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मूंग खरीद में हो रही लूट, संसद में उठाएंगे मामला : अहिरवार
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उरई। जालौन गरौठा भोगनीपुर संसदीय क्षेत्र में मूंग खरीद में हो रही लूट के मामले को संसद में उठाएंगे। शुक्रवार को संसदीय कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में सांसद नारायणदास अहिरवार ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए कृषि मंत्री को भी पत्र भेजेंगे।
उन्होंने कहा कि मूंग की खरीद में व्यापारी, कथित किसान व अधिकारी, केंद्र प्रभारी का एक काकस काम कर रहा है। इसमें एक नकली किसान जो व्यापारियों के लिए और केंद्र प्रभारी के लिए अपनी मूंग बेचने का नाटक करता है। उसे इस काकस से 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन दिया जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी किसान ने 50 क्विंटल मूंग मूंग बेची तो उस किसान को सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पांच हजार रुपये एडवांस दे दिए जाएंगे। केंद्र प्रभारी से जो चेक मिलेगा उसे उसके खाते में जमा करने के बाद पूरा पैसा व्यापारी उससे ले लेंगे।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा भ्रष्टाचार यह है कि केंद्र प्रभारी से व्यापारी पहले पर्चियां प्राप्त कर लेते हैं। फिर अपनी फड़ से ट्रक को मूंग के बोरों से लोड कर रात के समय वह सीधे वेयरहाउस ले जाते हैं। वहां धर्मकांटे में इसकी तौल कर वेयरहाउस में ही मूंग के बोरे जमा कर दिए जाते हैं। इसके बाद तौल की पर्ची और केंद्र प्रभारी से ली गई पर्ची का केंद्र प्रभारी मिलान करते हैं। इसके बाद केंद्र प्रभारी और उनके सहयोगी इन पर्चियों के आधार पर फर्जी किसानों के द्वारा गूंग बेचना दिखा देते हैं।
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सांसद ने कहा कि सरकार ने मूंग की एमएसपी 8700 रुपये प्रति क्विंटल रखी है लेकिन यह षड्यंत्र के तहत कभी बट्टा वाला माल बताकर, तो कभी हार्वेस्टर का माल बताकर किसानों की मूंग 5700 रुपये लेकर छह हजार रुपये के बीच में खरीदी लेते हैं। इस तरह करीब 1780 रुपये का इस खरीद में घपला किया जाता है। यदि इसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो जाए तो केवल हमारे संसदीय क्षेत्र में ही करोड़ों का घोटाला निकलेगा। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की शिकायत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह से मिलकर करेंगे और इस लूट की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग करेंगे। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो वह किसानों की आवाज को संसद में उठाएंगे।
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उन्होंने कहा कि मूंग की खरीद में व्यापारी, कथित किसान व अधिकारी, केंद्र प्रभारी का एक काकस काम कर रहा है। इसमें एक नकली किसान जो व्यापारियों के लिए और केंद्र प्रभारी के लिए अपनी मूंग बेचने का नाटक करता है। उसे इस काकस से 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन दिया जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी किसान ने 50 क्विंटल मूंग मूंग बेची तो उस किसान को सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पांच हजार रुपये एडवांस दे दिए जाएंगे। केंद्र प्रभारी से जो चेक मिलेगा उसे उसके खाते में जमा करने के बाद पूरा पैसा व्यापारी उससे ले लेंगे।
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उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा भ्रष्टाचार यह है कि केंद्र प्रभारी से व्यापारी पहले पर्चियां प्राप्त कर लेते हैं। फिर अपनी फड़ से ट्रक को मूंग के बोरों से लोड कर रात के समय वह सीधे वेयरहाउस ले जाते हैं। वहां धर्मकांटे में इसकी तौल कर वेयरहाउस में ही मूंग के बोरे जमा कर दिए जाते हैं। इसके बाद तौल की पर्ची और केंद्र प्रभारी से ली गई पर्ची का केंद्र प्रभारी मिलान करते हैं। इसके बाद केंद्र प्रभारी और उनके सहयोगी इन पर्चियों के आधार पर फर्जी किसानों के द्वारा गूंग बेचना दिखा देते हैं।
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सांसद ने कहा कि सरकार ने मूंग की एमएसपी 8700 रुपये प्रति क्विंटल रखी है लेकिन यह षड्यंत्र के तहत कभी बट्टा वाला माल बताकर, तो कभी हार्वेस्टर का माल बताकर किसानों की मूंग 5700 रुपये लेकर छह हजार रुपये के बीच में खरीदी लेते हैं। इस तरह करीब 1780 रुपये का इस खरीद में घपला किया जाता है। यदि इसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो जाए तो केवल हमारे संसदीय क्षेत्र में ही करोड़ों का घोटाला निकलेगा। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की शिकायत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह से मिलकर करेंगे और इस लूट की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग करेंगे। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो वह किसानों की आवाज को संसद में उठाएंगे।