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Jalaun News: मशीनें जा रहीं बाहर, अफसर कह रहे फैक्टरी चालू है
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उरई। हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड की स्थानीय फैक्टरी के बंद होने की सुगबुगाहट से 500 ठेका कर्मचारी और उनके परिवार परेशान हैं। कर्मचारी कह रहे हैं कि 10 दिन से फैक्टरी में कोई काम नहीं हुआ है। मशीनें भी बाहर जा रही हैं। वहीं, प्रबंधन का कहना है फैक्टरी चालू है।
यहां कर्मचारी रहे मनोज विश्वारी, शिवप्रताप, भरत ने बताया कि फैक्टरी के बंद होने की जानकारी उन्हें प्रबंधन ने दी और उनका हिसाब भी कर दिया गया। तमाम कर्मचारियों को महाराष्ट्र जाने की विकल्प दिया गया है, लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया। वहीं, कुछ कर्मचारियों को हमीरपुर के भरुआ सुमेरपुर की फैक्टरी में स्थानांतरित कर दिया गया है।
ऐसे में ठेका प्रथा पर काम करने वाले कर्मचारी सकते में हैं। उनके सामने जीवन चलाने का संकट है। अब उनके घर में राशन-पानी कैसे आएगा। बच्चों की फीस कहां से जमा होगी। हालत यह है कि इनकी गंभीर समस्या को लेकर न तो कोई जन प्रतिनिधि और न ही राजनीतिक दल उनकी समस्या को उठाने के लिए सामने आया है। कर्मचारियों की दो यूनियन हैं, लेकिन इन परिवारों को लेकर कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है।
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प्रतिदिन सौ टन माल होता था तैयार, प्रदेश भर में होती थी सप्लाई
शहर के कालपी रोड स्थित हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड को स्थापित करने के लिए सरकार की ओर से 55 एकड़ भूमि दी गई थी। वर्ष 1990 में इस औद्योगिक क्षेत्र उरई में लगभग दो विभिन्न फैक्टरियां थीं। इसमें हिंदुस्तान यूनीलीवर मुख्य मानी जाती थी। इसमें करीब 700 कर्मचारी काम करते थे। इसमें 215 नियमित व पांच सौ ठेका कर्मचारी काम करते थे। यहां प्रतिदिन सौ टन माल तैयार किया जाता था। इसमें लाइफबॉय, लक्स, ब्रीज साबुन तैयार होते थे। इनकी सप्लाई पूरी यूपी में की जाती थी।
इनसेट
प्रोडक्शन का नया प्लान आने के बाद हुआ था यूनियन और प्रबंधन में टकराव
वर्ष 2017-18 में प्रोडक्शन का नया प्लान उरई के लिए स्वीकृत होकर आया तो इसके बाद प्रबंधन और यूनियन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। इससे इस प्लांट को हमीरपुर जिले के औद्योगिक क्षेत्र में शिफ्ट कर दिया गया था। वहां पर शैंपू व अन्य साबुन तैयार हो रहे हैं।
हमारी फैक्ट्री बंद नहीं हुई है। जो भी आपको जानकारी दे रहा है, वह भ्रामक है। अभी भी कंपनी में कर्मचारी काम कर रहे हैं।
- उत्पल आनंद, एचआर हेड, हिंदुस्तान यूनीलीवर, उरई
वर्जन
हिंदुस्तान यूनीलीवर फैक्टरी के बंद होने की मौखिक जानकारी है, लेकिन अभी तक लिखित रूप कुछ नहीं बताया गया है। अगर कोई जानकारी मिलती, तो साझा की जाएगी।
- प्रभात यादव, उपायुक्त उद्योग विभाग
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यहां कर्मचारी रहे मनोज विश्वारी, शिवप्रताप, भरत ने बताया कि फैक्टरी के बंद होने की जानकारी उन्हें प्रबंधन ने दी और उनका हिसाब भी कर दिया गया। तमाम कर्मचारियों को महाराष्ट्र जाने की विकल्प दिया गया है, लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया। वहीं, कुछ कर्मचारियों को हमीरपुर के भरुआ सुमेरपुर की फैक्टरी में स्थानांतरित कर दिया गया है।
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ऐसे में ठेका प्रथा पर काम करने वाले कर्मचारी सकते में हैं। उनके सामने जीवन चलाने का संकट है। अब उनके घर में राशन-पानी कैसे आएगा। बच्चों की फीस कहां से जमा होगी। हालत यह है कि इनकी गंभीर समस्या को लेकर न तो कोई जन प्रतिनिधि और न ही राजनीतिक दल उनकी समस्या को उठाने के लिए सामने आया है। कर्मचारियों की दो यूनियन हैं, लेकिन इन परिवारों को लेकर कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है।
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प्रतिदिन सौ टन माल होता था तैयार, प्रदेश भर में होती थी सप्लाई
शहर के कालपी रोड स्थित हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड को स्थापित करने के लिए सरकार की ओर से 55 एकड़ भूमि दी गई थी। वर्ष 1990 में इस औद्योगिक क्षेत्र उरई में लगभग दो विभिन्न फैक्टरियां थीं। इसमें हिंदुस्तान यूनीलीवर मुख्य मानी जाती थी। इसमें करीब 700 कर्मचारी काम करते थे। इसमें 215 नियमित व पांच सौ ठेका कर्मचारी काम करते थे। यहां प्रतिदिन सौ टन माल तैयार किया जाता था। इसमें लाइफबॉय, लक्स, ब्रीज साबुन तैयार होते थे। इनकी सप्लाई पूरी यूपी में की जाती थी।
इनसेट
प्रोडक्शन का नया प्लान आने के बाद हुआ था यूनियन और प्रबंधन में टकराव
वर्ष 2017-18 में प्रोडक्शन का नया प्लान उरई के लिए स्वीकृत होकर आया तो इसके बाद प्रबंधन और यूनियन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। इससे इस प्लांट को हमीरपुर जिले के औद्योगिक क्षेत्र में शिफ्ट कर दिया गया था। वहां पर शैंपू व अन्य साबुन तैयार हो रहे हैं।
हमारी फैक्ट्री बंद नहीं हुई है। जो भी आपको जानकारी दे रहा है, वह भ्रामक है। अभी भी कंपनी में कर्मचारी काम कर रहे हैं।
- उत्पल आनंद, एचआर हेड, हिंदुस्तान यूनीलीवर, उरई
वर्जन
हिंदुस्तान यूनीलीवर फैक्टरी के बंद होने की मौखिक जानकारी है, लेकिन अभी तक लिखित रूप कुछ नहीं बताया गया है। अगर कोई जानकारी मिलती, तो साझा की जाएगी।
- प्रभात यादव, उपायुक्त उद्योग विभाग