फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   Health department is silent in the name of action against illegal hospitals

Jalaun News: अवैध हॉस्पिटल पर कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य महकमा चुप

Tue, 16 Jul 2024 01:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन Updated Tue, 16 Jul 2024 01:27 AM IST
विज्ञापन
Health department is silent in the name of action against illegal hospitals
माधौगढ़। माधौगढ़ में चितौरा रोड पर संचालित होेने वाले अवैध हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य महकमा चुप है। इस अस्पताल में अवैध वसूली के कई आरोप लग चुके थे। अब नवजात और उसकी मां की मौत भी हो चुकी है। लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अवैध अस्पताल के मामले में स्थानीय पुलिस कार्रवाई करेंगी।
विज्ञापन


मां बेटी की मौत के बाद परिजनों के आक्रोश के बाद पुलिस ने अस्पताल संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालांकि अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है। वैसे तो जिले में 35 पंजीकृत हॉस्पिटल संचालित हो रहे है, लेकिन कई हॉस्पिटल बिना पंजीयन के भी चल रहे है। उनमें एक बालाजी हॉस्पिटल था। जिसमें दस बेड थे। खास बात यह थी कि अप्रैल माह से हॉस्पिटल का संचालन हो रहा था पर स्वास्थ्य विभाग ने इसे देखने तक की जहमत नहीं उठाई। अस्पताल में मां बेटे की मौत के बाद अधिकारियों का उनका कहना था कि उन्हें हॉस्पिटल की जानकारी ही नहीं थी। जबकि उनकी जिम्मेदारी होती है कि कोई भी झोलाछाप या फर्जी अस्पताल क्षेत्र में संचालित न होने पाए।
विज्ञापन




केस-1-

रामपुरा निवासी महिला संगीता का कहना हैं कि प्रसव के दौरान रामपुरा अस्पताल में भर्ती किया गया। अस्पताल में प्रसव के दौरान परेशानी होने पर रेफर कर दिया गया। अस्पताल में तैनात एक एएनएम ने कहा था कि माधौगढ़ में चितौरा के पास नया अस्पताल खुला हैं, डाक्टर को दिखा देना।
विज्ञापन
विज्ञापन




केस-2-

चितौरी निवासी जानकी रजबधिया का कहना हैं कि गर्भवती पुत्री को बालाजी अस्पताल के डाक्टर ने सुरक्षित प्रसव का आश्वासन दिया था। तीन दिन तक ब्लड, शुगर, बीपी की जांच की जाती रही। आखिर में पहले नवजात की मौत हो गई। इसके बाद पुत्री की भी की हालत बिगड़ गई। आननफानन उसे रेफर कर दिया, फिर उसकी मौत हो गई।



केस-3-



चितौरा निवासी पूजा विश्वकर्मा का कहना हैं कि अस्पताल में आने पर कर्मचारियों ने प्रसव आसानी से कराने का आश्वासन दिया। फर्जी डाक्टर के झांसे में आकर अस्पताल में भर्ती हो गए। जांच के नाम पर दस हजार रुपये वसूल लिए गए। गांव के संभ्रांत लोगों के हस्तक्षेप के बाद प्रसव हो सका।


वर्जन



फर्जी अस्पताल संचालन रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग अकेले कार्रवाई नहीं करता है। इसमें एसडीएम व पुलिस की भी भूमिका होती है। स्वास्थ्य महकमा अस्पतालों के पंजीकरण का काम करता है। पंजीकरण के पहले निर्धारित मानक देखे जाते है। मानक पूरे होने पर ही पंजीकरण किया जाता है। -डॉ. एनडी शर्मा, सीएमओ जालौन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed