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दूधिया रोशनी से अब नहाएगा रेलवे स्टेशन
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उरई। उरई रेलवे स्टेशन जल्द ही दूधिया रोशनी से नहाएगा। एयरपोर्ट की तर्ज पर हाईमास्क बिजली के टावर लगाए जाएंगे। स्टेशन के बाहर से लेकर भीतर प्लेटफार्म तक को जगमग करने के लिए कुल चार हाईमास्क टावर लगेंगे। योजना की अनमाुनित लागत करीब पचास लाख के आसपास होगी। इसके लिए वायरिंग का काम शुरू हो चुका है। सब कुछ ठीकठाक रहा तो माह के अंत तक लाइटें भी शुरू हो जाएगी। इससे स्टेशन आने वाले यात्रियों को काफी सहूलियत होगी।
उरई रेलवे स्टेशन पर झांसी की तरफ दो, कानपुर की तरफ एक और एक तीन नंबर प्लेटफार्म पर लगाया जाएगा, जिससे मालगोदाम वाला एरिया भी कवर हो सकेगा। नई बिल्डिंग में जहां सिग्नल पैनल बिल्डिंग बनी है, एक हाईमास्क उसके सामने भी लगाया जाएगा। इसके अलावा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक, दो व तीन नंबर पर एयरपोर्ट की तर्ज पर कुल 48 जगह डबल एलईडी लाइट लगाई जाएगी। इसके अलावा इंडिया गेट की तर्ज पर स्टेशन के बाहर फेसिड लाइट लगाई जाएगी। जो नीचे से ऊपर की तरफ फोकस करती है, जिससे पूरी स्टेशन बिल्डिंग दिखती रहे।
अधिकारियों के मुताबिक, हाईमास्क टावर लाइट बिना खंभे की लगाई जाएगी, जिससे किसी के टकराने की संभावना ही नहीं रहेंगी। आरवीएनएल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रियांक गुप्ता ने बताया कि लाइटिंग का काम मुंबई की एनरिच आरडी कंपनी को दिया गया है। करीब 50 लाख की लागत से काम होगा। इनकी खासियत यह होगी कि यह पूरी तरह ऑटोमैटिक तो होंगे ही, साथ ही अपने आप भी मैनुअल तरीके से बंद किए जा सकेंगे। इन बिजली के टावरों की खूबी यह होगी कि सूरज ढलते ही यह सभी बिजली के टावर ऑटोमैटिक जलने लगेंगे और दिन उगते ही अपने आप बंद हो जाएंगे। कभी तकनीकी गड़बड़ी होने पर मैनुअल तरीके से भी बंद किए जा सकेंगे।
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हाईमास्क लाइट टावर लगाने में खंभों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। एक हाईमास्क टावर की ऊंचाई लगभग 50 फुट ऊंचा होगा। जो लगभग 150 मीटर को रोशन करेगा। इन लाइटों का सबसे ज्यादा फायदा यात्रियों के साथ मालगोदाम एरिया में भी होगा। खंभे न होने से ट्रक भी खंभे से नहीं टकराएंगे। एनरिच आरडी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर शलभ श्रीवास्तव का कहना है कि एयरपोर्ट की तर्ज पर प्लेटफार्म पर लाइटिंग का काम होगा। यार्ड में भी उच्च गुणवत्ता वाले ऑटोमैटिक हाईमास्क लगाए जाएंगे। वायरिंग का काम शुरू हो गया है।
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उरई रेलवे स्टेशन पर झांसी की तरफ दो, कानपुर की तरफ एक और एक तीन नंबर प्लेटफार्म पर लगाया जाएगा, जिससे मालगोदाम वाला एरिया भी कवर हो सकेगा। नई बिल्डिंग में जहां सिग्नल पैनल बिल्डिंग बनी है, एक हाईमास्क उसके सामने भी लगाया जाएगा। इसके अलावा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक, दो व तीन नंबर पर एयरपोर्ट की तर्ज पर कुल 48 जगह डबल एलईडी लाइट लगाई जाएगी। इसके अलावा इंडिया गेट की तर्ज पर स्टेशन के बाहर फेसिड लाइट लगाई जाएगी। जो नीचे से ऊपर की तरफ फोकस करती है, जिससे पूरी स्टेशन बिल्डिंग दिखती रहे।
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अधिकारियों के मुताबिक, हाईमास्क टावर लाइट बिना खंभे की लगाई जाएगी, जिससे किसी के टकराने की संभावना ही नहीं रहेंगी। आरवीएनएल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रियांक गुप्ता ने बताया कि लाइटिंग का काम मुंबई की एनरिच आरडी कंपनी को दिया गया है। करीब 50 लाख की लागत से काम होगा। इनकी खासियत यह होगी कि यह पूरी तरह ऑटोमैटिक तो होंगे ही, साथ ही अपने आप भी मैनुअल तरीके से बंद किए जा सकेंगे। इन बिजली के टावरों की खूबी यह होगी कि सूरज ढलते ही यह सभी बिजली के टावर ऑटोमैटिक जलने लगेंगे और दिन उगते ही अपने आप बंद हो जाएंगे। कभी तकनीकी गड़बड़ी होने पर मैनुअल तरीके से भी बंद किए जा सकेंगे।
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हाईमास्क लाइट टावर लगाने में खंभों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। एक हाईमास्क टावर की ऊंचाई लगभग 50 फुट ऊंचा होगा। जो लगभग 150 मीटर को रोशन करेगा। इन लाइटों का सबसे ज्यादा फायदा यात्रियों के साथ मालगोदाम एरिया में भी होगा। खंभे न होने से ट्रक भी खंभे से नहीं टकराएंगे। एनरिच आरडी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर शलभ श्रीवास्तव का कहना है कि एयरपोर्ट की तर्ज पर प्लेटफार्म पर लाइटिंग का काम होगा। यार्ड में भी उच्च गुणवत्ता वाले ऑटोमैटिक हाईमास्क लगाए जाएंगे। वायरिंग का काम शुरू हो गया है।