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कहीं बिजली-पानी का इंतजाम नहीं तो कहीं इमारत ही जर्जर
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गररेही के मजरा रसूलपुर के स्वास्थ्य उपकेंद्र के सामने बंधे मवेशी
- फोटो : ORAI
कदौरा। लोगों को गांवों में ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बने प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्रों में बिजली और पानी का संकट हैं। कई उपकेंद्रों के भवन ही जर्जर हैं। यही कारण है कि स्टाफ की कमी से जूझ रहे इन केंद्रों पर जो कर्मचारी तैनात भी हैं, वे आते नहीं हैं। इस कारण छोटी-छोटी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए ग्रामीणों को झोलाछाप का सहारा लेना पड़ता है।
बता दें कि ब्लाक क्षेत्र में 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसमें 9 जर्जर है। जबकि 24 उपकेंद्र में मरम्मत होनी है। ग्राम पंचायत बागी, छौंक, इटौरा गुरु व आटा के उपकेंद्रों में बिजली पानी की व्यवस्था है। भेंड़, बड़ी गांवा, चतेला, पथरेहटा, उसर गांव, भदरेखी, सुनेहटा, रैला में बिजली कनेशन न होने के साथ ही पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। उदनपुर, हरचंद्रपुर, बवीना, हांसा, पाली, मरगांया, रसूलपुर, बरही, गुलौली, कासी रामपुर, करमचंद्रपुर, परासन, चमारी, लमसर व कुशमरा बावनी में पेयजल की व्यवस्था तो है। पर बिजली कनेक्शन नहीं है। अधिकतर स्वास्थ्य उपकेंद्रों में चाहरदीवारी ही नहीं है।
चिकित्सा अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य उपकेंद्रों में बिजली कनेक्शन, पेयजल व्यवस्था के साथ-साथ भवनों की मरम्मत के लिए शासन को पत्र लिखा है। जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त करवाई जाएंगी।
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सिर्फ अभियानों को पूरा करने आता स्टाफ
स्वास्थ्य उपकेंद्रों में तैनात स्वास्थ्य कर्मी भी उपकेंद्रों में तभी जाते हैं। जब टीकाकरण, पोलियो, वैक्सीनेशन आदि कार्य होते हैं। इसके बाद वे लोग चले जाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को शहर तक चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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बता दें कि ब्लाक क्षेत्र में 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसमें 9 जर्जर है। जबकि 24 उपकेंद्र में मरम्मत होनी है। ग्राम पंचायत बागी, छौंक, इटौरा गुरु व आटा के उपकेंद्रों में बिजली पानी की व्यवस्था है। भेंड़, बड़ी गांवा, चतेला, पथरेहटा, उसर गांव, भदरेखी, सुनेहटा, रैला में बिजली कनेशन न होने के साथ ही पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। उदनपुर, हरचंद्रपुर, बवीना, हांसा, पाली, मरगांया, रसूलपुर, बरही, गुलौली, कासी रामपुर, करमचंद्रपुर, परासन, चमारी, लमसर व कुशमरा बावनी में पेयजल की व्यवस्था तो है। पर बिजली कनेक्शन नहीं है। अधिकतर स्वास्थ्य उपकेंद्रों में चाहरदीवारी ही नहीं है।
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चिकित्सा अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य उपकेंद्रों में बिजली कनेक्शन, पेयजल व्यवस्था के साथ-साथ भवनों की मरम्मत के लिए शासन को पत्र लिखा है। जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त करवाई जाएंगी।
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सिर्फ अभियानों को पूरा करने आता स्टाफ
स्वास्थ्य उपकेंद्रों में तैनात स्वास्थ्य कर्मी भी उपकेंद्रों में तभी जाते हैं। जब टीकाकरण, पोलियो, वैक्सीनेशन आदि कार्य होते हैं। इसके बाद वे लोग चले जाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को शहर तक चक्कर लगाने पड़ते हैं।