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झूले पर कान्हा की झांकी, गूंजा जय कन्हैया लाल की
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बंबई वाले मंदिर की झांकी
- फोटो : ORAI
जालौन। नगर के मंदिरों में झूला महोत्सव की धूम मची है। सावन तीज से लेकर पूर्णिमा तक चलने वाले इस परंपरागत उत्सव की छटा देखते ही बनती है। धार्मिक आस्था से जुडे़ इस झूला महोत्सव को देखने के लिये श्रद्धालु शाम ढलते ही मंदिरों पर पहुंचकर सोशल डिस्टेंस के साथ भगवान की झांकी का दर्शन कर भक्ति संगीत में सराबोर हो रहे हैं।
द्वारिकाधीश मंदिर पर भगवान कृष्ण एक ओर झूला झूल रहे हैं। वहीं मंदिर के व्यवस्थापक सेठ द्वारिकादास महेश्वरी श्रृंगार कर कन्हैया के प्रति श्रद्धा प्रकट कर रहे हैं। क्षेत्रीय कलाकार शंकर सिंह, आनंद पुरवार, रामरूप वर्मा के संयुक्त प्रयास से झूला गीतों की धूम मची है। इसी क्रम में बंबई वाले मंदिर पर राजेंद्र अग्रवाल के प्रयास से खासी सजावट देखी जा रही है। पीयूषदास महंत के संचालन में मुरली मनोहर मंदिर पर भी झूला महोत्सव चल रहा है। मोहल्ला चौधरयाना में महंत बादलजी महाराज स्वयं भगवान के झूले को झुलाकर आनंदित हो रहे हैं।
मंदिर का है ऐतिहासिक महत्व
मंदिरों का शहर जालौन इसी विशेषता के चलते उत्तर भारत में छोटा वृंदावन के नाम से प्रसिद्ध है। मध्यकाल के दौरान स्थापित इन मंदिरों की स्थापत्य कला आज भी अद्वितीय मानी गयी है। राजा रजवाड़े और सेठ साहूकारों ने इन मंदिरों के अनवरत संचालन के लिए जमीन, जायदाद, भूमि व भवन का दान दिया। जिसमें मंदिर अपनी भव्यता एवं पहचान बनाए हुए है।
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द्वारिकाधीश मंदिर पर भगवान कृष्ण एक ओर झूला झूल रहे हैं। वहीं मंदिर के व्यवस्थापक सेठ द्वारिकादास महेश्वरी श्रृंगार कर कन्हैया के प्रति श्रद्धा प्रकट कर रहे हैं। क्षेत्रीय कलाकार शंकर सिंह, आनंद पुरवार, रामरूप वर्मा के संयुक्त प्रयास से झूला गीतों की धूम मची है। इसी क्रम में बंबई वाले मंदिर पर राजेंद्र अग्रवाल के प्रयास से खासी सजावट देखी जा रही है। पीयूषदास महंत के संचालन में मुरली मनोहर मंदिर पर भी झूला महोत्सव चल रहा है। मोहल्ला चौधरयाना में महंत बादलजी महाराज स्वयं भगवान के झूले को झुलाकर आनंदित हो रहे हैं।
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मंदिर का है ऐतिहासिक महत्व
मंदिरों का शहर जालौन इसी विशेषता के चलते उत्तर भारत में छोटा वृंदावन के नाम से प्रसिद्ध है। मध्यकाल के दौरान स्थापित इन मंदिरों की स्थापत्य कला आज भी अद्वितीय मानी गयी है। राजा रजवाड़े और सेठ साहूकारों ने इन मंदिरों के अनवरत संचालन के लिए जमीन, जायदाद, भूमि व भवन का दान दिया। जिसमें मंदिर अपनी भव्यता एवं पहचान बनाए हुए है।
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