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जांच करने पहुंची टीम से प्रधान पुत्र भिड़ा, हंगामा
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जांच के दौरान हंगामा करते ग्रामीण
- फोटो : ORAI
उरई (जालौन)। माधौगढ़ तहसील के ग्राम गड़ेरना में जांच करने पहुंचे अधिकारियों से न सिर्फ प्रधान पक्ष के लोगों अभद्रता की बल्कि जांच भी नहीं करने दी। हंगामा देख अधिकारी जांच न कर लौट गए। अधिकारियों का कहना है कि मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी, जो निर्देश मिलेंगे उसके तहत प्रधान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि एक माह पूर्व ग्राम गड़ेरना के दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर डीएम डा. मन्नान अख्तर को दिए शिकायती पत्र में बताया कि था कि गांव की प्रधान सुशीला देवी है, लेकिन प्रधानी का सारा कामकाज उनका बेटा अंजनी कुमार देखता है। जबकि वह खुद सरकारी मास्टर है। ग्रामीणों का आरोप था कि प्रधान व प्रधान पुत्र ग्रामीणों से गांव में मिलने योजनाओं के लाभ के लिए पैसों की मांग करते हैं।
गांव में शौचालय से लेकर आवास योजना तक के निर्धारित पैसे तय हैं। स्थिति यह है कि गांव में प्रधान ने पैसे लेकर कई अपात्रों को आवास योजना का लाभ दिया है। वहीं मनरेगा में भी फर्जीवाड़ा कर लाखों के वारे न्यारे कर रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने जांच के निर्देश दिए और डीडी कृषि के नेतृत्व में तीन अधिकारियों की टीम का गठन किया।
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शनिवार को डिप्टी डायरेक्टर आरके तिवारी, लोक निर्माण विभाग के जेई वीरेंद्र कुमार व अन्य अधिकारी गांव पहुंचे यहां पर अधिकारियों ने चौपाल लगाकर शिकायतकर्ताओं को मौके पर बुलाया। आरोप है कि जैसे ही शिकायतकर्ता मौके पर आए और अपनी शिकायतों के प्रमाण देने लगे। वैसे ही मौके पर प्रधान पुत्र अंजनी कुमार अपने साथियों के साथ पहुंच गया और हंगामा करने लगा। इस दौरान प्रधान पुत्र की अधिकारियों से तीखी झड़प भी हुई। मामले को बढ़ता देख अधिकारियों ने जांच को बीच में ही रोक दिया और लौट आए। डिप्टी डायरेक्टर आरके तिवारी की कहना है कि मामले में प्रधान पुत्र व समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिससे जांच बीच में ही रोकनी पड़ी। मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी जाएगी।
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बता दें कि एक माह पूर्व ग्राम गड़ेरना के दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर डीएम डा. मन्नान अख्तर को दिए शिकायती पत्र में बताया कि था कि गांव की प्रधान सुशीला देवी है, लेकिन प्रधानी का सारा कामकाज उनका बेटा अंजनी कुमार देखता है। जबकि वह खुद सरकारी मास्टर है। ग्रामीणों का आरोप था कि प्रधान व प्रधान पुत्र ग्रामीणों से गांव में मिलने योजनाओं के लाभ के लिए पैसों की मांग करते हैं।
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गांव में शौचालय से लेकर आवास योजना तक के निर्धारित पैसे तय हैं। स्थिति यह है कि गांव में प्रधान ने पैसे लेकर कई अपात्रों को आवास योजना का लाभ दिया है। वहीं मनरेगा में भी फर्जीवाड़ा कर लाखों के वारे न्यारे कर रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने जांच के निर्देश दिए और डीडी कृषि के नेतृत्व में तीन अधिकारियों की टीम का गठन किया।
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शनिवार को डिप्टी डायरेक्टर आरके तिवारी, लोक निर्माण विभाग के जेई वीरेंद्र कुमार व अन्य अधिकारी गांव पहुंचे यहां पर अधिकारियों ने चौपाल लगाकर शिकायतकर्ताओं को मौके पर बुलाया। आरोप है कि जैसे ही शिकायतकर्ता मौके पर आए और अपनी शिकायतों के प्रमाण देने लगे। वैसे ही मौके पर प्रधान पुत्र अंजनी कुमार अपने साथियों के साथ पहुंच गया और हंगामा करने लगा। इस दौरान प्रधान पुत्र की अधिकारियों से तीखी झड़प भी हुई। मामले को बढ़ता देख अधिकारियों ने जांच को बीच में ही रोक दिया और लौट आए। डिप्टी डायरेक्टर आरके तिवारी की कहना है कि मामले में प्रधान पुत्र व समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिससे जांच बीच में ही रोकनी पड़ी। मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी जाएगी।