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फर्नीचर विक्रेता ने दुकान में फांसी लगाकर जान दी
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मौके पर मौजूद लोग।
- फोटो : ORAI
जालौन। लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के दौरान आर्थिक रूप से परेशान फर्नीचर विक्रेता ने गुरुवार की सुबह दुकान में गमछे से फांसी लगाकर जान दे दी। दुकान पर पहुंचे बच्चों ने जब पिता के शव का देखा तो कोहराम मच गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने आसपास के दुकानदारों की मदद से शव का फंदे से उतारा और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला चिमनदुबे निवासी ओमनारायण विश्वकर्मा (50) नगर के रामलीला मैदान में फर्नीचर बनाने की दुकान किए हैं। पिछले वर्ष लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के चलते दुकान बंद रहने से पूरी सहालग बर्बाद हो गई। जिसके चलते वह आर्थिक रूप से परेशान हो गए। जीविका चलाने के लिए बैंक के अलावा कई लोगों से कर्ज भी ले लिया। ओम नारायण के बड़े पुत्र केशव (18) का कहना है कि आमदनी न होने से पिता परेशान और गुमसुम रहते थे। गुरुवार की सुबह करीब 7 बजे वह घर से दुकान की चाबी लेकर निकले थे। इसके बाद करीब 10 बजे वह व छोटा भाई हरसू (14) दुकान पर पहुंचे तो दुकान बंद दिखी। बाहर बैठकर इंतजार करने लगे। करीब आधे घंटे इंतजार के बाद जब वह शटर के पास पहुंचा तो शटर के ताले खुले थे और चाबी बगल में रखी थी। जब उसने शटर को उठाया तो पिता का शव दुकान की छत से गमछे के सहारे लटक रहा था। पिता के शव को देखकर दोनों बच्चे रोने लगे। जब आसपास के दुकानदार वहां पहुंचे तो पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते कोतवाल सुनील सिंह, चौकी प्रभारी ज्ञानेश्वर विश्वकर्मा पुलिस कर्मियों के साथ वहां पहुंच गए। पुलिस ने दुकानदारों के सहयोग से मृतक के शव को फांसी के फंदे से नीचे उतरवाया और मृतक के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
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दूसरी शादी की थी ओमनारायण ने
जालौन। पिता की इकलौती संतान ओमनारायण विश्वकर्मा के पिता भगवानदास की मृत्यु बीते साल बीमारी के चलते हो गई थी। इससे पहले लगभग 15 साल पहले पत्नी साधना की जलकर मौत हो गई थी। जिसके बाद उन्होंने मंजू से दूसरी शादी की थी। जिनसे उनका ढाई वर्षीय बेटा दर्श है। पति की मौत की सूचना पाकर पत्नी भी मौके पर पहुंच गई। जहां पति के शव को देखकर वह बेहोश हो गई। बच्चे छोटे होने और पति की मौत होने से परिवार का भरण पोषण कैसे होगा सभी को इसकी चिंता सता रही है।
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कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला चिमनदुबे निवासी ओमनारायण विश्वकर्मा (50) नगर के रामलीला मैदान में फर्नीचर बनाने की दुकान किए हैं। पिछले वर्ष लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के चलते दुकान बंद रहने से पूरी सहालग बर्बाद हो गई। जिसके चलते वह आर्थिक रूप से परेशान हो गए। जीविका चलाने के लिए बैंक के अलावा कई लोगों से कर्ज भी ले लिया। ओम नारायण के बड़े पुत्र केशव (18) का कहना है कि आमदनी न होने से पिता परेशान और गुमसुम रहते थे। गुरुवार की सुबह करीब 7 बजे वह घर से दुकान की चाबी लेकर निकले थे। इसके बाद करीब 10 बजे वह व छोटा भाई हरसू (14) दुकान पर पहुंचे तो दुकान बंद दिखी। बाहर बैठकर इंतजार करने लगे। करीब आधे घंटे इंतजार के बाद जब वह शटर के पास पहुंचा तो शटर के ताले खुले थे और चाबी बगल में रखी थी। जब उसने शटर को उठाया तो पिता का शव दुकान की छत से गमछे के सहारे लटक रहा था। पिता के शव को देखकर दोनों बच्चे रोने लगे। जब आसपास के दुकानदार वहां पहुंचे तो पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते कोतवाल सुनील सिंह, चौकी प्रभारी ज्ञानेश्वर विश्वकर्मा पुलिस कर्मियों के साथ वहां पहुंच गए। पुलिस ने दुकानदारों के सहयोग से मृतक के शव को फांसी के फंदे से नीचे उतरवाया और मृतक के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
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दूसरी शादी की थी ओमनारायण ने
जालौन। पिता की इकलौती संतान ओमनारायण विश्वकर्मा के पिता भगवानदास की मृत्यु बीते साल बीमारी के चलते हो गई थी। इससे पहले लगभग 15 साल पहले पत्नी साधना की जलकर मौत हो गई थी। जिसके बाद उन्होंने मंजू से दूसरी शादी की थी। जिनसे उनका ढाई वर्षीय बेटा दर्श है। पति की मौत की सूचना पाकर पत्नी भी मौके पर पहुंच गई। जहां पति के शव को देखकर वह बेहोश हो गई। बच्चे छोटे होने और पति की मौत होने से परिवार का भरण पोषण कैसे होगा सभी को इसकी चिंता सता रही है।
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