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12 से 22 घंटे देरी से आईं श्रमिक स्पेशल ट्रेनें
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उरई स्टेशन पर यात्री टिकट दिखाता
- फोटो : ORAI
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उरई। शुक्रवार को दो श्रमिक स्पेशल ट्रेनें प्रवासी कामगारों को लेकर आई। दोनों ट्रेनें 12 से 22 घंटे की देरी से उरई स्टेशन पहुंची। सभी प्रवासी कामगारों को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद गंतव्य की ओर रवाना किया गया।
पुणे से मिर्जापुर जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन गुरुवार की रात आनी थी पर ट्रेन 12 घंटे देरी से शुक्रवार की सुबह 10.30 बजे उरई स्टेशन पहुंचे। इस ट्रेन से 23 प्रवासी कामगार उतरे। इसके बाद ऊरुली (महाराष्ट्र) से देवरिया सदर जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन करीब 22 घंटे देरी से आई। यह ट्रेन गुुरुवार शाम को आनी थी लेकिन यह ट्रेन शुक्रवार की शाम साढ़े चार बजे उरई स्टेशन पहुंची।
इसमें छह बच्चों समेत 57 प्रवासी कामगार उतारे गए। सीसीआई अनूप सक्सेना ने बताया कि सभी प्रवासी कामगार जालौन, हमीरपुर, महोबा, औरैया, बांदा, चित्रकूट जनपदों के थे। जिन्हें रोडवेज बसों से रवाना कर दिया गया। इस दौरान एसडीएम सतेंद्र सिंह, एआरएम रोडवेज केएन चौधरी, आरपीएफ इंस्पेक्टर राजीव उपाध्याय, जीआरपी इंस्पेक्टर ब्रजमोहन सैनी, स्टेशन अधीक्षक एपी वर्मा, सतेंद्र बंसल, डा. आरके शाक्या आदि रहे।
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माहौल सामान्य होने पर फिर से लौट जाएंगे
महोबा के निखिल, कोंच के मनोज कुमार का कहना है कि महाराष्ट्र में पानीपूरी का धंधा करते थे। लाकडाउन में सब चौपट हो गया। वे वहां दस साल से धंधा कर रहे थे। करीब बीस लोग सहयोगी के रुप में काम करते थे। माहौल सामान्य होने के बाद फिर से लौट जाएंगे। छोटे स्टेशनों पर ट्रेनें रोके जाने पर यात्री नाराज देखे गए।
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पुणे से मिर्जापुर जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन गुरुवार की रात आनी थी पर ट्रेन 12 घंटे देरी से शुक्रवार की सुबह 10.30 बजे उरई स्टेशन पहुंचे। इस ट्रेन से 23 प्रवासी कामगार उतरे। इसके बाद ऊरुली (महाराष्ट्र) से देवरिया सदर जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन करीब 22 घंटे देरी से आई। यह ट्रेन गुुरुवार शाम को आनी थी लेकिन यह ट्रेन शुक्रवार की शाम साढ़े चार बजे उरई स्टेशन पहुंची।
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इसमें छह बच्चों समेत 57 प्रवासी कामगार उतारे गए। सीसीआई अनूप सक्सेना ने बताया कि सभी प्रवासी कामगार जालौन, हमीरपुर, महोबा, औरैया, बांदा, चित्रकूट जनपदों के थे। जिन्हें रोडवेज बसों से रवाना कर दिया गया। इस दौरान एसडीएम सतेंद्र सिंह, एआरएम रोडवेज केएन चौधरी, आरपीएफ इंस्पेक्टर राजीव उपाध्याय, जीआरपी इंस्पेक्टर ब्रजमोहन सैनी, स्टेशन अधीक्षक एपी वर्मा, सतेंद्र बंसल, डा. आरके शाक्या आदि रहे।
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माहौल सामान्य होने पर फिर से लौट जाएंगे
महोबा के निखिल, कोंच के मनोज कुमार का कहना है कि महाराष्ट्र में पानीपूरी का धंधा करते थे। लाकडाउन में सब चौपट हो गया। वे वहां दस साल से धंधा कर रहे थे। करीब बीस लोग सहयोगी के रुप में काम करते थे। माहौल सामान्य होने के बाद फिर से लौट जाएंगे। छोटे स्टेशनों पर ट्रेनें रोके जाने पर यात्री नाराज देखे गए।