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Jalaun News: जल संरक्षण पर डीएम को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
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फोटो - 05 डीएम राजेश कुमार पांडेय को सम्मानित करती राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू। स्रोत स्वयं
उरई। जल संरक्षण पर किए गए कार्यों के लिए जालौन के डीएम राजेश कुमार पांडेय को मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मानित किया। डीएम को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न व दो करोड़ रुपये का पुरस्कार स्वरूप दिए गए हैं। उन्होंने वर्षों से गायब नून नदी को पुनर्जीवित करने के लिए जन आंदोलन चलाया था। इससे जिले को जलसंरक्षण में तीसरा स्थान मिला था।
बुंदेलखंड की पानी की समस्या वर्षों पुरानी है। बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित जिला जालौन में जल संरक्षण की दिशा में डीएम राजेश कुमार पांडेय ने जन भागीदारी पर आधारित ऐसा मॉडल विकसित किया जिसने तस्वीर बदल दी। उन्होंने न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि व जनआंदोलन को जनता से जोड़कर व्यापक अभियान चलाया। उनकी नेतृत्व क्षमता व जनता के जुड़ाव ने जल संरक्षण अभियान में शीर्ष सूची में अपना नाम दर्ज कराया।
डीएम के कार्यकाल में जिले में बड़े पैमाने पर चेकडेम, रैन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाबों का सुंदरीकरण, जल भंडारण संरचनाओं का निर्माण किया गया। उनके इन प्रयासों से पानी की बचत बढ़ी और जल स्तर भी बढ़ा।
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जल संरक्षण जन आंदोलन के तहत गांवों में देखने को मिला। बारिश के पानी के संरक्षण से सिंचाई की स्थिति बेहतर हुई है। डीएम ने बताया कि राष्ट्रीय जल पुरस्कार उन्हें वाटर हार्वेस्टर व वाटर रिर्चाजिंग को लेकर दिया गया है।
83 किमी लंबी है नून नदी
कोंच तहसील के ग्राम सतोह से शुरू होने वाली 83 किलोमीटर लंबी नून नदी वर्षों से सूखी पड़ी थी। नदी के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो गया था। इसके लिए डीएम राजेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में इसे पुनर्जीवित करने की ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की गई। जिलाधिकारी ने इसके लिए जन भागीदारी आंदोलन चलाया। इसमें जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी प्रतिभाग किया और उनकी जन भागीदारी आंदोलन के कारण आज 83 किलोमीटर लंबी नून नदी पुनर्जीवित हो गई है। इससे किसानों को पानी की अब समस्या नहीं रह गई है। किसान इस नून नदी के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी ले रहे हैं।
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बुंदेलखंड की पानी की समस्या वर्षों पुरानी है। बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित जिला जालौन में जल संरक्षण की दिशा में डीएम राजेश कुमार पांडेय ने जन भागीदारी पर आधारित ऐसा मॉडल विकसित किया जिसने तस्वीर बदल दी। उन्होंने न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि व जनआंदोलन को जनता से जोड़कर व्यापक अभियान चलाया। उनकी नेतृत्व क्षमता व जनता के जुड़ाव ने जल संरक्षण अभियान में शीर्ष सूची में अपना नाम दर्ज कराया।
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डीएम के कार्यकाल में जिले में बड़े पैमाने पर चेकडेम, रैन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाबों का सुंदरीकरण, जल भंडारण संरचनाओं का निर्माण किया गया। उनके इन प्रयासों से पानी की बचत बढ़ी और जल स्तर भी बढ़ा।
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जल संरक्षण जन आंदोलन के तहत गांवों में देखने को मिला। बारिश के पानी के संरक्षण से सिंचाई की स्थिति बेहतर हुई है। डीएम ने बताया कि राष्ट्रीय जल पुरस्कार उन्हें वाटर हार्वेस्टर व वाटर रिर्चाजिंग को लेकर दिया गया है।
83 किमी लंबी है नून नदी
कोंच तहसील के ग्राम सतोह से शुरू होने वाली 83 किलोमीटर लंबी नून नदी वर्षों से सूखी पड़ी थी। नदी के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो गया था। इसके लिए डीएम राजेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में इसे पुनर्जीवित करने की ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की गई। जिलाधिकारी ने इसके लिए जन भागीदारी आंदोलन चलाया। इसमें जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी प्रतिभाग किया और उनकी जन भागीदारी आंदोलन के कारण आज 83 किलोमीटर लंबी नून नदी पुनर्जीवित हो गई है। इससे किसानों को पानी की अब समस्या नहीं रह गई है। किसान इस नून नदी के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी ले रहे हैं।