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Jalaun News: शेरगढ़ पुल बंद होने से औरैया का सफर होगा मंहगा
Sun, 25 May 2025 01:20 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Sun, 25 May 2025 01:20 AM IST
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कुठौंद (जालौन)। जालौन और औरैया को जोड़ने वाले यमुना नदी पर बना शेरगढ़ पुल अब आम जनता की जेब पर भारी पड़ने वाला है। पुल पर मरम्मत कार्य के लिए आगामी दिनों में पूरी तरह से यातायात बंद किया जाएगा।
अब तक कुठौंद से औरैया पहुंचने में बाइक सवारों को महज 40–50 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन पुल बंद होने के बाद उन्हें बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के जरिए जाना होगा, जिससे दूरी 30 से बढ़कर 190 किलोमीटर हो जाएगी। इस अतिरिक्त सफर में ईंधन, टोल और बाइक की मरम्मत समेत कुल खर्च 500 रुपये तक पहुंच जाएगा। कार सवार पहले 700 से 850 रुपये में औरैया पहुंचते थे, लेकिन अब उन्हें 3000 से 3500 रुपये तक की जेब ढीली करनी पड़ेगी।
पुल पर पहले से ही भारी वाहनों (30 टन से अधिक) पर प्रतिबंध था, लेकिन अब इसकी मरम्मत के लिए आगामी एक सप्ताह में सभी प्रकार के वाहन बाइक, ऑटो, कार और पैदल चालकों के लिए भी बंद कर दिया जाएगा। इससे करीब 100 गांवों की लगभग 2 लाख की आबादी पर सीधा असर पड़ेगा। अभी तक कुठौंद से औरैया की दूरी 30 किलोमीटर थी, जिसे लोग बाइक 60 से 70 रुपये या कार 300 से 350 रुपये में तय कर लेते थे।
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पुल बंद होने के बाद यही दूरी बढ़कर 190 किलोमीटर हो जाएगी और इसी के साथ सफर का खर्च भी कई गुना बढ़ जाएगा। हर दिन सैकड़ों लोग मरीजों को लेकर या अन्य कामों से कार द्वारा शेरगढ़ पुल से औरैया या कानपुर जाते हैं। अभी यह यात्रा करीब 700-800 रुपये में पूरी हो जाती थी, लेकिन अब यही सफर तीन हजार रुपये तक का हो सकता है। इससे ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों की परेशानियां और बढ़ जाएंगी।
शेरगढ़ पुल की मरम्मत के लिए 2 मई को बरेली की एएम बिल्डर कंपनी को टेंडर मिला है। कंपनी द्वारा पुल के 7वें और 8वें स्पैन की 8 बेयरिंग बदली जाएंगी, दोनों तरफ की पुरानी बिंगवाल तोड़कर नई बनाई जाएगी, साथ ही 200 मीटर की पिचिंग का काम होगा। मरम्मत पर कुल खर्च 4 करोड़ 50 लाख 67 हजार रुपये अनुमानित है।
किराया बढ़ेगा, आमदनी घटी, मजदूर सबसे अधिक प्रभावित
सबसे ज्यादा मार दिहाड़ी मजदूरी करने वालों पर पड़ने वाली है। कुठौंद, सिरसाकलार, ऐमलासा, कंजौसा, नयन, गोरन, गोरखपुर, नंदकिशोरपुरा आदि गांवों से सैकड़ों मजदूर औरैया की मौरंग मंडी, निर्माण कार्यों, रंगाई-पुताई और कारखानों में काम के लिए जाते हैं। अब रोज का आने-जाने का खर्च ही 250 से 300 रुपये हो जाएगा, जबकि मजदूरी मिलती है 400 से 500 रुपये। इसका मतलब है कि पूरा मेहनताना सिर्फ किराए में ही खत्म हो जाएगा। इससे अच्छा मजदूर जाना ही पसंद नहीं करेंगे। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक पुल का काम पूरा न हो, वाहनों के सुगम आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्गों पर सुरक्षा और ट्रांसपोर्ट की ठोस व्यवस्था की जाए। खासकर गर्मी, बारिश और रात के समय लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
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अब तक कुठौंद से औरैया पहुंचने में बाइक सवारों को महज 40–50 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन पुल बंद होने के बाद उन्हें बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के जरिए जाना होगा, जिससे दूरी 30 से बढ़कर 190 किलोमीटर हो जाएगी। इस अतिरिक्त सफर में ईंधन, टोल और बाइक की मरम्मत समेत कुल खर्च 500 रुपये तक पहुंच जाएगा। कार सवार पहले 700 से 850 रुपये में औरैया पहुंचते थे, लेकिन अब उन्हें 3000 से 3500 रुपये तक की जेब ढीली करनी पड़ेगी।
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पुल पर पहले से ही भारी वाहनों (30 टन से अधिक) पर प्रतिबंध था, लेकिन अब इसकी मरम्मत के लिए आगामी एक सप्ताह में सभी प्रकार के वाहन बाइक, ऑटो, कार और पैदल चालकों के लिए भी बंद कर दिया जाएगा। इससे करीब 100 गांवों की लगभग 2 लाख की आबादी पर सीधा असर पड़ेगा। अभी तक कुठौंद से औरैया की दूरी 30 किलोमीटर थी, जिसे लोग बाइक 60 से 70 रुपये या कार 300 से 350 रुपये में तय कर लेते थे।
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पुल बंद होने के बाद यही दूरी बढ़कर 190 किलोमीटर हो जाएगी और इसी के साथ सफर का खर्च भी कई गुना बढ़ जाएगा। हर दिन सैकड़ों लोग मरीजों को लेकर या अन्य कामों से कार द्वारा शेरगढ़ पुल से औरैया या कानपुर जाते हैं। अभी यह यात्रा करीब 700-800 रुपये में पूरी हो जाती थी, लेकिन अब यही सफर तीन हजार रुपये तक का हो सकता है। इससे ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों की परेशानियां और बढ़ जाएंगी।
शेरगढ़ पुल की मरम्मत के लिए 2 मई को बरेली की एएम बिल्डर कंपनी को टेंडर मिला है। कंपनी द्वारा पुल के 7वें और 8वें स्पैन की 8 बेयरिंग बदली जाएंगी, दोनों तरफ की पुरानी बिंगवाल तोड़कर नई बनाई जाएगी, साथ ही 200 मीटर की पिचिंग का काम होगा। मरम्मत पर कुल खर्च 4 करोड़ 50 लाख 67 हजार रुपये अनुमानित है।
किराया बढ़ेगा, आमदनी घटी, मजदूर सबसे अधिक प्रभावित
सबसे ज्यादा मार दिहाड़ी मजदूरी करने वालों पर पड़ने वाली है। कुठौंद, सिरसाकलार, ऐमलासा, कंजौसा, नयन, गोरन, गोरखपुर, नंदकिशोरपुरा आदि गांवों से सैकड़ों मजदूर औरैया की मौरंग मंडी, निर्माण कार्यों, रंगाई-पुताई और कारखानों में काम के लिए जाते हैं। अब रोज का आने-जाने का खर्च ही 250 से 300 रुपये हो जाएगा, जबकि मजदूरी मिलती है 400 से 500 रुपये। इसका मतलब है कि पूरा मेहनताना सिर्फ किराए में ही खत्म हो जाएगा। इससे अच्छा मजदूर जाना ही पसंद नहीं करेंगे। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक पुल का काम पूरा न हो, वाहनों के सुगम आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्गों पर सुरक्षा और ट्रांसपोर्ट की ठोस व्यवस्था की जाए। खासकर गर्मी, बारिश और रात के समय लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।