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अपराजिता : कूड़ा बीनने वाले बच्चों को शिक्षा की राह पर दौड़ा रहीं अवंतिका
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बेरी वाले बाबा की मजार पर बच्चों को रंगोली बनाना सिखाती अवंतिका।
- फोटो : ORAI
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उरई। एक ओर सरकार सर्व शिक्षा अभियान चलाकर बच्चों को स्कूल के प्रति आकर्षित करने का प्रयास कर रही है। वहीं उरई शहर की निवासी अवंतिका तिवारी परिस्थितियां ठीक न होने के बावजूद पढ़ने की उम्र में कूड़ा बीनने, लोहा पीटने वाले 100 बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रही है। दो साल पहले अकेले शुरू की गई इस मुहिम में आज 25 लोग निस्वार्थ सहयोग कर रहे हैं।
इंदिरानगर निवासी अवंतिका तिवारी के पिता रवि करन तिवारी निजी वाहन चालक हैं। मां गृहणी हैं, लेकिन घर की आर्थिक स्थितियां कमजोर होने की वजह से घर पर ही सिलाई का काम कर परिवार को पोषण करती हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी अवंतिका ने 2015 में जीवविज्ञान विषय से बीएससी पास किया है। पर घर की परिस्थितियों के चलते बाहर पढ़ने नहीं जा सकीं। हमेशा से दूसरों को न्याय दिलाने, महिलाओं-बच्चों की आवाज बनने की सोच रखने वाली अवंतिका ने शहर के एक कॉलेज से एलएलबी करने का निर्णय लिया और पढ़ाई शुरू कर दी। इस बीच कॉलेज जाते समय असहाय बच्चों को कुछ मांगते या उन्हें कम उम्र में ही कुछ बेचते देख उनका दिल पसीजने लगा। इस बात की चर्चा मां स्नेहलता तिवारी से की। कहा कि वह इन बच्चों के लिए कुछ करना चाहती हैं। मां ने तो हामी भर दी पर पिता और भाई से कुछ कहने की अवंतिका की हिम्मत नहीं हुई। खैर, मां से मिले भरोसे के आत्मविश्वास के साथ अवंतिका ने बेरी वाले बाबा मजार पर जाकर वहां घूमने वाले बच्चों से बात की। उनसे पढ़ने के लिए पूछा तो तीन-चार तैयार हो गए। उन्होंने सात फरवरी 2020 को जमीन पर चादर डालकर कूड़ा बीनने वाले बच्चों को पढ़ाने की मुहिम की शुरुआत की। देखते ही देखते उनकी इस मुहिम में और युवा भी जुड़ने लगे। आज वह करीब 100 बच्चों को अपनी 25 साथियों की टीम के साथ शहर के मोदी ग्राउंड, रामकुंड और बेरीबाबा मजार पर पढ़ा रही हैं। उन्होंने एक संस्था का भी रजिस्ट्रेशन कराया है। जिसका नाम उन्होंने हमारी उम्मीद मिशन (हम) दिया है। अवंतिका की साथी मोनिका शर्मा बताती हैं कि स्कूल जाते हुए वह रोज बेरी वाले बाबा मजार पर बच्चों को पढ़ाते देखती थीं। एक बार जानकारी की तो अवंतिका से मुलाकात हुई। उसके बाद भी 2020 सितंबर में वह भी इस मुहिम से जुड़ गईं।
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आत्मसुरक्षा की कक्षा भी शुरू की
अवंतिका ने छह माह पहले इस सामाजिक कार्य के साथ बच्चियों को सशक्त करने के लिए आत्मसुरक्षा की कक्षा भी शुरू की है। शहर के आर्य कन्या इंटर कॉलेज में प्रति रविवार को बच्चियों को आत्म रक्षा के तरीके बताए जाते हैं। साथ ही बच्चियों को सिलाई बगैरह भी सिखाई जाती है। इसमें अवंतिका की मां उनका सहयोग करती हैं।
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कई लोग आए साथ...बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने की जिम्मेदारी ली
अवंतिका बताती हैं इन दो सालों में उनके इस काम की लोगों ने सराहना की। कई अच्छे बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने की जिम्मेदारी सामाजिक लोगों ने उठाई। बताया कि यदि कोई सामाजिक कार्यकर्ता किसी बच्चे की फीस जमा नहीं कर पाता था तो मैं अपने साथियों के साथ फीस जमा कर देती हूं।
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इंदिरानगर निवासी अवंतिका तिवारी के पिता रवि करन तिवारी निजी वाहन चालक हैं। मां गृहणी हैं, लेकिन घर की आर्थिक स्थितियां कमजोर होने की वजह से घर पर ही सिलाई का काम कर परिवार को पोषण करती हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी अवंतिका ने 2015 में जीवविज्ञान विषय से बीएससी पास किया है। पर घर की परिस्थितियों के चलते बाहर पढ़ने नहीं जा सकीं। हमेशा से दूसरों को न्याय दिलाने, महिलाओं-बच्चों की आवाज बनने की सोच रखने वाली अवंतिका ने शहर के एक कॉलेज से एलएलबी करने का निर्णय लिया और पढ़ाई शुरू कर दी। इस बीच कॉलेज जाते समय असहाय बच्चों को कुछ मांगते या उन्हें कम उम्र में ही कुछ बेचते देख उनका दिल पसीजने लगा। इस बात की चर्चा मां स्नेहलता तिवारी से की। कहा कि वह इन बच्चों के लिए कुछ करना चाहती हैं। मां ने तो हामी भर दी पर पिता और भाई से कुछ कहने की अवंतिका की हिम्मत नहीं हुई। खैर, मां से मिले भरोसे के आत्मविश्वास के साथ अवंतिका ने बेरी वाले बाबा मजार पर जाकर वहां घूमने वाले बच्चों से बात की। उनसे पढ़ने के लिए पूछा तो तीन-चार तैयार हो गए। उन्होंने सात फरवरी 2020 को जमीन पर चादर डालकर कूड़ा बीनने वाले बच्चों को पढ़ाने की मुहिम की शुरुआत की। देखते ही देखते उनकी इस मुहिम में और युवा भी जुड़ने लगे। आज वह करीब 100 बच्चों को अपनी 25 साथियों की टीम के साथ शहर के मोदी ग्राउंड, रामकुंड और बेरीबाबा मजार पर पढ़ा रही हैं। उन्होंने एक संस्था का भी रजिस्ट्रेशन कराया है। जिसका नाम उन्होंने हमारी उम्मीद मिशन (हम) दिया है। अवंतिका की साथी मोनिका शर्मा बताती हैं कि स्कूल जाते हुए वह रोज बेरी वाले बाबा मजार पर बच्चों को पढ़ाते देखती थीं। एक बार जानकारी की तो अवंतिका से मुलाकात हुई। उसके बाद भी 2020 सितंबर में वह भी इस मुहिम से जुड़ गईं।
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आत्मसुरक्षा की कक्षा भी शुरू की
अवंतिका ने छह माह पहले इस सामाजिक कार्य के साथ बच्चियों को सशक्त करने के लिए आत्मसुरक्षा की कक्षा भी शुरू की है। शहर के आर्य कन्या इंटर कॉलेज में प्रति रविवार को बच्चियों को आत्म रक्षा के तरीके बताए जाते हैं। साथ ही बच्चियों को सिलाई बगैरह भी सिखाई जाती है। इसमें अवंतिका की मां उनका सहयोग करती हैं।
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कई लोग आए साथ...बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने की जिम्मेदारी ली
अवंतिका बताती हैं इन दो सालों में उनके इस काम की लोगों ने सराहना की। कई अच्छे बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने की जिम्मेदारी सामाजिक लोगों ने उठाई। बताया कि यदि कोई सामाजिक कार्यकर्ता किसी बच्चे की फीस जमा नहीं कर पाता था तो मैं अपने साथियों के साथ फीस जमा कर देती हूं।