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हर दिल में सम्मान हर आंख रही नम
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ग्वालियर में पार्थिव शरीर का सम्मान करते एयरफोर्स अधिकारी।
- फोटो : ORAI
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उरई (जालौन)। मिग-21 विमान हादसे में जान गंवाने वाले शहीद ग्रुप कैप्टन आशीष गुप्ता का गुरुवार को पूरे सम्मान के साथ ग्वालियर में ही अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान एयरफोर्स के तमाम अधिकारी भी मौजूद रहे। ताबूत में रखे शहीद आशीष के शव को गार्ड ऑफ आनर दिया गया। इसके बाद कैप्टन के चचेरे भाई अमित ने मुखाग्नि दी। इस दौरान मौजूद भीड़ में हर किसी की आंखें नम थी और दिलों में कैप्टन की शहादत के प्रति सम्मान था।
बता दें कि बुधवार को ग्वालियर एयरबेस पर मिग-21 विमान हादसे का शिकार हो गया था। घटना में जनपद के निवासी कैप्टन आशीष की शहादत हो गई थी। गुरुवार को ग्वालियर में ही उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले एयरबेस पर उनका सम्मान करने वाले अधिकारियों की भीड़ लगी रही। एयरफोर्स के जवान से लेकर हर एक अधिकारी की आंख नम थी। सम्मान के बाद गार्ड आफ आनर दिया गया। जनपद से भी सैकड़ों लोग जिनमें रिश्तेदार, साथी और कैप्टन को जानने वाले ग्वालियर पहुंचे।
उधर, कैप्टन के करीबियों ने बताया कि विमान पर बैठने से पहले कैप्टन आशीष ने फोन पर अपनी पत्नी छाया से आखिरी मर्तबा बात की थी। किसी को क्या पता था कि अब उनकी आवाज आसमान में ही इस तरह हमेशा के लिए गुम हो जाएगी।
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फैजाबाद से ग्वालियर पहुंचे पिता प्रकाश चंद्र को पूरे रास्ते भर नहीं बताया गया था कि बेटे की शहादत हो गई है। ग्वालियर पहुंचकर जानकारी हुई तो वे बेसुध हो गए। बोले कि हर बेटा अपने पिता का सहारा होता है। बेटे के गम के साथ उसकी शहादत पर फर्क भी है।
उधर, जनपद के गहोई सेवा मंडल के महामंत्री सुरेश कुमार मिसुरया ने बताया कि समाज के लिए कैप्टन की शहादत गर्व की बात है। जल्द ही उरई में कैप्टन की याद में एक कार्यक्रम किया जाएगा, जिसमें उनके परिवार को सम्मानित किया जाएगा।
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बता दें कि बुधवार को ग्वालियर एयरबेस पर मिग-21 विमान हादसे का शिकार हो गया था। घटना में जनपद के निवासी कैप्टन आशीष की शहादत हो गई थी। गुरुवार को ग्वालियर में ही उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले एयरबेस पर उनका सम्मान करने वाले अधिकारियों की भीड़ लगी रही। एयरफोर्स के जवान से लेकर हर एक अधिकारी की आंख नम थी। सम्मान के बाद गार्ड आफ आनर दिया गया। जनपद से भी सैकड़ों लोग जिनमें रिश्तेदार, साथी और कैप्टन को जानने वाले ग्वालियर पहुंचे।
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उधर, कैप्टन के करीबियों ने बताया कि विमान पर बैठने से पहले कैप्टन आशीष ने फोन पर अपनी पत्नी छाया से आखिरी मर्तबा बात की थी। किसी को क्या पता था कि अब उनकी आवाज आसमान में ही इस तरह हमेशा के लिए गुम हो जाएगी।
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फैजाबाद से ग्वालियर पहुंचे पिता प्रकाश चंद्र को पूरे रास्ते भर नहीं बताया गया था कि बेटे की शहादत हो गई है। ग्वालियर पहुंचकर जानकारी हुई तो वे बेसुध हो गए। बोले कि हर बेटा अपने पिता का सहारा होता है। बेटे के गम के साथ उसकी शहादत पर फर्क भी है।
उधर, जनपद के गहोई सेवा मंडल के महामंत्री सुरेश कुमार मिसुरया ने बताया कि समाज के लिए कैप्टन की शहादत गर्व की बात है। जल्द ही उरई में कैप्टन की याद में एक कार्यक्रम किया जाएगा, जिसमें उनके परिवार को सम्मानित किया जाएगा।