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अब खुले में नहीं जाएंगे शौच
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sun, 06 Nov 2016 10:56 PM IST
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चौपाल में मौजूद ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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कुठौंद ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुरेपुरा कनार के मजरा घिलौआ को खुले में शौच मुक्त गांव बनाने की पहल की जा रही है। इसके लिए रविवार को गांव में जागरूकता चौपाल आयोजित की गई। इसमें ग्रामीणों ने शपथ ली कि वह शौचालय का इस्तेमाल करेंगे और बीमारियों से दूर रहेंगे। स्वच्छता अभियान के क्रम में गांव को खुले में शौच मुक्त कराने का प्रयास किया जा
रहा है। घिलौआ गांव में प्रधान ने सभी 65 घरों में शौचालय बनवाकर इसकी नींव रख दी थी। इसके बाद भी खुले में शौच की प्रथा बंद नहीं हो रही थी। इस पर जिला पंचायत राज अधिकारी मोहम्मद सरफराज आलम ने रविवार को गांव में चौपाल लगाई। इसमें ग्रामीणों को बताया कि खुले में शौच जाने से बीमारी फैलती है। इससे बचने के लिए घर में सरकार की ओर से बनवाए
गए शौचालयों का इस्तेमाल करें। इसके बाद गांव के लोगों ने मंदिर पर एकजुट होकर ग्राम प्रधान सुनीता गुप्ता के साथ खुले में शौच न जाने का संकल्प लिया। इसी के साथ अपने सगे संबधियों को भी बीमारी से बचने के लिए शौचालय के प्रयोग की नसीहत देने की भी बात कही। इस मौके पर सचिव एसके भदौरिया आदि मौजूद रहे।
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यह भी जानें:
-भारत में संपूर्ण स्वच्छता पर्यावरण का सृजन 2017 तक करने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें खुले में शौच को पूरी तरह त्यागना और मानव मल अपशिष्ट का सुरक्षित रूप से प्रबंधन का लक्ष्य है।
-उन्नत स्वच्छता प्रथाएं अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है जिसका लक्ष्य 2020 तक रखा गया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले सभी लोगों को, खास तौर पर बच्चों और परिजनों को सुरक्षित स्वच्छता प्रथाएं अपनाने पर जोर दिया जाना है।
-ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन का लक्ष्य 2022 तक निर्धारित किया गया है। इसमें ठोस व तरल अपशिष्ट का प्रभावी प्रबंधन इस प्रकार करना कि गांव का परिवेश हर समय स्वच्छ बना रहे।
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रहा है। घिलौआ गांव में प्रधान ने सभी 65 घरों में शौचालय बनवाकर इसकी नींव रख दी थी। इसके बाद भी खुले में शौच की प्रथा बंद नहीं हो रही थी। इस पर जिला पंचायत राज अधिकारी मोहम्मद सरफराज आलम ने रविवार को गांव में चौपाल लगाई। इसमें ग्रामीणों को बताया कि खुले में शौच जाने से बीमारी फैलती है। इससे बचने के लिए घर में सरकार की ओर से बनवाए
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गए शौचालयों का इस्तेमाल करें। इसके बाद गांव के लोगों ने मंदिर पर एकजुट होकर ग्राम प्रधान सुनीता गुप्ता के साथ खुले में शौच न जाने का संकल्प लिया। इसी के साथ अपने सगे संबधियों को भी बीमारी से बचने के लिए शौचालय के प्रयोग की नसीहत देने की भी बात कही। इस मौके पर सचिव एसके भदौरिया आदि मौजूद रहे।
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-भारत में संपूर्ण स्वच्छता पर्यावरण का सृजन 2017 तक करने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें खुले में शौच को पूरी तरह त्यागना और मानव मल अपशिष्ट का सुरक्षित रूप से प्रबंधन का लक्ष्य है।
-उन्नत स्वच्छता प्रथाएं अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है जिसका लक्ष्य 2020 तक रखा गया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले सभी लोगों को, खास तौर पर बच्चों और परिजनों को सुरक्षित स्वच्छता प्रथाएं अपनाने पर जोर दिया जाना है।
-ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन का लक्ष्य 2022 तक निर्धारित किया गया है। इसमें ठोस व तरल अपशिष्ट का प्रभावी प्रबंधन इस प्रकार करना कि गांव का परिवेश हर समय स्वच्छ बना रहे।