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बी फार्मा छात्र का शव घर पहुंचते ही मचा कोहराम
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मृतक आकाश के पिता प्रेम नारायण अहिरवार रोते पुलिस वर्दी में
- फोटो : ORAI
उरई। झांसी से उरई लौटते वक्त शुक्रवार की रात शहर निवासीं बीफार्मा के छात्र की सड़क हादसे में मौत हो गई। झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में तेज रप्तार ट्रक ने छात्र की बाइक को टक्कर मारी थी। शनिवार की शाम जैसे ही छात्र का शव उसके घर पहुंचा तो वहां कोहराम सा मच गया। आकाश की मां, भाई और पिता का रो रोकर बुरा हाल था। इलाकाई लोगों का कहना है था छात्र काफी होनहार था।
शहर कोतवाली क्षेत्र के रामनगर निवासी एवं फतेहपुर पुलिस में एसआई तैनात प्रेम नारायण अहिरवार का 23 वर्षीय बेटा आकाश झांसी के कालेज में बी फार्मा की पढ़ाई कर रहा था। बीती शुक्रवार की शाम वह झांसी से बाइक लेकर अपने घर उरई आ रहा था। तभी झांसी जनपद के पूंछ थाना क्षेत्र स्थित झांसी कानपुर हाइवे पर पीछे से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी थी। इसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। हादसे की खबर मिलते ही शनिवार की सुबह परिजन झांसी रवाना हो गए। दोपहर तक आकाश के घर के बाहर इलाकाई लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गया था।
पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को जैसे ही आकाश का शव उसके घर रामनगर पहुंचा मोहल्ले के लोगों, रिश्तेदारों व परिजनों में कोहराम मच गया। आकाश तीन भाईयों में सबसे छोटा था। इससे घर में सबका लाड़ला था। उसकी मौत से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। भीड़ के बीच वर्दी में बैठे पिता तो बार-बार बदहवास हो रहे थे, भीतर मां को मोहल्ले की महिलाएं बड़ी मुश्किल से संभाल रही थी।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के रामनगर निवासी एवं फतेहपुर पुलिस में एसआई तैनात प्रेम नारायण अहिरवार का 23 वर्षीय बेटा आकाश झांसी के कालेज में बी फार्मा की पढ़ाई कर रहा था। बीती शुक्रवार की शाम वह झांसी से बाइक लेकर अपने घर उरई आ रहा था। तभी झांसी जनपद के पूंछ थाना क्षेत्र स्थित झांसी कानपुर हाइवे पर पीछे से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी थी। इसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। हादसे की खबर मिलते ही शनिवार की सुबह परिजन झांसी रवाना हो गए। दोपहर तक आकाश के घर के बाहर इलाकाई लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गया था।
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पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को जैसे ही आकाश का शव उसके घर रामनगर पहुंचा मोहल्ले के लोगों, रिश्तेदारों व परिजनों में कोहराम मच गया। आकाश तीन भाईयों में सबसे छोटा था। इससे घर में सबका लाड़ला था। उसकी मौत से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। भीड़ के बीच वर्दी में बैठे पिता तो बार-बार बदहवास हो रहे थे, भीतर मां को मोहल्ले की महिलाएं बड़ी मुश्किल से संभाल रही थी।
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