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बुंदेली बोलकर बुंदेलों का दिल जीतने की कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Mon, 20 Feb 2017 10:29 PM IST
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मोदी को सुनने उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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काए भइया कैसो चल रहो है। सब कछू ठीक है के नईया। भीड़ से आवाज आई नई चलो रओ। यह सुनकर भीड़ मोदी-मोदी के नारे लगाने लगी। बुंदेलों को लुभाने और उनका अपना लगने का ये दांव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कोंच रोड स्थित मैकेनिक नगर में आयोजित चुनावी जनसभा के दौरान खेला। अपनी बोली देश के प्रधानमंत्री के मुंह से सुनी तो भारी भीड़
उत्साह से तालियां बजाने लगी। फिर क्या था उनके भाषण के बीच-बीच में मोदी-मोदी की आवाजें आती रहीं। सोमवार की दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर पीएम का हेलीकाप्टर उरई की जमीन पर उतरा तो भारी भीड़ ने कुर्सियाें पर खडे़ होकर उनका अभिवादन किया। इसके बाद जैसे ही मोदी ने बुंदेली भाषा में लोगाें को संबोधित किया तो लोग उत्साहित होकर
मोदी-मोदी बोलकर खुशी व्यक्त करते दिखे। अभी भाषा का जादू खत्म भी नहीं हुआ था कि अपने चिर परिचित अंदाज में कुछ पलों के लिए रुकते हुए मोदी बोले कि उन्हें बहुत कम मौका मिला है उरई आने का। अच्छी तरह से याद है कि सन 92 में जब एकता यात्रा निकाली थी, तब उरई आना हुआ था। तब और आज के उरई में कुछ ज्यादा फर्क भी नहीं महसूस नहीं हो रहा
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है। मोदी ने कहा कि उन्हें किसी गरीब के घर जाकर गरीबी महसूस करने की जरूरत नहीं है। गरीबी उनके जेहन में बसी है, क्योंकि उन्होंने गरीबी को जिया है। किसानों को भरपूर खाद मिलने को भी उन्होंने बखूबी भुनाया। कहा कि पहले की सरकाराें ने किसानाें को ठगा है। लोगों को खाद नहीं मिलती थी। जो खाद खेताें के लिए मिलनी चाहिए थी। वह लोगों के
कारखानाें में पहुंच रही थी। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए उन्हाेंने उसमें नीम के बीज के मिलवाया इससे खाद की कालाबाजारी रुकी और किसानाें को सस्ते में खाद मुहैया हो रही है। कुल मिलाकर मोदी बुंदेलखंड की बोली, वहां की समस्याओं को महसूस करने की बात कहकर लोगों का रुख भाजपा की ओर करने की कोशिश करते नजर आए।
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उत्साह से तालियां बजाने लगी। फिर क्या था उनके भाषण के बीच-बीच में मोदी-मोदी की आवाजें आती रहीं। सोमवार की दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर पीएम का हेलीकाप्टर उरई की जमीन पर उतरा तो भारी भीड़ ने कुर्सियाें पर खडे़ होकर उनका अभिवादन किया। इसके बाद जैसे ही मोदी ने बुंदेली भाषा में लोगाें को संबोधित किया तो लोग उत्साहित होकर
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मोदी-मोदी बोलकर खुशी व्यक्त करते दिखे। अभी भाषा का जादू खत्म भी नहीं हुआ था कि अपने चिर परिचित अंदाज में कुछ पलों के लिए रुकते हुए मोदी बोले कि उन्हें बहुत कम मौका मिला है उरई आने का। अच्छी तरह से याद है कि सन 92 में जब एकता यात्रा निकाली थी, तब उरई आना हुआ था। तब और आज के उरई में कुछ ज्यादा फर्क भी नहीं महसूस नहीं हो रहा
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है। मोदी ने कहा कि उन्हें किसी गरीब के घर जाकर गरीबी महसूस करने की जरूरत नहीं है। गरीबी उनके जेहन में बसी है, क्योंकि उन्होंने गरीबी को जिया है। किसानों को भरपूर खाद मिलने को भी उन्होंने बखूबी भुनाया। कहा कि पहले की सरकाराें ने किसानाें को ठगा है। लोगों को खाद नहीं मिलती थी। जो खाद खेताें के लिए मिलनी चाहिए थी। वह लोगों के
कारखानाें में पहुंच रही थी। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए उन्हाेंने उसमें नीम के बीज के मिलवाया इससे खाद की कालाबाजारी रुकी और किसानाें को सस्ते में खाद मुहैया हो रही है। कुल मिलाकर मोदी बुंदेलखंड की बोली, वहां की समस्याओं को महसूस करने की बात कहकर लोगों का रुख भाजपा की ओर करने की कोशिश करते नजर आए।