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लिवर-किडनी की जांच मशीनें 15 दिनों से खराब, अल्ट्रासाउंड भी नहीं होता

Mon, 11 Jul 2022 11:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jul 2022 11:42 PM IST
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Liver-kidney test machines deteriorated for 15 days, even ultrasound is not done
बंद अल्ट्रासाव्ंड कक्ष और इंतजार करतीं महिलाएं। - फोटो : ORAI
उरई। जिला महिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतर गईं हैं। रविवार को दो प्रसूताओं की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा हो गया था। परिजनों ने वहां के प्रशासन, डॉक्टर और स्टाफ पर कई आरोप लगाए गए थे, जो कई सवाल खड़े करता है। सोमवार को महिला अस्पताल की पड़ताल करने पर वहां पर कई अव्यवस्थाएं सामने आईं। एलएफटी तथा केएफटी की मशीन पिछले 15 दिनों से खराब है। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए सुबह 11 बजे तक इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा पैथोलॉजी में भी गिनी चुनी जांचें होती हैं। इसके चलते गरीब मरीजों को निजी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर आठ सौ रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
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महिला अस्पताल पर जिले की आधी आबादी की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। दूरदराज क्षेत्रों से महिलाएं इलाज कराने आतीं हैं पर उन्हें कई असुविधाओं को सामना करना पड़ता है। कई बार यहां तैनात स्टाफ की कार्यशैली के चलते वे बिना इलाज के ही लौट जातीं हैं। महिला अस्पताल में बनाया गया अल्ट्रासाउंड कक्ष 11 बजे तक खुलता है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। मोहल्ला इंद्रानगर निवासी अभिलाषा ने बताया कि वह अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पिछले दो घंटे से लाइन में लगे हैं।
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अस्पताल की सीएमएस एएन वर्मा का कहना है कि संसाधनों की कमी के कारण अस्पताल में कुछ समस्याएं हैं। जिनके निदान का प्रयास किया जा रहा है। मरीजों से किसी प्रकार का पैसा न लेने का निर्देश सभी चिकित्सक व कर्मियों को दिया गया है। अगर किसी के साथ दुर्व्यवहार होता है तो वह इसकी शिकायत मुझसे कर सकता है।
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लिखी जा रहीं बाहर की दवाएं
जिला महिला अस्पताल आने वाले मरीजों को यहां तैनात चिकित्सक बाहर की दवा खरीदने को मजबूर करते हैं। अस्पताल के अंदर पैथालॉजी भी संचालित है। अस्पताल की पैथालॉजी में गिनी-चुनी ही जांचें हो रहीं हैं। एलएफटी तथा केएफटी की मशीन पिछले 15 दिनों से खराब है। मरीजों को 500 रुपये तक देकर बाहर से जांच करवानी पड़ रही है। इमिलिया निवासी सौरभ ने बताया कि वह पत्नी को लेकर आए हैं उन्हें अस्पताल के अंदर जो दवा मिली है उसके बारे में डॉक्टर ने खुद बताया है कि कुछ दवाई बाहर से लें। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार 240 प्रकार की दवाएं उपलब्ध है।

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सुविधा शुल्क के बिना काम नहीं
मरीजों के तीमारदारों ने आरोप लगाया कि स्टाफ बिना सुविधा शुल्क के काम करने को तैयार नहीं होता है। कुठौंद क्षेत्र के मुहम्मदपुर गांव निवासी संजीव कुमार ने बताया कि वह पत्नी को लेकर उरई आया था। भर्ती करने के बाद नर्स ने बताया कि बच्चा फंसा हुआ है, इसके बाद उससे पांच हजार रुपये की मांग की गई, रुपयों की मांग पूरी कर दी गई तो प्रसव आसानी से हो गया।
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