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Jalaun News: चालीस फीसदी सड़कें चलने लायक भी नहीं...जिम्मेदार बोले-काम चल रहा है
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उरई। दुर्दशाग्रस्त मुख्य मार्ग, संपर्क मार्ग कब दुरुस्त होंगे यह सवाल अब सिर्फ पूछने भर का नहीं रह गया, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का दर्द बन चुका है। बदहाल सड़कों की मरम्मत और निर्माण कार्यों की जो समय सीमा तय थी, वह काफी पहले ही बीच चुकी है लेकिन अभी भी करीब 40 फीसदी मार्गों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।
हाल यह है कि ज्यादातर सड़कों में कहीं डामर उखड़ चुका है तो कहीं गड्ढे इतने ज्यादा हैं कि सड़क और गड्ढों के बीच फर्क करना कठिन हो गया है। रोज इन मार्गों से गुजरने वाले हजारों लोगों के लिए यह स्थिति किसी मजबूरी से कम नहीं है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र हों या रोज कमाने-खाने वाले मजदूर, किसान या दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, सभी को अपनी जान जोखिम में डालकर इन टूटी सड़कों से गुजरना पड़ता है।
जिम्मेदारों की अनदेखी से हादसों की आशंका बढ़ गई है, वाहनों की सर्विसिंग का खर्च भी दोगुना हो गया है। कई जगह तो लोग सुरक्षित सफर के लिए वैकल्पिक लंबा रास्ता अपनाने के लिए विवश हैं। जनता की बार-बार की शिकायतों, ग्रामसभाओं में उठती आवाजों और जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों के बावजूद सड़कों की यह बदहाली दूर नहीं हो रही है। प्रशासन और संबंधित विभागों की खानापूर्ति के बीच जमीनी हकीकत यही बताती है कि सड़क सुधार की गति बेहद धीमी है और इसका खामियाजा केवल जनसाधारण को ही उठाना पड़ रहा है।
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दाड़ी मार्ग: दिखावे का पैच वर्क, बदहाली बरकरार
कोंच। कोंच से पहाड़गांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग जगह-जगह से उखड़ चुका है। ग्राम दाड़ी तक सड़क की हालत इतनी खराब है कि स्कूली बच्चों से लेकर राहगीर तक रोजाना परेशानियों का सामना कर रहे हैं। बीच-बीच में नाम भर का पैच वर्क जरूर हुआ है लेकिन इससे सड़क की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बरसात के दिनों में यही सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है। इलाकाई लोगों ने अधिकारियों से जल्द मरम्मत की मांग की है। (संवाद)
वर्जन
ठेकेदार मरम्मत कार्य करा रहा है, कुछ हिस्से बच गए हैं जिन्हें जल्द ठीक करा दिया जाएगा। नंदकिशोर, एई
संदी-आटा मार्ग: हालत ऐसी कि 15 मिनट की दूरी आधा घंटा में तय होती
आटा। संदी-आटा मार्ग पर तीन किलोमीटर की दूरी गड्ढों के बीच से गुजरते हुए तय करनी पड़ रही है। चार साल पहले करीब 25 लाख रुपये खर्च कर कराई गई मरम्मत अब कहीं नजर नहीं आती। गहरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों को दोगुना समय लग रहा है। संदी, जोराखेरा, रिरुआ, बरदर, करमेर सहित लगभग 15 हजार की आबादी इसी मार्ग पर निर्भर है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण आए दिन फिसलने और वाहन खराब होने की घटनाएं होती हैं। संदी निवासी उदय नारायण तिवारी व संजय पटेल का कहना है कि पहले 15 मिनट की दूरी अब आधे घंटे में तय होती है। (संवाद)
जर्जर मार्गों के निर्माण की स्वीकृति शासन स्तर से मिल चुकी है, जल्द कार्य शुरू कराया जाएगा। अतुल पाल, जेई, पीडब्ल्यूडी
हदरुख मार्ग-गड्ढों ने जमाया कब्जा, लोग पुराने कच्चे रास्ते से जाने के लिए मजबूर
सिरसा कलार। सिरसाकलार-हदरुख मार्ग की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वाहन चालक इस रास्ते से गुजरने से कतराते हैं। पूरे मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। हाल यह है कि छह किलोमीटर की दूरी तय करने की बजाय लोग मजबूरन मदारीपुर होकर 11 किलोमीटर घूमकर हदरुख बाजार पहुंच रहे हैं। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। ग्रामीण विजय शुक्ला, कन्हैया शिवहरे सहित अन्य लोगों का कहना है कि 20 साल पहले भी इसी कच्चे रास्ते से जाना-आना पड़ता था, आज भी हालात नहीं बदले। सड़क बनी जरूर है लेकिन चलने लायक नहीं। (संवाद)
तीन किलोमीटर में सिर्फ गिट्टी और धूल
जालौन। कोंच रोड से सिकरीराजा होते हुए अम्मरगढ़ तक लगभग तीन किलोमीटर संपर्क मार्ग पूरी तरह टूट चुका है। सड़क का डामर उखड़कर गायब हो चुका है और सिर्फ गिट्टी व धूल बची है। बरसात में मार्ग कीचड़ में तब्दील हो जाता है। दोपहिया वाहन सवार अक्सर फिसलकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इसी रास्ते पर एक इंटर कॉलेज भी है, जहां रोज बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आते हैं। कई बच्चों के गिरकर चोटिल होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा लगाकर विरोध जताया था, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है।
वर्जन
सभी सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही सभी सड़कों को सही करा दिया जाएगा।-केके सिंह, सीडीओ
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हाल यह है कि ज्यादातर सड़कों में कहीं डामर उखड़ चुका है तो कहीं गड्ढे इतने ज्यादा हैं कि सड़क और गड्ढों के बीच फर्क करना कठिन हो गया है। रोज इन मार्गों से गुजरने वाले हजारों लोगों के लिए यह स्थिति किसी मजबूरी से कम नहीं है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र हों या रोज कमाने-खाने वाले मजदूर, किसान या दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, सभी को अपनी जान जोखिम में डालकर इन टूटी सड़कों से गुजरना पड़ता है।
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जिम्मेदारों की अनदेखी से हादसों की आशंका बढ़ गई है, वाहनों की सर्विसिंग का खर्च भी दोगुना हो गया है। कई जगह तो लोग सुरक्षित सफर के लिए वैकल्पिक लंबा रास्ता अपनाने के लिए विवश हैं। जनता की बार-बार की शिकायतों, ग्रामसभाओं में उठती आवाजों और जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों के बावजूद सड़कों की यह बदहाली दूर नहीं हो रही है। प्रशासन और संबंधित विभागों की खानापूर्ति के बीच जमीनी हकीकत यही बताती है कि सड़क सुधार की गति बेहद धीमी है और इसका खामियाजा केवल जनसाधारण को ही उठाना पड़ रहा है।
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दाड़ी मार्ग: दिखावे का पैच वर्क, बदहाली बरकरार
कोंच। कोंच से पहाड़गांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग जगह-जगह से उखड़ चुका है। ग्राम दाड़ी तक सड़क की हालत इतनी खराब है कि स्कूली बच्चों से लेकर राहगीर तक रोजाना परेशानियों का सामना कर रहे हैं। बीच-बीच में नाम भर का पैच वर्क जरूर हुआ है लेकिन इससे सड़क की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बरसात के दिनों में यही सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है। इलाकाई लोगों ने अधिकारियों से जल्द मरम्मत की मांग की है। (संवाद)
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ठेकेदार मरम्मत कार्य करा रहा है, कुछ हिस्से बच गए हैं जिन्हें जल्द ठीक करा दिया जाएगा। नंदकिशोर, एई
संदी-आटा मार्ग: हालत ऐसी कि 15 मिनट की दूरी आधा घंटा में तय होती
आटा। संदी-आटा मार्ग पर तीन किलोमीटर की दूरी गड्ढों के बीच से गुजरते हुए तय करनी पड़ रही है। चार साल पहले करीब 25 लाख रुपये खर्च कर कराई गई मरम्मत अब कहीं नजर नहीं आती। गहरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों को दोगुना समय लग रहा है। संदी, जोराखेरा, रिरुआ, बरदर, करमेर सहित लगभग 15 हजार की आबादी इसी मार्ग पर निर्भर है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण आए दिन फिसलने और वाहन खराब होने की घटनाएं होती हैं। संदी निवासी उदय नारायण तिवारी व संजय पटेल का कहना है कि पहले 15 मिनट की दूरी अब आधे घंटे में तय होती है। (संवाद)
जर्जर मार्गों के निर्माण की स्वीकृति शासन स्तर से मिल चुकी है, जल्द कार्य शुरू कराया जाएगा। अतुल पाल, जेई, पीडब्ल्यूडी
हदरुख मार्ग-गड्ढों ने जमाया कब्जा, लोग पुराने कच्चे रास्ते से जाने के लिए मजबूर
सिरसा कलार। सिरसाकलार-हदरुख मार्ग की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वाहन चालक इस रास्ते से गुजरने से कतराते हैं। पूरे मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। हाल यह है कि छह किलोमीटर की दूरी तय करने की बजाय लोग मजबूरन मदारीपुर होकर 11 किलोमीटर घूमकर हदरुख बाजार पहुंच रहे हैं। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। ग्रामीण विजय शुक्ला, कन्हैया शिवहरे सहित अन्य लोगों का कहना है कि 20 साल पहले भी इसी कच्चे रास्ते से जाना-आना पड़ता था, आज भी हालात नहीं बदले। सड़क बनी जरूर है लेकिन चलने लायक नहीं। (संवाद)
तीन किलोमीटर में सिर्फ गिट्टी और धूल
जालौन। कोंच रोड से सिकरीराजा होते हुए अम्मरगढ़ तक लगभग तीन किलोमीटर संपर्क मार्ग पूरी तरह टूट चुका है। सड़क का डामर उखड़कर गायब हो चुका है और सिर्फ गिट्टी व धूल बची है। बरसात में मार्ग कीचड़ में तब्दील हो जाता है। दोपहिया वाहन सवार अक्सर फिसलकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इसी रास्ते पर एक इंटर कॉलेज भी है, जहां रोज बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आते हैं। कई बच्चों के गिरकर चोटिल होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा लगाकर विरोध जताया था, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है।
वर्जन
सभी सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही सभी सड़कों को सही करा दिया जाएगा।-केके सिंह, सीडीओ