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धूमधाम से निकली शालिग्राम की बारात, तुलसी जी के साथ लिए फेरे

Sun, 29 Nov 2020 11:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 29 Nov 2020 11:30 PM IST
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धूमधाम से निकलती शालिग्राम जी की बारात - फोटो : ORAI
कोंच (जालौन)। कार्तिक मास के अवसान पर शनिवार की रात बैकुंठी चतुर्दशी पर पटेलनगर में रामदास लोहिया के आवास पर तुलसी- सालिग्राम का विवाह संपन्न हुआ। इससे पूर्व श्रीहरि के स्वरूप भगवान सालिग्राम की बरात धूमधाम से गाजेबाजे संग निकाली गई।
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पुरुषोत्तम मास के बाद कार्तिक मास की बैकुंठी चतुर्दशी पर जगह-जगह भगवान सालिग्राम और तुलसी के विवाह संपन्न कराए गए। पटेलनगर में गल्ला व्यवसायी रामदास लोहिया के यहां भी तुलसी-सालिग्राम विवाह वैदिक रीति से संपन्न हुआ।
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सालिग्राम की बरात पंडित विनोद दुबे के घर से शुरू हुई और गाजेबाजे के साथ मुख्य मार्गों से होती हुई रामदास लोहिया के आवास पर पहुंची, जहां पर सालिग्राम और तुलसी का विवाह ब्राह्मणों द्वारा कराया गया, जिसमें कन्यादान से लेकर पांव पखराई तक की रस्में की गईं। इस मौके पर नरेश लोहिया, अभिषेक लोहिया, सचिन नायक, अमित, दीपक कुमार, पवन कुमार, नीरज, अंकित, प्रमोद दुबे, शीलू वैद आदि मौजूद थे।
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तुलसी-सालिग्राम का विवाह कराया
जालौन। नगर के मोहल्ला नया खंडेराव लौना रोड निवासी नीरज गुप्ता के आवास पर तुलसी महारानी और सालिग्राम के विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नाना महाराज के मंदिर से बैंड बाजे के साथ बरात निकाली गई। संत विजयदास महाराज, प्रेम प्रकाश गुप्ता, विमला देवी, शिखा, गिर्राज किशोर गुप्ता, सतीश चंद्र, काव्या, अंश आदि बराती तहसील मार्ग, काली माता मंदिर के पास से होते हुए विवाह स्थल पहुंचे। यहां सालिग्राम और तुलसी का विवाह कराया गया। महिलाओं ने सालिग्राम के पांव पखारे। अंत भंडारे का आयोजन भी हुआ।
जयंत उद्धार, ऋषि संवाद लीला का हुआ मंचन
कोंच। नवलकिशोर रामलीला महोत्सव में शनिवार की रात बजरिया रंगमंच पर जयंत उद्धार और ऋषि संवाद लीला का मंचन किया गया। प्रसंग में दर्शाया गया कि देवराज इंद्र के पुत्र जयंत वनवास काट रहे भगवान राम की परीक्षा लेने की धृष्टता करता है और कौवे का रूप धारण कर सीता के चरणों में चोंच मार देता है, जिससे उनके चरणों से खून की धार बहने लगती है।
ये देखकर राम को गुस्सा आता है और वह सरकंडे को अभिमंत्रित कर जयंत पर छोड़ देते हैं। प्राण रक्षा को जयंत तीनों लोकों में भागता फिरता है। विष्णु, शिव और ब्रह्मा के अलावा वह अपने पिता इंद्र की शरण में भी जाकर प्राण रक्षा की गुहार लगाता है, लेकिन किसी ने रक्षा नहीं की। अंत में नारदजी के कहने पर जयंत प्रभु राम की ही शरण में जाता है। प्रभु राम उसकी धृष्टता का दंड उसकी आंख फोड़कर देते हुए प्राणदान दे देते हैं।
प्रभु राम ऋषि मुनियों के आश्रमों में जाकर ज्ञान चर्चा करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। अत्रि के आश्रम में ऋषि पत्नी माता अनुसुइया जनकनंदिनी सीता को स्त्री धर्म की शिक्षा देती है। शंकर का अभिनय साकेत शांडिल्य, मोनू ठाकुर ने जयंत, रामू पटैरया ब्रह्मा, अनिल अग्रवाल इंद्र, शिवा अग्रवाल नारद, पंकजाचरण वाजपेयी अत्रि, सूरज शर्मा अनुसुइया, सोनू दुबे ने सरभंग का किरदार निभाया।

इस मौके पर रामलीला कमेटी के संरक्षक गंगाचरण वाजपेयी, अध्यक्ष सभासद दंगल सिंह यादव, रमेश तिवारी, प्रमोद नगरिया, पिंकेश शुक्ला, साकेत मिश्रा, पवन खिलाड़ी, चंदन यादव आदि मौजूद थे।
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