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खेतों में अन्ना मवेशी, किसानों की उड़ी नींद
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बड़ागांव क्षेत्र में खेतों में घुसे मवेशियों को खदेड़ते किसान।
- फोटो : ORAI
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मुहम्मदाबाद। पशुओं के लिए गोशालाओं में इंतजाम ठीक नहीं हैं। इससे पशु छुट्टा घूम रहे हैं और किसान अन्ना पशुओं की समस्या से जूझ रहे हैं। पशुओं के बड़े-बड़े झुंड किसानों की फसलें चर और रौंद रहे हैं। रोकथाम न होने से किसान खासे मायूस हैं।
अन्ना पशु सबसे ज्यादा चिल्ली, बड़ागांव, बिरगुवा, भुआ, कैथैरी, कुसमिलिया, कुठौंदा, मुहम्मदाबाद, ऐरी, रमपुरा समेत कई गांवों में किसानों की फसलों पर कहर बरपा रहे हैं। इनके विचरण से मटर, चना, मसूर की फसलें बर्बाद हो रहीं हैं। किसान बबलू, गोविंदास, नन्हे राजा, प्रहलाद आदि का कहना है पिछले एक दशक से अन्ना जानवर किसानों के लिए नासूर बने हैं। जिले के अधिकतर गांवों में गोशालाएं हैं, फिर भी यहां पशु नहीं रुकते।
किसानों ने डीएम प्रियंका निरंजन से मांग की है गोशालाओं के रखरखाव, खानेपीने एवं पशुओं के रहने आदि की व्यवस्थाओं के लिए पशुपालन विभाग को कड़े निर्देश दिए जाएं। बड़ागांव के किसान चंद्रमोहन निरंजन का कहना है कि अन्ना पशुओं से फसल बचाने के लिए सर्द रातों में भी खेतों पर डेरा डालना पड़ रहा है।
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किसान बोले
चिल्ली गांव के किसान बबलू का कहना है बड़ी मुश्किल से खाद मिली थी, महंगे दामों पर मटर का बीज भी खरीदकर खेत में फसल लगाई थी। अन्ना पशुओं से अब फसल बचा पाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
कुसमिलिया के किसान धर्मपाल का कहना है पशुपालन विभाग अन्ना पशुओं की रोकथाम पर ध्यान नहीं दे रहा है। इससे अन्ना पशुओं की समस्या और भी जटिल होती जा रहीं हैं। किसान खेतों में घुस रहे जानवरों को हांकने में रात-दिन एक कर रहे हैं।
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अन्ना पशु सबसे ज्यादा चिल्ली, बड़ागांव, बिरगुवा, भुआ, कैथैरी, कुसमिलिया, कुठौंदा, मुहम्मदाबाद, ऐरी, रमपुरा समेत कई गांवों में किसानों की फसलों पर कहर बरपा रहे हैं। इनके विचरण से मटर, चना, मसूर की फसलें बर्बाद हो रहीं हैं। किसान बबलू, गोविंदास, नन्हे राजा, प्रहलाद आदि का कहना है पिछले एक दशक से अन्ना जानवर किसानों के लिए नासूर बने हैं। जिले के अधिकतर गांवों में गोशालाएं हैं, फिर भी यहां पशु नहीं रुकते।
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किसानों ने डीएम प्रियंका निरंजन से मांग की है गोशालाओं के रखरखाव, खानेपीने एवं पशुओं के रहने आदि की व्यवस्थाओं के लिए पशुपालन विभाग को कड़े निर्देश दिए जाएं। बड़ागांव के किसान चंद्रमोहन निरंजन का कहना है कि अन्ना पशुओं से फसल बचाने के लिए सर्द रातों में भी खेतों पर डेरा डालना पड़ रहा है।
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किसान बोले
चिल्ली गांव के किसान बबलू का कहना है बड़ी मुश्किल से खाद मिली थी, महंगे दामों पर मटर का बीज भी खरीदकर खेत में फसल लगाई थी। अन्ना पशुओं से अब फसल बचा पाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
कुसमिलिया के किसान धर्मपाल का कहना है पशुपालन विभाग अन्ना पशुओं की रोकथाम पर ध्यान नहीं दे रहा है। इससे अन्ना पशुओं की समस्या और भी जटिल होती जा रहीं हैं। किसान खेतों में घुस रहे जानवरों को हांकने में रात-दिन एक कर रहे हैं।