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वसंत पंचमी पर मां शारदा से मांगा ज्ञान
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sat, 13 Feb 2016 11:17 PM IST
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वसंत पंचमी पर क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम
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प्रस्तुत हुए। शिक्षण संस्थान मदर्स प्राइड पब्लिक स्कूल में विद्यालय
परिवार व छात्र-छात्राओं नेंमां सरस्वती का पूजन अर्चन कर ज्ञान का वरदान
मांगा। स्कूल की बच्चियों ने मां शारदे की आराधना, ‘हे शारदे मां, हे शारदे
मां, अज्ञानता से हमें तार दे मां’ कर ज्ञान दान की कामना की।
कोंच के कार्यक्रम में प्रबंधक आदित्य पांडे, प्रधानाचार्य आनंद पांडे, आदि मौजूद रहे। उधर, कालपी प्रतिनिधि के अनुसार रविवार को सरस्वती शिशु मंदिर सदर बाजार कालपी में सरस्वती पूजन, वसंतोत्सव एवं मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि भाजपा नेत्री उर्विजा दीक्षित रहीं। समारोह की अध्यक्षता करते हुए भाजपा महिला मोर्चा की
जिलाध्यक्ष कुमकुम सिंह ने कहा कि नारी की शिक्षा के लिए सभी लोगों को अग्रणी भूमिका का निर्वाह करना चाहिए, क्योंकि एक बेटी के पढ़ने से दो परिवार शिक्षित एवं संस्कारवान बनते हैं। समारोह में कालपी महाविद्यालय की अर्थशास्त्र
विषय विभागाध्यक्ष डा. मधु प्रभा त्रिपाठी ने कहा कि संस्कारों के लिए विद्या मंदिरों की अलग पहचान हैं। संस्था के प्रधानाचार्य मंशाराम पाल ने विद्यालय की प्रगति की आख्या प्रस्तुत की। इस मौके पर गिरजा दत्त बुधौलिया, अर्जुन प्रसाद, चंद्रशेखर, रामबाबू आदि मौजूद रहे।
हिंदू पंचांग का पहला माह है वसंत
वसंत उत्तर भारत तथा समीपवर्ती देशों की छह ऋतुओं में से एक ऋतु है, जो फरवरी मार्च और अप्रैल के मध्य इस क्षेत्र में अपना सौंदर्य बिखेरती है। ऐसा माना गया है कि माघ महीने की शुक्ल पंचमी से वसंत ऋतु का आरंभ होता है। फागुन और चैत्र मास वसंत ऋतु के माने गए हैं। फागुन वर्ष का अंतिम मास है और चैत्र पहला। हिंदू पंचांग के वर्ष का अंत और प्रारंभ
वसंत में ही होता है। इस ऋतु के आने पर सर्दी कम हो जाती है। पेड़ों में नए पत्ते आने लगते हैं। आम बौरों से लद जाते हैं और खेत सरसों के फूलों से भरे दिखाई देते हैं। अत:उत्सव मनाने के लिए यह ऋतु सर्वश्रेष्ठ मानी गई है और इसे ऋतुराज भी कहा गया है।
वसंत के रागरंग
‘पौराणिक कथाओं में वसंत को कामदेव का पुत्र कहा गया है। कवि देव ने वसंत ऋतु का वर्णन करते हुए कहा है कि रूप व सौंदर्य के देवता कामदेव के घर पुत्रोत्पत्ति का समाचार पाते ही प्रकृति झूम उठती है। पेड़ों उसके लिए नव पल्लव का पालना डालते हैं, फूल वस्त्र पहनाते हैं, पवन झुलाती है और कोयल उसे गीत सुनाती है। भगवान कृष्ण ने भी गीता में कहा है
ऋतुओं में मैं वसंत हूं। गांव के 65 वर्षीय बुजुर्ग महपाल राजपूत बताते हैं कि इस ऋतु में वसंत पंचमी, शिवरात्रि तथा होली नामक पर्व मनाए जाते हैं। भारतीय संगीत साहित्य और कला में इसे महत्वपूर्ण स्थान है। संगीत में एक विशेष राग वसंत के नाम पर बनाया गया है जिसे राग वसंत भी कहते हैं।
वसंत पंचमी पर रंगारंग कार्यक्रम
सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल एट में मां सरस्वती केे जन्मदिवस वसंत पंचमी पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हवन, पूजन एवं रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विद्यालय केे प्रधानाचार्य रमेश सिंह राजावत ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन, दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सभी आचार्यों एवं प्रधनाचार्य ने हवन पूजन किया।
कोंच के कार्यक्रम में प्रबंधक आदित्य पांडे, प्रधानाचार्य आनंद पांडे, आदि मौजूद रहे। उधर, कालपी प्रतिनिधि के अनुसार रविवार को सरस्वती शिशु मंदिर सदर बाजार कालपी में सरस्वती पूजन, वसंतोत्सव एवं मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि भाजपा नेत्री उर्विजा दीक्षित रहीं। समारोह की अध्यक्षता करते हुए भाजपा महिला मोर्चा की
जिलाध्यक्ष कुमकुम सिंह ने कहा कि नारी की शिक्षा के लिए सभी लोगों को अग्रणी भूमिका का निर्वाह करना चाहिए, क्योंकि एक बेटी के पढ़ने से दो परिवार शिक्षित एवं संस्कारवान बनते हैं। समारोह में कालपी महाविद्यालय की अर्थशास्त्र
विषय विभागाध्यक्ष डा. मधु प्रभा त्रिपाठी ने कहा कि संस्कारों के लिए विद्या मंदिरों की अलग पहचान हैं। संस्था के प्रधानाचार्य मंशाराम पाल ने विद्यालय की प्रगति की आख्या प्रस्तुत की। इस मौके पर गिरजा दत्त बुधौलिया, अर्जुन प्रसाद, चंद्रशेखर, रामबाबू आदि मौजूद रहे।
हिंदू पंचांग का पहला माह है वसंत
वसंत उत्तर भारत तथा समीपवर्ती देशों की छह ऋतुओं में से एक ऋतु है, जो फरवरी मार्च और अप्रैल के मध्य इस क्षेत्र में अपना सौंदर्य बिखेरती है। ऐसा माना गया है कि माघ महीने की शुक्ल पंचमी से वसंत ऋतु का आरंभ होता है। फागुन और चैत्र मास वसंत ऋतु के माने गए हैं। फागुन वर्ष का अंतिम मास है और चैत्र पहला। हिंदू पंचांग के वर्ष का अंत और प्रारंभ
वसंत में ही होता है। इस ऋतु के आने पर सर्दी कम हो जाती है। पेड़ों में नए पत्ते आने लगते हैं। आम बौरों से लद जाते हैं और खेत सरसों के फूलों से भरे दिखाई देते हैं। अत:उत्सव मनाने के लिए यह ऋतु सर्वश्रेष्ठ मानी गई है और इसे ऋतुराज भी कहा गया है।
वसंत के रागरंग
‘पौराणिक कथाओं में वसंत को कामदेव का पुत्र कहा गया है। कवि देव ने वसंत ऋतु का वर्णन करते हुए कहा है कि रूप व सौंदर्य के देवता कामदेव के घर पुत्रोत्पत्ति का समाचार पाते ही प्रकृति झूम उठती है। पेड़ों उसके लिए नव पल्लव का पालना डालते हैं, फूल वस्त्र पहनाते हैं, पवन झुलाती है और कोयल उसे गीत सुनाती है। भगवान कृष्ण ने भी गीता में कहा है
ऋतुओं में मैं वसंत हूं। गांव के 65 वर्षीय बुजुर्ग महपाल राजपूत बताते हैं कि इस ऋतु में वसंत पंचमी, शिवरात्रि तथा होली नामक पर्व मनाए जाते हैं। भारतीय संगीत साहित्य और कला में इसे महत्वपूर्ण स्थान है। संगीत में एक विशेष राग वसंत के नाम पर बनाया गया है जिसे राग वसंत भी कहते हैं।
वसंत पंचमी पर रंगारंग कार्यक्रम
सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल एट में मां सरस्वती केे जन्मदिवस वसंत पंचमी पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हवन, पूजन एवं रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विद्यालय केे प्रधानाचार्य रमेश सिंह राजावत ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन, दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सभी आचार्यों एवं प्रधनाचार्य ने हवन पूजन किया।