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तेज धूप से मुरझाने लगी मटर की पौध

Tue, 26 Nov 2019 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 26 Nov 2019 12:12 AM IST
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Pea plant started fading with strong sunlight
किसान अरविंद कुमार - फोटो : ORAI
मुहम्मदाबाद। जालौन के किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित होने वाली हरी मटर में इस बार नुकसान होता दिख रहा है। जानकारों की मानें तो इस बार तापमान न होने के कारण मटर की पौध समय से पहले ही फूल देने लगी और फली भी आने लगी। लेकिन लंबाई न होने के कारण इस बार पैदावार में गिरावट की पूरी संभावना बताई जा रही है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डा. राजीव कुमार सिंह का कहना है कि मटर की खेती के लिए नवंबर महीने में 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान मुफीद होता है पर इस समय तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस चल रहा है। इसकी वजह से जमीन से तो पौधा निकल रहा है लेकिन उसकी लंबाई नहीं बढ़ रही है। पौधे में फलियां भी आने लगी हैं। जब पौधा नहीं बढ़ेगा तो इस बात की पूरी संभावना है कि पैदावार में भी गिरावट आएगी। किसानों का कहना है कि मटर की फसल के बाद वे लोग दो फसलें ले लेते हैं।
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मटर की बीज इस बार किसानों ने तीन से पांच हजार रुपये क्विंटल के दामों में खरीदा था। यहीं नहीं कुछ किसानों ने तो बाहरी व्यापारियों से एडवांस भी ले रखा था। जिन्हें पैदावार होने पर मटर देनी थी। अब लागत निकालना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। कृषि वैज्ञानिक डा. राजीव सिंह का कहना है कि मटर की खेती मौसम पर आधारित है। तापमान ज्यादा होने के कारण जमीन से नमी गायब हो गई है। इसकी वजह से पौधों को ताकत नहीं मिल रही है। तापमान में गिरावट आती है तो कुछ फायदा हो सकता है।
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पौधा पीला पड़ने लगा
गुढ़ा के किसान रामराज का कहना है कि हम लोग करीब बीस साल से हरी मटर की खेती करते चले आ रहे है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि नवंबर माह में ही पौधा पीला पड़ने लगा है और पौधे की लंबाई भी नहीं बढ़ रही है। यह सब मौसम के असर के कारण हो रहा है।
इस बार नहीं मिल पाएगा मुनाफा
कुसमिलिया के अरविंद का कहना है कि किसानों को अर्किल की खेती से दूसरी फसल करने में मदद मिल जाती थी। अर्किल मटर की उन्होंने समय से बुवाई भी कर दी थी और आशा थी कि लागत के साथ मुनाफा कमा लेंगे लेकिन मौसम की मार के कारण परेशान है।

दो बार सिंचाई, फिर भी नहीं मिली ताकत
मुहम्मदाबाद के श्यामसुंदर का कहना है कि वैसे तो अर्किल मटर में एक पानी लगता था और साठ दिन में फसल तैयार हो जाती थी लेकिन दिन में तेज धूप के कारण मटर अभी से सूखने लगी है। कई किसान दो बार सिंचाई कर चुके है। लेकिन फसल को ताकत नहीं मिल रही है।

किसान श्याम सुन्दर

किसान श्याम सुन्दर- फोटो : ORAI

वैज्ञानिक डॉक्टर राजीव सिंह

वैज्ञानिक डॉक्टर राजीव सिंह- फोटो : ORAI

किसान रामराज

किसान रामराज- फोटो : ORAI

मटर की फसल दिखाते किसान

मटर की फसल दिखाते किसान- फोटो : ORAI

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