{"_id":"5d82765f8ebc3e016025f50c","slug":"uproar-jam-against-liquor-shops-orai-news-knp5142582105","type":"story","status":"publish","title_hn":"शराब की दुकानों के विरोध में हंगामा, जाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शराब की दुकानों के विरोध में हंगामा, जाम
विज्ञापन
आटा। क्षेत्र के आटा इटौरा मार्ग पर मंदिर, स्कूल और अस्पताल के पास स्थित देसी, अंग्रेजी शराब और बीयर की दुकानों के विरोध में बुधवार को महिलाओं, स्थानीय लोगों, छात्र छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा। भीड़ ने दुकानों पर ताले डाले, छात्रा छात्राओं ने स्कूल गेट पर ही नारेबाजी की। गुस्साई महिलाओं ने लाठी डंडे लेकर दुकानों के शटर तोड़ने की कोशिश की। इसके बाद भीड़ ने आटा इटौरा मार्ग पर जाम लगाकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को समझाना शुरू किया। कालपी सीओ संजय कुमार ने विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को भरोसा दिलाया कि बाढ़ की समस्या से निपटते ही दुकानों को हटवा दिया जाएगा, तब तक एक भी दुकान नहीं खोली जाएगी। इसके बाद सुबह आठ बजे से शुरू हुआ हंगामा करीब साढ़े दस बजे के आसपास शांत हो सका।
बता दें कि आटा इटौरा रोड पर डॉ अंाबेडकर इंटर कालेज, भगवान का मंदिर और प्राथमिक अस्पताल है, वहीं नजदीक ही शराब की दुकान है। छात्राओं का कहना है कि छुट्टी के वक्त अक्सर इन दुकानों पर नशेबाजों का जमघट रहता है। जिससे परेशानी होती है। महिलाओं के मुताबिक अस्पताल और मंदिर जाते समय भी शराबी रास्ते में उत्पात मचाते हैं। एसडीएम और आबकारी अधिकारियों से शिकायत के बाद भी दुकानें नहीं हट सकी। इन दुकानों के कारण घरों में भी कलह मची रहती है। इधर भीड़ ने दुकानों के शटर भी तोड़ने की कोशिश की, जब कोई अधिकारी नहीं पहुंचा तो आटा-इटौरा मार्ग पर जाम लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी। जाम के कारण राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वाहन चालक रास्ता बदलकर अपने कामकाज को गए। कुछ देर बाद आटा इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे और भीड़ को समझाना शुरू किया। भीड़ ने जब पुलिस की भी अनसुनी कर दी तब इंस्पेक्टर ने अपने मोबाइल से लोगों की बात सीओ से कराई। इसके बाद ही जाम खत्म हो सका।
विरोध में पियक्कड़ भी उतरे
यह शायद पहला मौका था, जब शराब की दुकानों के विरोध में पीने वाले भी शामिल थे। उनका आरोप था कि इन दुकानों से न सिर्फ दाम से अधिक रुपये वसूल किए जाते हैं बल्कि शराब भी मिलावटी रहती है। लिहाजा इन्हें तो बंद होना ही चाहिए।
विज्ञापन
पुलिस पर भी मिलीभगत का आरोप
महिलाओं का आरोप है कि स्कूल और मंदिर के पास दुकानें पुलिस के शह पर चल रही हैं। इन तीन दुकानों से एक मोटी रकम पुलिस के पास भी जाती है। पुलिस की गाड़ियां गश्त करती हुई निकल जाती है लेकिन कभी दुकानों पर रुककर व्यवस्था नहीं देखती हैं।
18 दिन पूर्व दुकानों के पास हुई थी हत्या
इलाकाई लोगों का कहना है कि दुकानों के कारण अराजकता कि स्थिति यह है कि अभी 18 दिन पहले ही जब सीएम योगी का कार्यक्रम मगरौल में था, तभी इन दुकानों के करीब तीन सौ मीटर की दूरी पर किशोरी की नृशंस हत्या कर शव फेंका गया था।
विज्ञापन
बता दें कि आटा इटौरा रोड पर डॉ अंाबेडकर इंटर कालेज, भगवान का मंदिर और प्राथमिक अस्पताल है, वहीं नजदीक ही शराब की दुकान है। छात्राओं का कहना है कि छुट्टी के वक्त अक्सर इन दुकानों पर नशेबाजों का जमघट रहता है। जिससे परेशानी होती है। महिलाओं के मुताबिक अस्पताल और मंदिर जाते समय भी शराबी रास्ते में उत्पात मचाते हैं। एसडीएम और आबकारी अधिकारियों से शिकायत के बाद भी दुकानें नहीं हट सकी। इन दुकानों के कारण घरों में भी कलह मची रहती है। इधर भीड़ ने दुकानों के शटर भी तोड़ने की कोशिश की, जब कोई अधिकारी नहीं पहुंचा तो आटा-इटौरा मार्ग पर जाम लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी। जाम के कारण राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वाहन चालक रास्ता बदलकर अपने कामकाज को गए। कुछ देर बाद आटा इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे और भीड़ को समझाना शुरू किया। भीड़ ने जब पुलिस की भी अनसुनी कर दी तब इंस्पेक्टर ने अपने मोबाइल से लोगों की बात सीओ से कराई। इसके बाद ही जाम खत्म हो सका।
विज्ञापन
विरोध में पियक्कड़ भी उतरे
यह शायद पहला मौका था, जब शराब की दुकानों के विरोध में पीने वाले भी शामिल थे। उनका आरोप था कि इन दुकानों से न सिर्फ दाम से अधिक रुपये वसूल किए जाते हैं बल्कि शराब भी मिलावटी रहती है। लिहाजा इन्हें तो बंद होना ही चाहिए।
विज्ञापन
पुलिस पर भी मिलीभगत का आरोप
महिलाओं का आरोप है कि स्कूल और मंदिर के पास दुकानें पुलिस के शह पर चल रही हैं। इन तीन दुकानों से एक मोटी रकम पुलिस के पास भी जाती है। पुलिस की गाड़ियां गश्त करती हुई निकल जाती है लेकिन कभी दुकानों पर रुककर व्यवस्था नहीं देखती हैं।
18 दिन पूर्व दुकानों के पास हुई थी हत्या
इलाकाई लोगों का कहना है कि दुकानों के कारण अराजकता कि स्थिति यह है कि अभी 18 दिन पहले ही जब सीएम योगी का कार्यक्रम मगरौल में था, तभी इन दुकानों के करीब तीन सौ मीटर की दूरी पर किशोरी की नृशंस हत्या कर शव फेंका गया था।