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देवउठनी एकादशी के बाद अस्त हो रहा है गुरु
अमर उजाला जालौन
Updated Mon, 03 Jul 2017 12:13 AM IST
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ज्योतिषाचार्य रामनरेश।
- फोटो : अमर उजाला
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उरई। आज शुभ कार्यों का अंतिम दिन है, कल देव सो जाएंगे। 31 अक्तूबर को देवउठनी एकादशी के बाद गुरु अस्त हो रहा है, उसके बाद सूर्य तुला राशि में चला जाएगा। यानी अब चार माह बीस दिन बाद ही शुभ कार्य हो सकेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. रामनरेश व्यास ने बताया कि सोमवार को अंतिम शुभ मुहूर्त है। इसके बाद अब चार माह बीस दिन तक विवाह आदि शुभ कार्य नहीं हो पाएंगे। आषाढ़ शुक्लपक्ष एकादशी यानी मंगलवार चार जुलाई को देवशयन काल प्रारंभ हो रहा है। 31 अक्तूबर को देवउठनी एकादशी है। वैसे देवउठनी एकादशी से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं लेकिन इस बार 12 अक्तूबर से 7 नवंबर तक गुरु अस्त रहेगा। इसी तरह 17 अक्तूबर से 16 नवंबर तक सूर्य के तुला राशि में रहेगा। इसके बाद कृष्ण पक्ष शुरू हो जाएगा। इस कारणों से 23 नवंबर से ही विवाह आदि हो सकेंगे।
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ज्योतिषाचार्य पं. रामनरेश व्यास ने बताया कि सोमवार को अंतिम शुभ मुहूर्त है। इसके बाद अब चार माह बीस दिन तक विवाह आदि शुभ कार्य नहीं हो पाएंगे। आषाढ़ शुक्लपक्ष एकादशी यानी मंगलवार चार जुलाई को देवशयन काल प्रारंभ हो रहा है। 31 अक्तूबर को देवउठनी एकादशी है। वैसे देवउठनी एकादशी से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं लेकिन इस बार 12 अक्तूबर से 7 नवंबर तक गुरु अस्त रहेगा। इसी तरह 17 अक्तूबर से 16 नवंबर तक सूर्य के तुला राशि में रहेगा। इसके बाद कृष्ण पक्ष शुरू हो जाएगा। इस कारणों से 23 नवंबर से ही विवाह आदि हो सकेंगे।
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