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Jalaun News: छह वर्षीय तंजीम ने रखा पहला रोजा, इबादत के बाद किया इफ्तार
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फोटो - 35 अपने परिजनों के साथ बैठी तंजीम फारूकी। संवाद
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कदौरा। माहे रमजान की रौनक के बीच बृहस्पतिवार को कस्बे में एक नन्ही रोजेदार चर्चा का केंद्र बनी। छह वर्षीय तंजीम फारूकी उर्फ सोना ने पहली बार रोजा रखा। परिवार और मोहल्ले के लोगों ने उसकी हौसला अफजाई करते हुए फूलमाला पहनाकर रोजा कुशाई की और गिफ्ट देकर आशीर्वाद दिया।
रमजान के मुबारक महीने में जहां बुजुर्गों के साथ युवा और बच्चे भी इबादत में जुटे हैं, वहीं तंजीम के पहले रोजे को लेकर घर में खासा उत्साह रहा। मस्जिदों में नमाजियों की खासी तादाद देखने को मिली। शाम होते ही रोजेदारों ने परिवार के साथ इफ्तार की तैयारी शुरू कर दी। दोपहर बाद से ही घर की महिलाओं ने इफ्तार के लिए पकवान बनाने शुरू कर दिए थे।
मगरिब की अजान से पहले ही दस्तरखान सजा दिया गया। अजान होते ही रोजेदारों ने अल्लाह तआला से दुआ मांगी और खजूर, पानी व शरबत से रोजा खोला। इसके बाद विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया और अल्लाह का शुक्र अदा किया।
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तंजीम के रोजा रखने पर दादा अजीम उल्ला, दादी शहनाज, पिता सुफियान फारूकी और मां आयशा ने उसे रोजा खुलवाकर आशीर्वाद दिया। परिवार के बड़ों ने नन्ही बच्ची को गले लगाकर उसके जज्बे की सराहना की।
इस अवसर पर रिश्तेदारों को भी इफ्तार भेजा गया और जरूरतमंदों के बीच भोजन वितरित किया गया। आसपास की मस्जिदों में भी इफ्तार पहुंचाया गया। कस्बे में रमजान को लेकर धार्मिक उल्लास और आपसी भाईचारे का माहौल बना हुआ
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रमजान के मुबारक महीने में जहां बुजुर्गों के साथ युवा और बच्चे भी इबादत में जुटे हैं, वहीं तंजीम के पहले रोजे को लेकर घर में खासा उत्साह रहा। मस्जिदों में नमाजियों की खासी तादाद देखने को मिली। शाम होते ही रोजेदारों ने परिवार के साथ इफ्तार की तैयारी शुरू कर दी। दोपहर बाद से ही घर की महिलाओं ने इफ्तार के लिए पकवान बनाने शुरू कर दिए थे।
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मगरिब की अजान से पहले ही दस्तरखान सजा दिया गया। अजान होते ही रोजेदारों ने अल्लाह तआला से दुआ मांगी और खजूर, पानी व शरबत से रोजा खोला। इसके बाद विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया और अल्लाह का शुक्र अदा किया।
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तंजीम के रोजा रखने पर दादा अजीम उल्ला, दादी शहनाज, पिता सुफियान फारूकी और मां आयशा ने उसे रोजा खुलवाकर आशीर्वाद दिया। परिवार के बड़ों ने नन्ही बच्ची को गले लगाकर उसके जज्बे की सराहना की।
इस अवसर पर रिश्तेदारों को भी इफ्तार भेजा गया और जरूरतमंदों के बीच भोजन वितरित किया गया। आसपास की मस्जिदों में भी इफ्तार पहुंचाया गया। कस्बे में रमजान को लेकर धार्मिक उल्लास और आपसी भाईचारे का माहौल बना हुआ