फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   Narendra Modi, religion, caste or sect, but the leader of the country

नरेंद्र मोदी किसी धर्म, जाति या संप्रदाय के नहीं बल्कि पूरे देश के नेता

Sat, 18 Feb 2017 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Sat, 18 Feb 2017 11:04 PM IST
विज्ञापन
Narendra Modi, religion, caste or sect, but the leader of the country
जानकारी देते हाजी के पौत्र रफीक। - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री की सभा के लिए अपनी जमीन देने वाले हाजी वशीर के पौत्र रफीक का कहना है कि उनके मरहूम दादा ने कभी भी किसी से एक रुपये की उम्मीद नहीं की। उनका पूरा परिवार सामाजिक सेवा के लिए हमेशा खड़ा रहा है। फिर वो मदरसे में बच्चों की पढ़ाई हो या फिर मंदिरों में देने वाला दान ही क्यों न हो। उनका परिवार गरीबों को खाना, कपड़ा देने से भी पीछे
विज्ञापन


नहीं हटता है। दादा कहते थे कि अल्लाह देख रहा है, अल्लाह ही देगा। बस उनकी यही बात हमारे कुनबे ने गांठ बांध ली। बता दें कि 20 फरवरी को प्रधानमंत्री की जनसभा कोंच रोड स्थित हाजी वशीर की जमीन (जामिया फारुकिया वशीरुल उलूम) पर आयोजित हो रही है। हाजी के पौत्र रफीक ने बताया कि शहर के प्रेम नगर में दो मकान हैं। वे अपने दोनों भाई हनीफ व
विज्ञापन


याकूब के साथ मिलकर किराने का थोक व्यापार करते हैं। अल्लाह की मेहरबानी से दौलत, शोहरत सब कुछ है। जब भी, जो भी और जहां भी, बन पड़ता है, वे और उनका परिवार नेक काम
विज्ञापन
विज्ञापन


में अपना हाथ लगा देते हैं। रफीक के मुताबिक प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए जमीन देने में उन्होंने कोई शुल्क नहीं लिया है। उनके इस फैसले को नाते-रिश्तेदारों और बिरादरी के लोगों ने भी सराहा है। शनिवार को पूरे दिन दूर-दूर से उनके पास रिश्तेदारों के फोन आते रहे। प्रधानमंत्री मोदी किसी एक धर्म, जाति व संप्रदाय के नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के हैं।  

32 साल पहले शुरू किया था मदरसा
रफीक के मुताबिक उनकेे बाबा हाजी वशीर ने सन् 1985 में 50 बीघे की इस जमीन से लगे मदरसे की शुरुआत की थी। यहां आज चार अध्यापक 80 बच्चों को हिंदी और उर्दू की तालीम दे रहे हैं। उनकी तमन्ना है कि इस मदरसे को और तरक्की के रास्ते पर ले जाएं। साथ ही, इस बात का अफसोस है कि मदरसे को आगे बढ़ाने के लिए कोई सरकारी इमदाद नहीं मिलती।

पीएम को आना था, सो नहीं हुई खेती
रफीक का कहना है कि वैसे तो हर साल वे अपनी इस जमीन को किसी को खेेती (बटाई) के लिए दे दिया करते थे। पिछली बार बटाईदार ने कुछ नुकसान कर दिया या फिर ये मान लें कि प्रधानमंत्री के कदम इस जमीन पर पड़ने थे, सो खेती की कोई योजना ही नहीं बन पाई। इसमें अल्लाह की भी मर्जी रही होगी। तभी तो वजीर-ए-आला जनपद में पहली बार उनकी जमीन पर आ रहे हैं।

जिस दल से दिल मिला, उसी को वोट
रफीक का कहना है कि उनके परिवार ने कभी किसी धर्म, संप्रदाय की राजनीति नहीं की। जिससे दिल मिला, उसी दल के उम्मीदवार को वोट भी दिया। बीते लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी घनश्याम अनुरागी को लड़ाया था, इससे पहले भाजपा के बाबूराम एमकाम को विधायकी और नगर पालिका में काशी कोरी(भाजपा) को भी सपोर्ट किया था।


मोदी के कानों में भी पड़ सकती है अजान
बताते चलें कि मदरसे में मस्जिद भी है और पांच टाइम की अजान भी होती है। फिलहाल मोदी के आने और जाने का कोई समयबद्ध कार्यक्रम आया नहीं है। यदि कोई समय अजान के बीच का रहा है तो सभा के बीच में प्रधानमंत्री मोदी को भी अजान सुननी पड़ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed