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गुरू के समक्ष चंचलता नहीं करनी चाहिए
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भागवत कथा का श्रवण करते भक्तगण।
- फोटो : ORAI
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जालौन। मोहल्ला खंडेराव में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को कथावाचक मिथलेश महाराज ने कहा कि मनुष्य से गलती होना बड़ी बात नहीं। पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित करना जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है।
उन्होंने बताया कि भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान करती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। गुरू की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा कि गुरू की महत्ता हमारे जीवन में अनुपम है।
गुरू के बिना हम जीवन का सार ही नहीं समझ सकते हैं। पर इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए कि गुरू के समक्ष चंचलता नहीं करनी चाहिए। सदा ही अल्पवासी होना चाहिए।
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जितनी आवश्यकता है उतना ही बोलें और जितना अधिक हो सके गुरू की वाणी का श्रवण करें। इस दौरान कथा यजमान मुन्नी देवी, शिवराम निरंजन, आकांक्षा, रचना, सोनम, गुडिय़ा, कंचन, रेखा, गायत्री, रंजना, छोटे राजा आदि मौजूद रहें।
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उन्होंने बताया कि भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान करती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। गुरू की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा कि गुरू की महत्ता हमारे जीवन में अनुपम है।
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गुरू के बिना हम जीवन का सार ही नहीं समझ सकते हैं। पर इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए कि गुरू के समक्ष चंचलता नहीं करनी चाहिए। सदा ही अल्पवासी होना चाहिए।
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जितनी आवश्यकता है उतना ही बोलें और जितना अधिक हो सके गुरू की वाणी का श्रवण करें। इस दौरान कथा यजमान मुन्नी देवी, शिवराम निरंजन, आकांक्षा, रचना, सोनम, गुडिय़ा, कंचन, रेखा, गायत्री, रंजना, छोटे राजा आदि मौजूद रहें।