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बिजली चोर मस्त, उपभोक्ता त्रस्त
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Mon, 04 Jan 2016 11:21 PM IST
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पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने भले ही बुंदेलखंड में चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति
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की घोषणा कर दी पर उनकी इस घोषणा को बिजली चोर पलीता लगाने में जुटे हैं।
बिजली चोरी के चलते गांवों में ट्रांसफार्मरों और तारों पर पर अतिरिक्त भार
पड़ रहा है। इससे आएदिन फाल्ट होते हैं। इनको ठीक करने में कभी कभी पूरा
दिन लग जाता है। ऐसे में मुख्यमंत्री की घोषणा के
अनुसार बिजली आपूर्ति सुधरने के आसार दिख नहीं रहे। गौरतलब है कि अपनी लचर कार्यशैली के लिए बदनाम विद्युत विभाग अपनी कारस्तानियों के चलते मुख्यमंत्री की बुंदेलखंड को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की घोषणा को पूरा करने में सक्षम नहीं दिख रहा है। इसके पीछ बड़ा कारण ये है कि जिले में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी की जा रही है। कुछ मामलों में खुद
विभाग के कर्मचारी ही चोरी कराते हैं। ये खुद ही महीने का कुछ पैसा लेकर कटिया से बिजली जलवाते हैं। इन हालातों के कारण पूरी आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित है। तार और ट्रंासफार्मर लोड नहीं उठा पा रहे हैं और आएदिन तारों के टूटने व
ट्रांसफार्मरों के जलने का सिलसिला जारी है। वहीं विभागीय कार्रवाई पर नजर डालें तो पाते हैं कि आठ माह में विभाग ने पूरे जनपद में केवल चार सौ बिजली चोरी के मामले ही पकड़े हैं। उधर सूत्र बताते हैं जिले में करीब 50 हजार घरों में चोरी से बिजली जल रही है।
विभागीय आंकड़े तो ये कह रहे
बीते वर्ष एक अप्रैल से 30 नवंबर तक उरई में 1450 और ग्रामीण क्षेत्रों में 1973 जगहों पर चेकिंग की गई। इनमें उरई में मात्र 215 और ग्रामीण क्षेत्रों में 275 लोग बिजली चोरी करते पाए गए। इस तरह कुल 359 लोग पकड़े गए। इनमें से 309 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। 50 लोगों से शमन शुल्क के रूप में तीन लाख 54 हजार रुपया वसूला गया। नए
कनेक्शन लेने वालों की संख्या ज्यादा रही। कुल 28778 लोगों ने नया कनेक्शन लिया। आठ माह में इतने कम बिजली चोरी के मामले प्रकाश में आना गंभीर विषय है। यह स्थिति तब है जब हर माह जिले में करोड़ों रुपये की बिजली चोरी हो
रही है और इसे रोकने व राजस्व वसूली बढ़ाने के लिए विभाग पर दबाव भी है। इसके बावजूद भी विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं आ रहा है। कार्रवाई के नाम पर चंद दिनों का अभियान चलाकर औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती हैं। इस बारे में अधीक्षण अभियंता एसएस प्रसद ने कहा कि बिजली चोरी रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
जरूरत से कम मिल रही बिजली
जिले में इस वक्त करीब चार करोड़ यूनिट बिजली की मांग है। इसके सापेक्ष दो करोड़ यूनिट बिजली ही मिल पा रही है। वहीं करीब 50 लाख यूनिट की बिजली चोरी हो रही है। इस तरह विभाग को हर महीने करीब ढाई करोड़ रुपये की बिजली चोरी हो रही है यानि 25 से 30 प्रतिशत का राजस्व नुकसान नुकसान हो रहा है।
चोरी थमे तो सुधरें हालात
भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो अगर जिले में बिजली चोरी पर लगाम लग जाए तो काफी हद तक स्थिति में सुधार आ सकता है। इसके लिए लोगों को भी जागरूक करना होगा कि वे वैध कनेक्शन लेकर ही बिजली का उपयोग करें। चोरी से या
लाइनमैन जैसे कर्मचारी को कुछ पैसा देकर बिजली चोरी करने वाले लोग नहीं जानते उनके इस काम से कितनों पर असर पड़ता है। कई कटिया से लाइन ओवरलोड होती है और फाल्ट आ जाता है। कई बार ट्रांसफार्मर तक फुंक जाता है। ऐसे में न केवल वैध उपभोक्ता बल्कि स्वयं बिजली चोर भी बिना बिजली रहने को विवश होते हैं।
अनुसार बिजली आपूर्ति सुधरने के आसार दिख नहीं रहे। गौरतलब है कि अपनी लचर कार्यशैली के लिए बदनाम विद्युत विभाग अपनी कारस्तानियों के चलते मुख्यमंत्री की बुंदेलखंड को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की घोषणा को पूरा करने में सक्षम नहीं दिख रहा है। इसके पीछ बड़ा कारण ये है कि जिले में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी की जा रही है। कुछ मामलों में खुद
विभाग के कर्मचारी ही चोरी कराते हैं। ये खुद ही महीने का कुछ पैसा लेकर कटिया से बिजली जलवाते हैं। इन हालातों के कारण पूरी आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित है। तार और ट्रंासफार्मर लोड नहीं उठा पा रहे हैं और आएदिन तारों के टूटने व
ट्रांसफार्मरों के जलने का सिलसिला जारी है। वहीं विभागीय कार्रवाई पर नजर डालें तो पाते हैं कि आठ माह में विभाग ने पूरे जनपद में केवल चार सौ बिजली चोरी के मामले ही पकड़े हैं। उधर सूत्र बताते हैं जिले में करीब 50 हजार घरों में चोरी से बिजली जल रही है।
विभागीय आंकड़े तो ये कह रहे
बीते वर्ष एक अप्रैल से 30 नवंबर तक उरई में 1450 और ग्रामीण क्षेत्रों में 1973 जगहों पर चेकिंग की गई। इनमें उरई में मात्र 215 और ग्रामीण क्षेत्रों में 275 लोग बिजली चोरी करते पाए गए। इस तरह कुल 359 लोग पकड़े गए। इनमें से 309 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। 50 लोगों से शमन शुल्क के रूप में तीन लाख 54 हजार रुपया वसूला गया। नए
कनेक्शन लेने वालों की संख्या ज्यादा रही। कुल 28778 लोगों ने नया कनेक्शन लिया। आठ माह में इतने कम बिजली चोरी के मामले प्रकाश में आना गंभीर विषय है। यह स्थिति तब है जब हर माह जिले में करोड़ों रुपये की बिजली चोरी हो
रही है और इसे रोकने व राजस्व वसूली बढ़ाने के लिए विभाग पर दबाव भी है। इसके बावजूद भी विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं आ रहा है। कार्रवाई के नाम पर चंद दिनों का अभियान चलाकर औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती हैं। इस बारे में अधीक्षण अभियंता एसएस प्रसद ने कहा कि बिजली चोरी रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
जरूरत से कम मिल रही बिजली
जिले में इस वक्त करीब चार करोड़ यूनिट बिजली की मांग है। इसके सापेक्ष दो करोड़ यूनिट बिजली ही मिल पा रही है। वहीं करीब 50 लाख यूनिट की बिजली चोरी हो रही है। इस तरह विभाग को हर महीने करीब ढाई करोड़ रुपये की बिजली चोरी हो रही है यानि 25 से 30 प्रतिशत का राजस्व नुकसान नुकसान हो रहा है।
चोरी थमे तो सुधरें हालात
भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो अगर जिले में बिजली चोरी पर लगाम लग जाए तो काफी हद तक स्थिति में सुधार आ सकता है। इसके लिए लोगों को भी जागरूक करना होगा कि वे वैध कनेक्शन लेकर ही बिजली का उपयोग करें। चोरी से या
लाइनमैन जैसे कर्मचारी को कुछ पैसा देकर बिजली चोरी करने वाले लोग नहीं जानते उनके इस काम से कितनों पर असर पड़ता है। कई कटिया से लाइन ओवरलोड होती है और फाल्ट आ जाता है। कई बार ट्रांसफार्मर तक फुंक जाता है। ऐसे में न केवल वैध उपभोक्ता बल्कि स्वयं बिजली चोर भी बिना बिजली रहने को विवश होते हैं।