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Jalaun News: ‘रेल नहीं तो जेल सही’ के नारे के चला था आंदोलन

Sun, 08 Sep 2024 01:40 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 08 Sep 2024 01:40 AM IST
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जालौन। 56 दिन चले आंदोलन के बाद भी जालौन को रेलवे की सौगात नहीं मिल सकी। 29 फरवरी 2016 में जब आम बजट के साथ रेल बजट तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रस्तुत किया गया था। तब लोगों को आशा थी कि रेल बजट में वर्ष 2012 में सर्वे हो चुकी दोनों रेल लाइन कोंच से फफूंद वाया जालौन औरैया व महोबा से भिंड वाया उरई, जालौन, बंगरा माधौगढ़ के लिए बजट में धन दिए जाने की घोषणा की जाएगी।
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लेकिन बजट में जनता की अपेक्षाओं को किनारे रखकर ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई। जिसके बाद दशकों से रेल लाइन की मांग कर रही जनता का सब्र का बांध टूट गया और दो मार्च को शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क में जनप्रतिनिधियों को ध्यान आकृष्ट करने की योजना बनी। जहां रेल लाओ स्वाभिमान बचाओ संघर्ष समिति का गठन हुआ। तीन मार्च को नगर में बाजार बंदी की योजना बनाई गई। देर शाम तक बाजार में भ्रमण कर दुकानदारों को बाजारबंदी के बारे में बताया गया।
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वर्ष 2016 के बजट के बाद ऐतिहासिक रही थी बाजारबंदी, निकाला मशाल जुलूस
इस बाजारबंदी में दुकानदारों ने अभूतपूर्व सहयोग किया। तीन मार्च को हुई बाजार बंदी कई मायनों में ऐतिहासिक रही। बाजारबंदी के चलते लोग चाय, गुटके व दवाओं के लिए भी तरस गए। नगर में चाय-नाश्ते, पान-गुटके व मेडिकल स्टोर की दुकानों सहित सब्जीमंडी व गल्ला मंडी भी पूरी तरह से बंद रहीं। झंडा चौराहे पर हंगामी जनसभा का आयोजन दिवंगत राधेश्याम योगी और सुरेशचंद्र सिंघल की मौजूदगी में हुआ। जिसमें उपस्थित हजारों लोगों को बस एक ही जुनून था कि नगर में कैसे भी हो रेल लाइन लाई जाए। इसके लिए चाहे जितना भी संघर्ष करना पड़े सभी अपना समर्थन देंगे। चार मार्च की शाम रेल लाइन के लिए नगर की जनता ने मशाल जुलूस निकाला। ‘जिसमें रेल नहीं तो जेल सही’ के नारे लगाए गए। जब इससे भी बात नहीं बनी तो सात मार्च को क्रमिक अनशन की योजना बनाई गई और आठ मार्च से तहसील गेट के सामने रेल लाओ स्वाभिमान बचाओ संघर्ष समिति के तत्वावधान में क्रमिक अनशन की शुरूआत हो गई।
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आठ मार्च 2016 से शुरू हुआ क्रमिक अनशन 53 दिन चला
आठ मार्च की सुबह ‘रेल नहीं तो जेल सही’ व ‘एक पांव रेल में एक पांव जेल में’ के नारे लगाते हुए आंदोलनकारियों ने नगर के विभिन्न मार्गों से होकर जुलूस निकाला। पहले दिन वयोवृद्ध समाजसेवी दिवंगत उमाशंकर चतुर्वेदी, डॉ. रामकिशोर गुप्ता, लालजी गुप्ता, प्रद्युम्न दीक्षित इटहिया व सपा नेता इमरान अंसारी अनशन पर बैठे। धीरे-धीरे अनशन पर बैठने वाले लोगों का तांता लगता गया। इस आंदोलन को नगर के व्यापारियों, किसान, मजदूर, शिक्षक, पत्रकार, महिलाएं, युवा और बुजुर्गों का साथ मिला। इस आंदोलन की गूंज पूरे जनपद में हो उठी थी। भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक व गैर राजनीतिक दल और संगठन के लोग पूरे जनपद से नगर में पहुंचकर अपना समर्थन देने की घोषणा कर रहे थे।

31वें दिन पहुंचे थे क्षेत्रीय सांसद, आश्वासन नहीं आया था काम
क्रमिक अनशन के 31वें दिन सात अप्रैल की रात करीब साढ़े नौ बजे तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद भानू प्रताप वर्मा अनशन स्थल पर आए। जहां आंदोलनकारियों में पूर्व राज्यसभा सांसद श्रीराम पाल, राजू श्रीवास्तव पूर्व प्रधान कुसमरा, असलम सिद्दीकी, अशरफ अली आदि ने उन्हें नगर की जनता की व्यथा से अवगत कराया था। लेकिन उस समय सांसद द्वारा कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया। यह क्रमिक अनशन लगातार 53 दिन यानी 29 अप्रैल 2016 तक चला। इस दौरान कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर 29 अप्रैल को ही आमरण अनशन की रूपरेखा समिति के गौरीश द्विवेदी, थोपन यादव, दीपू त्रिपाठी समेत अन्य सदस्यों ने मिलकर बनाई।

54वें दिन से शुरू हुआ आमरण अनशन तीन दिन तक चला
54वें दिन 30 अप्रैल 2016 को आमरण अनशनकारी अधिवक्ता असलम सिद्दीकी, समाजसेवी हाजी मंसब खां, इमरान अंसारी को प्रसिद्ध रंगमंचकर्मी दिवंगत पंडित पूरनचंद्र मिश्र व स्तंभकार केपी सिंह ने माल्यार्पण कर अनशन पर बैठाया। इससे पूर्व सभी अनशनकारियों को रथ पर बैठाकर जुलूस की शक्ल में जनजागरण यात्रा निकाली गई। इस दौरान अनशनकारियों ने सभा को संबोधित कर कहा था कि नगर व क्षेत्र के विकास के लिए उन्हें अपनी शहादत ही क्यों न देनी पड़े, वह इसके लिए भी वह तैयार हैं। यह आमरण अनशन तीन दिनों तक चला।


डीएम, एसपी व रेलवे प्रतिनिधि के आश्वासन के बाद थमा आंदोलन
तीसरे दिन दो मई को शाम लगभग सात बजे तत्कालीन डीएम संदीप कौर, एसपी बब्लू कुमार के साथ झांसी से डीआरएम के प्रतिनिधि के तौर पर आए मंडलीय अधीक्षण अभियंता मनोज कुमार मिश्रा अनशन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने अनशनकारियों की मांगों को सुना। उनकी मांगों पर डीएम ने आश्वासन देते हुए कहा था कि वह अपने स्तर से प्रयास कर यह टिप्पणी लिखकर रेल मंत्रालय को प्रेेषित करेंगी कि जालौन नगर को रेलवे लाइन से जोड़ा जाए। वहीं, डीआरएम के प्रतिनिधि ने भी आश्वासन दिया था कि वह अपने स्तर से पूरी कार्रवाई कर आंदोलनकारियों का मांगपत्र रेलवे मंत्रालय को तो पहुंचाएंगे। उनके आश्वासन के बाद 56वें दिन अनशन समाप्त हुआ। लेकिन इसके बाद क्या हुआ, क्या कार्रवाई की गई इसकी जानकारी भी नगर की जनता को नहीं दी गई और आज आठ साल बाद भी नगर की जनता रेल लाइन की उम्मीद में है।
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