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एक किमी में चार जाम प्वाइंट, ई-रिक्शा बन रहे मुसीबत
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उरई। शहर के आंबेडकर चौराहे से माहिल तालाब तक एक किलोमीटर के दायरे में चार जाम प्वाइंट हैं। महिला अस्पताल के गेट के सामने, शहीद भगत सिंह चौराहा, मुख्य बाजार, घंटाघर चौराहा और बजरिया तिराहा पर पूरे दिन जाम के लिए जूझना पड़ता है। जाम की सबसे बड़ी वजह बेशुमार ई-रिक्शा हैं। शहर में हर रोज ई-रिक्शा की तादाद बढ़ रही है। इनका परिवहन विभाग में पंजीयन और नंबरिंग न होने पर इन पर लगाम लगाने के लिए कोई कार्ययोजना भी धरातल पर नहीं उतर पा रही है।
06 अगस्त 2022 को एएसपी के साथ ई-रिक्शा चालकों के साथ एक बैठक हुई थी। इसमें कुछ बिंदु तय किए गए थे, लेकिन, इस पर भी अमल नहीं हो सका है। उधर पुलिस और अन्य विभाग यातायात माह में सिर्फ जागरुकता और हेलमेट चेकिंग तक सीमित हैं। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के सीएमएस का कहना है कि अस्पताल के बाहर के अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के लिए कई बार नगर पालिका और पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
शहर के आंबेडकर चौराहे से लेकर शहीद भगत सिंह चौराहे पर दिन में कई बार जाम लगता है। इसका कारण जिला अस्पताल के पास बेतरतीब अवैध होर्डिंग्स लगाना और अवैध वाहन पार्किंग का होना है। यहां पर डिवाइडर के पोल पर कई जगह होर्डिंग्स, कट आउट लगा दिए गए हैं। अस्पताल गेट पर वाहन खड़े रहते है। जिसकी वजह से मरीजों को आने जाने में दिक्कत होती है। सबसे ज्यादा दिक्कत एंबुलेंस के आने के दौरान होती है। अस्पताल में प्रवेश करते और निकलते समय एंबुलेंस को जाम में फंसना पड़ता है।
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शहीद भगत सिंह चौराहे से घंटाघर चौराहे पर मुख्य बाजार है। यहां पर जगह जगह अतिक्रमण किया गया है। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें सडक़ पर ही लगा रखी है। इसका नतीजा यह है कि जब कोई बड़ा वाहन आ जाता है तो जाम तो जाम लग जाता है।
घंटाघर चौराहे से नीलम तिराहा और इलाहाबाद बैंक चौराहा तक कई स्कूलों का रास्ता जाता है। छुट्टी के समय कई बसें भी निकलती है। जो रोजाना जाम का कारण बनती है। सुबह और शाम दोनों वक्त यहां जाम की स्थिति रहती है।
एएसपी के साथ बैठक यह हुआ था तय
1. रिक्शा चालक रिक्शे को नीचे उतार कर सवारी बैठाएंगे-उतारेंगे।
2. रिक्शा चालक एंबुलेंस और स्कूल वाहन को तुरंत पास देंगें।
3. नो एंट्री का समय सुबह 9.00 से 03.00 और शाम 05.00 से 08.00 बजे तक रहेगा।
4. नो एट्री रूट- शहीद भगत सिंह चौराहा से इलाहाबाद बैंक, मौनी मन्दिर से घण्टाघर और डीवीसी से घण्टाघर तक रहेगा।
5. रिक्शा चालक अपने रिक्शे के दाहिने ओर सवारी नही उतारेगा
6. रिक्शा चालक ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो कॉपी और आधार कार्ड की फोटो कॉपी साथ में रखेंगे
7. रिक्शा चालक अप नी रूट संख्या पर ही चलेंगे।
8. रिक्शा चालक मुख्य चौराहे से 50 मीटर दूर खड़े होंगे।
9. रिक्शा चालक माल वाहक सामान नहीं लादेंगे।
बिना सख्ती के नहीं सुधरेगी यातायात व्यवस्था
50 साल से यातायात सुधार कार्यक्रमों से जुड़े बाबूराम कौशल (85) का कहना है कि जाम लगने का प्रमुख कारण गलत साइड से जा रहे लोगों को सख्ती से न रोका जाना है। जल्दबाजी जाम का कारण बनती है। नो इंट्री में बड़े वाहनों को सख्ती से रोका जाए। अतिक्रमण भी हटाया जाए। माहिल तालाब के पास स्थित नीलम लॉज के संचालक बाबू राम वहां जाम लगने पर अपनी सीट छोड़कर स्वयं भी जाम खुलवाने की कवायद में लग जाते हैं। यह उनकी दिनचर्या में शामिल है। उन्होंने बताया कि वे 1974 से इस काम में जुटे हैं।
तीन महीने पहले इस मामले में बैठक हुई थी। यातायात सुधारने के लिए नगर पालिका, परिवहन विभाग और व्यापारियों से चर्चा की जा रही है। इसको लेकर वाहन स्टैंड बनाने, ई-रिक्शा की नंबरिंग करने पर चर्चा की जाएगी। इस मामले में जल्द ही कार्ययोजना धरातल पर लाई जाएगी।
गिरिजा शंकर त्रिपाठी, सीओ सिटी।
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06 अगस्त 2022 को एएसपी के साथ ई-रिक्शा चालकों के साथ एक बैठक हुई थी। इसमें कुछ बिंदु तय किए गए थे, लेकिन, इस पर भी अमल नहीं हो सका है। उधर पुलिस और अन्य विभाग यातायात माह में सिर्फ जागरुकता और हेलमेट चेकिंग तक सीमित हैं। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के सीएमएस का कहना है कि अस्पताल के बाहर के अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के लिए कई बार नगर पालिका और पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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शहर के आंबेडकर चौराहे से लेकर शहीद भगत सिंह चौराहे पर दिन में कई बार जाम लगता है। इसका कारण जिला अस्पताल के पास बेतरतीब अवैध होर्डिंग्स लगाना और अवैध वाहन पार्किंग का होना है। यहां पर डिवाइडर के पोल पर कई जगह होर्डिंग्स, कट आउट लगा दिए गए हैं। अस्पताल गेट पर वाहन खड़े रहते है। जिसकी वजह से मरीजों को आने जाने में दिक्कत होती है। सबसे ज्यादा दिक्कत एंबुलेंस के आने के दौरान होती है। अस्पताल में प्रवेश करते और निकलते समय एंबुलेंस को जाम में फंसना पड़ता है।
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शहीद भगत सिंह चौराहे से घंटाघर चौराहे पर मुख्य बाजार है। यहां पर जगह जगह अतिक्रमण किया गया है। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें सडक़ पर ही लगा रखी है। इसका नतीजा यह है कि जब कोई बड़ा वाहन आ जाता है तो जाम तो जाम लग जाता है।
घंटाघर चौराहे से नीलम तिराहा और इलाहाबाद बैंक चौराहा तक कई स्कूलों का रास्ता जाता है। छुट्टी के समय कई बसें भी निकलती है। जो रोजाना जाम का कारण बनती है। सुबह और शाम दोनों वक्त यहां जाम की स्थिति रहती है।
एएसपी के साथ बैठक यह हुआ था तय
1. रिक्शा चालक रिक्शे को नीचे उतार कर सवारी बैठाएंगे-उतारेंगे।
2. रिक्शा चालक एंबुलेंस और स्कूल वाहन को तुरंत पास देंगें।
3. नो एंट्री का समय सुबह 9.00 से 03.00 और शाम 05.00 से 08.00 बजे तक रहेगा।
4. नो एट्री रूट- शहीद भगत सिंह चौराहा से इलाहाबाद बैंक, मौनी मन्दिर से घण्टाघर और डीवीसी से घण्टाघर तक रहेगा।
5. रिक्शा चालक अपने रिक्शे के दाहिने ओर सवारी नही उतारेगा
6. रिक्शा चालक ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो कॉपी और आधार कार्ड की फोटो कॉपी साथ में रखेंगे
7. रिक्शा चालक अप नी रूट संख्या पर ही चलेंगे।
8. रिक्शा चालक मुख्य चौराहे से 50 मीटर दूर खड़े होंगे।
9. रिक्शा चालक माल वाहक सामान नहीं लादेंगे।
बिना सख्ती के नहीं सुधरेगी यातायात व्यवस्था
50 साल से यातायात सुधार कार्यक्रमों से जुड़े बाबूराम कौशल (85) का कहना है कि जाम लगने का प्रमुख कारण गलत साइड से जा रहे लोगों को सख्ती से न रोका जाना है। जल्दबाजी जाम का कारण बनती है। नो इंट्री में बड़े वाहनों को सख्ती से रोका जाए। अतिक्रमण भी हटाया जाए। माहिल तालाब के पास स्थित नीलम लॉज के संचालक बाबू राम वहां जाम लगने पर अपनी सीट छोड़कर स्वयं भी जाम खुलवाने की कवायद में लग जाते हैं। यह उनकी दिनचर्या में शामिल है। उन्होंने बताया कि वे 1974 से इस काम में जुटे हैं।
तीन महीने पहले इस मामले में बैठक हुई थी। यातायात सुधारने के लिए नगर पालिका, परिवहन विभाग और व्यापारियों से चर्चा की जा रही है। इसको लेकर वाहन स्टैंड बनाने, ई-रिक्शा की नंबरिंग करने पर चर्चा की जाएगी। इस मामले में जल्द ही कार्ययोजना धरातल पर लाई जाएगी।
गिरिजा शंकर त्रिपाठी, सीओ सिटी।