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Jalaun News: कैसें होंगे स्मार्ट विद्यालय, जहां दुरुस्त नहीं शौचालय
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उरई। स्मार्ट विद्यालयों की सौगात देने का दम भर रही सरकार के प्राइमरी विद्यालयों में शौचालय तक ठीक हालत में नहीं हैं।
कहीं सीट टूटी है तो कहीं दरवाजा गायब है। विद्यालयों में शौचालय जर्जर हालत में हैं। कुछ विद्यालयों में छात्र व छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय नहीं है। इससे छात्राओं को असुविधा होती है। जहां एक शौचालय को छात्राओं के लिए निर्धारित कर दिया तो वहां छात्र खुले में जाने को विवश हो जाते हैं। अलग-अलग प्राइमरी पाठशालाओं में जब पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आई।
विद्यालयों की सूरत बदलने के लिए कायाकल्प योजना है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इस योजना के तहत जिले के लगभग सभी 1500 के करीब विद्यालय बेहतर स्थिति में हैं। उनके शौचालय ठीक हैं। दो महीने पहले 15 से 20 शौचालयों के लिए 40 से 50 लाख रुपये आए थे, उसके तहत भी काम चल रहा है। दिसंबर अंतिम सप्ताह तक उसे पूरा किए जाने का प्रयास है। जब स्थिति को ग्राउंड पर जाकर देखा, तो सच्चाई कुछ और सामने आई।
प्राइमरी पाठशाला में कई बच्चे शौच और लघुशंका के लिए खुले में जा रहे थे। वजह, शौचालय अधूरे और सुविधा न होना।
मानिक चौक के पास नगर पालिका के एक भवन में संचालित प्राथमिक विद्यालय गांधी, प्राथमिक विद्यालय गांधी चौक व प्राथमिक विद्यालय सरोजनी नायडू में 90 छात्र और 43 छात्राएं पंजीकृत हैं। इसमें शौचालय ही नहीं है। शौच के लिए बच्चों को नगर पालिका के सार्वजनिक विद्यालय जाना पड़ता है। यही हाल दूसरे भवन में चल रहे प्राथमिक विद्यालय का भी था।
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आटा के प्राथमिक विद्यालय में सात माह पहले एक शौचालय का निर्माण हुआ, लेकिन अब तक दरवाजा नहीं लगा। इसमें 173 बच्चें पंजीकृत हैं। 80 छात्र और 93 छात्राएं, जिन्हें असुविधा होती है। प्राथमिक विद्यालय भदरेखी में 103 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां 48 बालक और 55 बालिकाएं हैं। शौचालय के लिंटर में दरारें हैं, टाइल्स नहीं लगे, इतना जर्जर कि गिरने के डर से कई विद्यार्थी जाने से घबराते हैं।
प्राथमिक स्कूल जर्जर है। विद्यालय में 56 बालक और 63 बालिकाएं हैं। यहां शौचालय में सीट भी दुरुस्त नहीं थी और शौचालय का दरवाजा नीचे से टूटा था। इस वजह से छात्राओं को उसके प्रयोग में असुविधा होती दिखी। एक ही शौचालय है, जबकि दूसरा शौचालय दिव्यांगों के लिए आरक्षित है। इस वजह से भी विद्यार्थियों को दिक्कत होती है।
कस्बा के प्राथमिक विद्यालय बम्हौरी में बालिका शौचालय का निर्माण 2004 में हुआ था। विद्यालय में 45 छात्राएं और 30 छात्र हैं। कोई दूसरा शौचालय नहीं है। बालकों को बाहर जाने के लिए विवश होना पड़ता है तो कई बार छात्राओं और महिला स्टाफ को भी असुविधा होती है। शौचालय की दीवारों में भी दरारें हैं।
प्राथमिक विद्यालय राम चबूतरा में स्कूल चल रहा था। दोपहर एक बजकर पांच मिनट का वक्त था, जब वहां के शौचालय पर ताला लटका देखा गया। शौच और पेशाब के लिए विद्यार्थी स्कूल के बाहर जा रहे थे। दो शौचालय होने के बावजूद यह समस्या विद्यालय में थी।
जिले में कुछ विद्यालयों के शौचालय निर्माण व मरम्मत का काम चल रहा है। दरवाजे टूटे होने और उनके जर्जर हालत में होने की स्थिति को जांचने के लिए सर्वे रिपोर्ट मांगी गई है। जहां-जहां ये समस्याएं हैं, दुरुस्त कराई जाएंगी। -चंद्र प्रकाश, बीएसए
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कहीं सीट टूटी है तो कहीं दरवाजा गायब है। विद्यालयों में शौचालय जर्जर हालत में हैं। कुछ विद्यालयों में छात्र व छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय नहीं है। इससे छात्राओं को असुविधा होती है। जहां एक शौचालय को छात्राओं के लिए निर्धारित कर दिया तो वहां छात्र खुले में जाने को विवश हो जाते हैं। अलग-अलग प्राइमरी पाठशालाओं में जब पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आई।
विद्यालयों की सूरत बदलने के लिए कायाकल्प योजना है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इस योजना के तहत जिले के लगभग सभी 1500 के करीब विद्यालय बेहतर स्थिति में हैं। उनके शौचालय ठीक हैं। दो महीने पहले 15 से 20 शौचालयों के लिए 40 से 50 लाख रुपये आए थे, उसके तहत भी काम चल रहा है। दिसंबर अंतिम सप्ताह तक उसे पूरा किए जाने का प्रयास है। जब स्थिति को ग्राउंड पर जाकर देखा, तो सच्चाई कुछ और सामने आई।
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प्राइमरी पाठशाला में कई बच्चे शौच और लघुशंका के लिए खुले में जा रहे थे। वजह, शौचालय अधूरे और सुविधा न होना।
मानिक चौक के पास नगर पालिका के एक भवन में संचालित प्राथमिक विद्यालय गांधी, प्राथमिक विद्यालय गांधी चौक व प्राथमिक विद्यालय सरोजनी नायडू में 90 छात्र और 43 छात्राएं पंजीकृत हैं। इसमें शौचालय ही नहीं है। शौच के लिए बच्चों को नगर पालिका के सार्वजनिक विद्यालय जाना पड़ता है। यही हाल दूसरे भवन में चल रहे प्राथमिक विद्यालय का भी था।
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आटा के प्राथमिक विद्यालय में सात माह पहले एक शौचालय का निर्माण हुआ, लेकिन अब तक दरवाजा नहीं लगा। इसमें 173 बच्चें पंजीकृत हैं। 80 छात्र और 93 छात्राएं, जिन्हें असुविधा होती है। प्राथमिक विद्यालय भदरेखी में 103 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां 48 बालक और 55 बालिकाएं हैं। शौचालय के लिंटर में दरारें हैं, टाइल्स नहीं लगे, इतना जर्जर कि गिरने के डर से कई विद्यार्थी जाने से घबराते हैं।
प्राथमिक स्कूल जर्जर है। विद्यालय में 56 बालक और 63 बालिकाएं हैं। यहां शौचालय में सीट भी दुरुस्त नहीं थी और शौचालय का दरवाजा नीचे से टूटा था। इस वजह से छात्राओं को उसके प्रयोग में असुविधा होती दिखी। एक ही शौचालय है, जबकि दूसरा शौचालय दिव्यांगों के लिए आरक्षित है। इस वजह से भी विद्यार्थियों को दिक्कत होती है।
कस्बा के प्राथमिक विद्यालय बम्हौरी में बालिका शौचालय का निर्माण 2004 में हुआ था। विद्यालय में 45 छात्राएं और 30 छात्र हैं। कोई दूसरा शौचालय नहीं है। बालकों को बाहर जाने के लिए विवश होना पड़ता है तो कई बार छात्राओं और महिला स्टाफ को भी असुविधा होती है। शौचालय की दीवारों में भी दरारें हैं।
प्राथमिक विद्यालय राम चबूतरा में स्कूल चल रहा था। दोपहर एक बजकर पांच मिनट का वक्त था, जब वहां के शौचालय पर ताला लटका देखा गया। शौच और पेशाब के लिए विद्यार्थी स्कूल के बाहर जा रहे थे। दो शौचालय होने के बावजूद यह समस्या विद्यालय में थी।
जिले में कुछ विद्यालयों के शौचालय निर्माण व मरम्मत का काम चल रहा है। दरवाजे टूटे होने और उनके जर्जर हालत में होने की स्थिति को जांचने के लिए सर्वे रिपोर्ट मांगी गई है। जहां-जहां ये समस्याएं हैं, दुरुस्त कराई जाएंगी। -चंद्र प्रकाश, बीएसए