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Jalaun News: जमीन कालपी खास की, मुआवजा आलमपुर के लोगों को

Mon, 28 Sep 2026 12:57 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 12:57 AM IST
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Land in Kalpi Khas, compensation to the people of Alampur.
फोटो - 15 जानकारी देता पीड़ित नरेंद्र कुमार। संवाद
उरई। एनएच-27 फोरलेन कालपी खास के लोगों की जमीन पर बना है... और मुआवजा आलमपुर के लोगों को बांट दिया गया। जमीन और मकान गंवाने वाले कालपी के 22 प्रभावित लोग 19 साल से हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। वर्ष 2019 में मुआवजे की रकम जारी होने के बाद उम्मीद थी कि अब भुगतान मिल जाएगा, लेकिन सात साल बाद भी कई वास्तविक प्रभावितों के हाथ खाली हैं।
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तहसील दिवस से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत कर चुके 22 प्रभावितों ने अब नए निजाम से न्याय की उम्मीद लगाई है। कालपी निवासी नरेंद्र कुमार गौतम ने नए डीएम समीर से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया और वास्तविक प्रभावितों को मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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शिकायतकर्ता का आरोप है कि कालपी खास में एनएच-27 के लिए वास्तविक रूप से प्रभावित 37 लोगों की जगह 93 लोगों को पात्र दर्शाया गया। आरोप है कि इनमें कई नाम आलमपुर के जंगल क्षेत्र के लोगों के हैं, जबकि अधिग्रहण कालपी खास में हाईवे के पास की जमीन का हुआ था।
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वर्ष 2007 में एनएच-27 फोरलेन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके मकान और जमीन अधिग्रहण की जद में आए, लेकिन मुआवजा वितरण के समय उनकी परेशानी दूर होने के बजाय और बढ़ गई। वर्ष 2019 में 78 करोड़ 42 लाख 81 हजार 764 रुपये से अधिक की रकम मुआवजा वितरण के लिए जारी कर दी गई। इसके बावजूद कई वास्तविक प्रभावितों को भुगतान नहीं हुआ।
पीड़ितों के अनुसार वे तहसील दिवस, जिला प्रशासन, शासन, मुख्यमंत्री कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और एनएचएआई तक शिकायत कर चुके हैं। हर स्तर पर फरियाद के बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ा। अब नए डीएम के आने के बाद प्रभावितों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित मामले की निष्पक्ष जांच होगी और उन्हें उनका हक मिलेगा। वहीं डीएम समीर ने मामले जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व को दी है।
37 प्रभावितों की जगह 93 पात्र कैसे
आरटीआई से मिली लाभार्थियों की सूची का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता नरेंद्र गौतम ने सवाल उठाया है कि वास्तविक प्रभावितों की संख्या 37 होने के बावजूद सूची में 93 लोगों को पात्र बना दिया गया। उनका आरोप है कि सूची में शामिल कई लोगों का अधिग्रहित जमीन से कोई संबंध नहीं है। कुछ नाम आलमपुर के बताए जा रहे हैं, जबकि जमीन कालपी खास में अधिग्रहित हुई थी। उनका कहना है कि संबंधित आलमपुर क्षेत्र जंगल क्षेत्र था और वहां आबादी तक नहीं थी। इसके बावजूद वहां के लोगों को संबंधित जमीन का लाभार्थी बनाए जाने का आरोप है।
1.25 करोड़ का मुआवजा, सात साल से इंतजार
कालपी निवासी नरेंद्र कुमार गौतम का कहना है कि एमसी इंटर कॉलेज के सामने उनका मकान था और उनके चारों भाई भी अधिग्रहण से प्रभावित हुए। उनके अनुसार परिवार का करीब 1.25 करोड़ रुपये का मुआवजा बनता है, लेकिन आज तक भुगतान नहीं हुआ।
ये हार गए हिम्मत
नरेंद्र गौतम के अलावा सूबेलाल, अशोक कुमार, लीलावती, सत्यनारायण कोष्टा ने भी पहले खूब शिकायतें कीं। उनके अनुसार उनकी जमीन फोरलेन में गई, पर मुआवजा देने के बजाए उनके नाम भी विचाराधीन कर दिए गए। इन लोगों के अनुसार इन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। यही वजह है कि वे शिकायत भी नहीं करते। इनका कहना है कि वे गरीब हैं, बड़ी अदालतों में केस नहीं लड़ सकते।

जांच में सामने आएगा सच
एडीएम वित्त एवं राजस्व राजीव राज ने कहा कि प्रकरण संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराई जाएगी। जमीन अधिग्रहण होने पर गजट जारी किया जाता है। शिकायतकर्ता इस प्रकार का साक्ष्य उपलब्ध कराएं, ताकि उनके मुआवजे पर आगे पत्राचार किया जा सके।
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