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तीसरी बार सत्यापन में भी नहीं निकला हल

Wed, 10 Feb 2016 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Wed, 10 Feb 2016 11:17 PM IST
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They could not even solve the third time in verification
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत ग्रामीणांचलों में निवास कर रहे बेसहारा व
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मोहताजों को सीधा लाभ पहुंचाने की योजना खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है। योजना की पात्रता लिस्ट में कई खामियां हैं और इनमें बड़ी संख्या में अपात्रों के नाम शामिल हैं। बार-बार सत्यापन के बावजूद अधिकारी अपात्रों के नाम बाहर नहीं कर पा रहे हैं।

बुधवार को पंचायत भवन में तीसरी बार सीडीपीओ एवं प्रधान प्रतिनिधि व कोटेदारों व ग्रामीणों की मौजूदगी में राशन कार्ड सूची की सत्यापन प्रक्रिया हो-हल्ले के बीच फिर हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि मजलूम और गरीब ग्रामीणों की अधिकारी सुन ही नहीं रहे हैं। इसके चलते तीसरी राशन कार्ड सूची की सत्यापन प्रक्रिया भी औपचारिकता में निपटाई गई है।

गौरतलब है कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत समाज के कमजोर, असहाय एवं गरीब जैसे हर वर्ग के लोगों को 2 रुपये किलो गेहूं और 3 रुपये किलो चावल देने का प्रावधान है। इसे लेकर बुधवार को ब्लॉक डकोर अंतर्गत ग्राम मुहम्मदाबाद में राशन संबंधी खुली बैठक हुई। राशन कार्डों की सूची का सत्यापन सबसे पहले 5 जनवरी को ग्राम पंचायत अधिकारी रमेश

उदैनिया व प्रधान प्रतिनिधि ने ग्रामीणों के सामने सत्यापन कराई थी। इसमें कोटेदारों से लेकर कर्मचारियों और ओहदेदारों के नाम उजागर हुए थे। इसके बाद ब्लॉक के बीडीओ व एआरओ कमलेश व सचिव रमेश उदैनिया ने दूसरी बार 4 फरवरी को पंचायत भवन में राशन कार्ड सूची का पुन: सत्यापन किया। फिर भी हो-हल्ला के बीच सूची को पढ़ कर सुनाया गया था लेकिन इसका कोई ठोस हल नहीं निकल सका।

अब तीसरी बार 10 फरवरी को गांव में डुग्गी पिटवाकर राशन कार्ड सूची के सत्यापन की सूचना ग्रामीणों की दी गयी। इसमें जिला कार्यक्रम विभाग से आए सीडीपीओ हृदय नरायन ने फिर पुरानी प्रक्रिया करते हुए ग्रामीणों के सामने नाम पढ़ कर सुनाया। इस दौरान ग्रामीण देवेंद्र राजपूत, शशि राजपूत, इस्लाम सिद्दीकी, सुंदरलाल, जावेद अख्तर, पंकज आदि ने

कहा कि सूची का बार-बार सत्यापन प्रक्रिया के बावजूद इसमें पात्र बनाए गए जमीनदारों व ओहदेदारों के नाम उजागर नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने पारदर्शी तरीके से पात्रता सूची की जांच कराने और अपात्रों को इससे बाहर निकालने की मांग की है।
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