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कालपी और कुठौंद के 84 गांवों में बाढ़ का पानी घुसा
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कालपी में वेदव्यास मंदिर में भरा पानी नाव से जाते लोग
- फोटो : ORAI
कालपी। यमुना के लगातार बढ़ते जल स्तर को देखते हुए कालपी क्षेत्र के 54 व कुठौंद क्षेत्र के 30 गांवों के ग्रामीण बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं। अधिकांश गांवों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया है, जिससे गांवों में हाहाकार मचा है। ऐतिहातन प्रशासन ने सभी निचले इलाकों को खाली करा लिया है और लोगों को ऊंचे स्थानों पर भेजा जा रहा है। वहीं जिलाधिकारी मन्नान अख्तर, एडीएम प्रमिल कुमार सिंह व एसडीएम भैरपाल सिंह मौके पर पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा ले रहे हैं। कई राहत शिविरों के साथ प्रभावित गांवों में लंच पैकेट की व्यवस्था की गई है।
बता दें कि शनिवार को ओखला बांध से यमुना में लगभग चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। जिससे शनिवार रात में ही यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हो गया था और यह बढ़त मंगलवार को भी जारी रही। जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार यमुना का जल स्तर 110.12 से बढ़कर 110.90 पर पहुंच गया। जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भय का माहौल है। रविवार से ही जिलाधिकारी पल पल की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
जिले के सभी आलाधिकारियों ने कालपी में ही डेरा जमा लिया है और प्रत्येक प्रभावित गांव की स्थिति पर नजर बनाए रखे है। जहां जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों से बातचीत कर हाल जाना वहीं एडीएम ने कई बाढ़ चौकियों व पुलों का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने सभी बाढ़ प्रभावित चौकियों व प्रशासनिक अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए।
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एसडीएम भैरपाल सिंह ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी गांवों का भ्रमण कर लिया है, फिलहाल ऐसा अभी कोई गांव नहीं है जिससे खाली कराने की आवश्यकता पड़े। लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लंच पैकेट प्रशासन की और से बंटवाए जा रहे है। सभी गांवों के लेखपालों को गांवों में कैंप करने के निर्देश दिए गए है और प्रतिघंटे की रिपोर्ट मांगी जा रही है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय जल आयोग से मिली रिपोर्ट के अनुसार अभी यमुना का जलस्तर और बढने की आशंका है। गांवों में बढ़ते जल स्तिर को देखते हुए दहशत का माहौल है। एडीएम ने बताया कि प्रशासन लगातार नजर बनाए है, किसी भी क्षेत्र में खाने पीने की कोई कमी न हो।
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बता दें कि शनिवार को ओखला बांध से यमुना में लगभग चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। जिससे शनिवार रात में ही यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हो गया था और यह बढ़त मंगलवार को भी जारी रही। जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार यमुना का जल स्तर 110.12 से बढ़कर 110.90 पर पहुंच गया। जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भय का माहौल है। रविवार से ही जिलाधिकारी पल पल की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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जिले के सभी आलाधिकारियों ने कालपी में ही डेरा जमा लिया है और प्रत्येक प्रभावित गांव की स्थिति पर नजर बनाए रखे है। जहां जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों से बातचीत कर हाल जाना वहीं एडीएम ने कई बाढ़ चौकियों व पुलों का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने सभी बाढ़ प्रभावित चौकियों व प्रशासनिक अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए।
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एसडीएम भैरपाल सिंह ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी गांवों का भ्रमण कर लिया है, फिलहाल ऐसा अभी कोई गांव नहीं है जिससे खाली कराने की आवश्यकता पड़े। लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लंच पैकेट प्रशासन की और से बंटवाए जा रहे है। सभी गांवों के लेखपालों को गांवों में कैंप करने के निर्देश दिए गए है और प्रतिघंटे की रिपोर्ट मांगी जा रही है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय जल आयोग से मिली रिपोर्ट के अनुसार अभी यमुना का जलस्तर और बढने की आशंका है। गांवों में बढ़ते जल स्तिर को देखते हुए दहशत का माहौल है। एडीएम ने बताया कि प्रशासन लगातार नजर बनाए है, किसी भी क्षेत्र में खाने पीने की कोई कमी न हो।

कुसे पुरा गांव में मदद को पहुंची एचडीआर की टीम- फोटो : ORAI

कुठौंद में भरे पानी के बीच निकलते लोग- फोटो : ORAI

कढाओ पर बैठकर निकलते ग्रामीण- फोटो : ORAI