना नदी का पुल सेल्फ ी प्वाइंट बन गया है। नगर व आसपास के क्षेत्रों के निवासी खासकर युवा बाढ़ देखने, पुराने यमुना पुल पर आ रहे हैं। और सेल्फ ी लेते हुए देखे जा रहे है, जो बेहद खतर नाक है। उपजिलाधिकारी कौशल कुमार ने चेतावनी दी कि कोई भी व्यक्ति ऐसा न करे। उन्होंने ओवरलोड सवारियां लादकर पुल पार न कराएं। पकडे़ जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
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इन मार्गों पर आवागमन बंद
नगर का पचपिंडा देवी मार्ग भी बंद, कालपी गुलौली मार्ग बंद, कालपी मगरौल मार्ग बंद,
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फोटो -नाव से जाते इकौना गांव के लोग। संवाद
जलस्तर बढ़ने से दो गांवों का संपर्क टूटा
- छह सौ बीघे की फ सल बर्बाद, सड़कों पर चल रही नाव
संवाद न्यूज एजेंसी
कदौरा। यमुना के रौद्र रूप देख कर ग्रामीणों में है अजीब सी दहशत है। लगातार जलस्तर बढ़ने से ब्लाक क्षेत्र के गांव इकौना और निधान का डेरा का संपर्क ब्लाक मुख्यालय से टूट गया है। अब इन गांवों में जाने के लिए लोगों के पास सिर्फ नाव का सहारा है। इकौना के किसान राम विलास, महाबीर, राजेश, स्यामसुंदर, जगदीश, बाबूराम, रामप्रकाश, राममोहन, निधान के डेरा निवासी वीर सिंह, छिद्दू, वीरपाल, चंद्रशेखर, राजा राम, तथा रैला निवासी जगदीश, लालाराम, सुरजन परमानन्द लाल आदि ने बताया कि छह सौ बीघे की फसल में तिल, मूंग, उर्द, जुवार, बाजरा आदि लगा जलमग्न हो चुका है। ग्रामीणों ने बताया इस तरह की बाढ़ 1980 में आई थी। जब पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया था अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं आई है। एसडीएम कौशल कुमार ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार नजर रखी जा रही है टीम लगा दी गई है।
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यमुना का जल स्तर बढ़ने से गांव में घुसा पानी
सिरसा कलार। महेवा ब्लॉक के गांव खडग़ोई दिवारा में यमुना का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी गांव में घरों तक घुस गया है। इस कारण ग्रामीण सामान लेकर पलायन कर रहे हैं।
बताते चलें कि रात में पानी छोड़े जाने से यमुना में आई बाढ़। यमुना के किनारे बसा, खढग़ोई दिवारा में कई लोगों के घर, पानी से घिर चुके है। गांव के लोग घरों से सामान लेकर दूसरी जाने को मजबूर है। अपने जानवर ढील दिए है। गांव के पूर्व प्रधान शलीम खा का कहना है कि लोगों को रात का भय है, कि कही ज्यादा पानी हो गया तो मुश्किल हो जाएगी। लेखपाल सोनू का कहना है कि पानी से घिरे परिवार को दूसरी जगह भेजने में लोगो की मदद की जा रही है।
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बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा भी बढ़ा
कुठौंद। यमुना का रौद्र रूप देख लोगों की धड1कने तेज हो रही हैं। बीते 3 दिनों से यमुना के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। नैनापुर का भदेख से पूरी तरह संपर्क टूट चुका है( यही हालत टिकरी और लोहईं गाव की भी है। एक दूसरे गांव में आवागमन पूरी तरह से बंद हो चुका है। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। लोग रात रात भर जाग कर सुरक्षित स्थानों पर शरण पाने का प्रयास कर रहे हैं। बाढ़ से खरीफ की फसल नष्ट हो चुकी है. आशंका जताई जा रही है कि पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियां भी बढ़ेंगी। उपजिलाधिकारी व खंड विकास अधिकारी ओम प्रकाश द्विवेदी ने बाढ़ प्रभावित गांव में पंचायत सचिवों को कैंप करने के निर्देश दिए हैं। (संवाद)
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खतरे के निशान से 3 मीटर ऊपर बह रही यमुना
कई गांव बाढ़ की चपेट में, नाव से हो रहा आवागमन
संवाद न्यूज एजेंसी।
कालपी। यमुना का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। इससे नदी किनारे बसे दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। गुरुवार को यमुना ने खतरे के निशान से 108 मीटर से 3 मीटर ऊपर बह रही है। हालांकि जिला प्रशासन लगातार सतर्क व सक्रिय है। सभी बाढ़ राहत चौकियों के कर्मचारी लगातार राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।
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लगातार हो रही बारिश के कारण चंबल नदी में पानी छोड़ने से यमुना का जलस्तर सोमवार से तेजी से बढ़ना शुरू हुआ था जो मंगलवार को 105 मीटर, बुधवार को खतरे के निशान को पार करते हुए 108.30 सेमी के पार पहुंच गया था। गुरुवार को जलस्तर अपने इस वर्ष के अधिकतम रिकॉर्ड जलस्तर 111 मीटर रिकॉर्ड किया गया। केंद्रीय जल आयोग के प्रभारी रूपेश कुमार ने बताया कि मौजूदा समय में यमुना का जलस्तर 8 से 10 सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है। अभी पानी और बढ़ने के आसार हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की मदद व आवागमन हेतु नावों की व्यवस्था की गई है। यह भी निर्देश जारी किये गये हैं कि बाढ़ में अधिक भार न लादा जाए। इसके अलावा क्षेत्रीय तैराकों को भी मौके पर लगाया गया है। यमुना में बढ़ रहे पानी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। हर स्थिति से निपटने की कवायद की जा रही है। यमुना नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी की वजह से यमुना पट्टी के ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। जोंधर रपटा तो जलमग्न हो ही गया व कालपी-मंगरौल मार्ग व आसपास के अधिकांश गांव में नदी का पानी घुस गया। कई गांवों का संपर्क टूट गया है।
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इन गांवों में भरा पानी
नदी पट्टी के गांव मंगरौल, मैनुपुर, कीरतपुर, देवकली, हीरापुर, गुढ़ापुरवा, कुटरा, नरहान आदि गांवों में यमुना नदी का पानी आ गया है। प्रशासन ने निचले इलाकों को पूर्णता खाली करा लिया है। वहीं ग्रामीणों की मदद के लिए नावों को लगाया गया है।
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पुल बना सेल्फ ी प्वाइंट
एक ओरयमुना में आई बाढ़ की वजह से नदी पट्टी के गांवों में हाहाकार मचा हुआ है। तो वहीं दूसरी ओर शहर इलाके के लोगों के लिए उत्साहित नजर आ रहे है। स्थिति यह है कि इस समय यमुना नदी का पुल सेल्फ ी प्वाइंट बन गया है। नगर व आसपास के क्षेत्रों के निवासी खासकर युवा बाढ़ देखने, पुराने यमुना पुल पर आ रहे हैं। और सेल्फ ी लेते हुए देखे जा रहे है, जो बेहद खतर नाक है। उपजिलाधिकारी कौशल कुमार ने चेतावनी दी कि कोई भी व्यक्ति ऐसा न करे। उन्होंने ओवरलोड सवारियां लादकर पुल पार न कराएं। पकडे़ जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
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इन मार्गों पर आवागमन बंद
नगर का पचपिंडा देवी मार्ग भी बंद, कालपी गुलौली मार्ग बंद, कालपी मगरौल मार्ग बंद,
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फोटो -नाव से जाते इकौना गांव के लोग। संवाद
जलस्तर बढ़ने से दो गांवों का संपर्क टूटा
- छह सौ बीघे की फ सल बर्बाद, सड़कों पर चल रही नाव
संवाद न्यूज एजेंसी
कदौरा। यमुना के रौद्र रूप देख कर ग्रामीणों में है अजीब सी दहशत है। लगातार जलस्तर बढ़ने से ब्लाक क्षेत्र के गांव इकौना और निधान का डेरा का संपर्क ब्लाक मुख्यालय से टूट गया है। अब इन गांवों में जाने के लिए लोगों के पास सिर्फ नाव का सहारा है। इकौना के किसान राम विलास, महाबीर, राजेश, स्यामसुंदर, जगदीश, बाबूराम, रामप्रकाश, राममोहन, निधान के डेरा निवासी वीर सिंह, छिद्दू, वीरपाल, चंद्रशेखर, राजा राम, तथा रैला निवासी जगदीश, लालाराम, सुरजन परमानन्द लाल आदि ने बताया कि छह सौ बीघे की फसल में तिल, मूंग, उर्द, जुवार, बाजरा आदि लगा जलमग्न हो चुका है। ग्रामीणों ने बताया इस तरह की बाढ़ 1980 में आई थी। जब पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया था अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं आई है। एसडीएम कौशल कुमार ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार नजर रखी जा रही है टीम लगा दी गई है।
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यमुना का जल स्तर बढ़ने से गांव में घुसा पानी
सिरसा कलार। महेवा ब्लॉक के गांव खडग़ोई दिवारा में यमुना का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी गांव में घरों तक घुस गया है। इस कारण ग्रामीण सामान लेकर पलायन कर रहे हैं।
बताते चलें कि रात में पानी छोड़े जाने से यमुना में आई बाढ़। यमुना के किनारे बसा, खढग़ोई दिवारा में कई लोगों के घर, पानी से घिर चुके है। गांव के लोग घरों से सामान लेकर दूसरी जाने को मजबूर है। अपने जानवर ढील दिए है। गांव के पूर्व प्रधान शलीम खा का कहना है कि लोगों को रात का भय है, कि कही ज्यादा पानी हो गया तो मुश्किल हो जाएगी। लेखपाल सोनू का कहना है कि पानी से घिरे परिवार को दूसरी जगह भेजने में लोगो की मदद की जा रही है।
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बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा भी बढ़ा
कुठौंद। यमुना का रौद्र रूप देख लोगों की धड1कने तेज हो रही हैं। बीते 3 दिनों से यमुना के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। नैनापुर का भदेख से पूरी तरह संपर्क टूट चुका है( यही हालत टिकरी और लोहईं गाव की भी है। एक दूसरे गांव में आवागमन पूरी तरह से बंद हो चुका है। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। लोग रात रात भर जाग कर सुरक्षित स्थानों पर शरण पाने का प्रयास कर रहे हैं। बाढ़ से खरीफ की फसल नष्ट हो चुकी है. आशंका जताई जा रही है कि पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियां भी बढ़ेंगी। उपजिलाधिकारी व खंड विकास अधिकारी ओम प्रकाश द्विवेदी ने बाढ़ प्रभावित गांव में पंचायत सचिवों को कैंप करने के निर्देश दिए हैं। (संवाद)