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बारिश न होने से धान रोपाई के लिए किसान परेशान
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धर्मेंद्र सिंह
- फोटो : ORAI
मुहम्मदाबाद। बीते दस दिन से बारिश ने होने से किसानों के माथे पर पसीना आ रहा है। धान की बोआई पूरी होने के बाद अब रोपाई का वक्त है, जिसमें पानी की अधिक जरूरत होती है, मौसम भी है और बादल भी लेकिन नहीं हो रही है तो वह है बारिश। ऐसे में धान की बोआई कर चुके किसानों को फसल के खराब होने का डर सताने लगा है। लिहाजा अब वे किराए पर पानी लेकर जैसे तैसे रोपाई करने में जुटे हैं।
किसानों का कहना है कि आखिर कब तक बारिश का इंतजार किया जाए, भगवान तो रूठे से लग रहे हैं। यदि जल्द ही रोपाई न की गई तो जो कुछ लगाया है, वह भी बर्बाद हो जाएगा। बता दें कि मानसून आने के बाद अभी तक सिर्फ एक बार ही झमाझम बारिश हुई है। इसके बाद बीते दस दिनों से लगातार आसमान पर कभी बादल तो कभी सूरज चमकने लगता है। नहरें और माइनर भी पानी से खाली पड़े हैं। लिहाजा किसानों की चिंता और बढ़ गई है। कुछ किसान अब किराए पर पानी लेकर बोआई करा रहे हैं।
निजी बोरिंग बिना मुश्किल
ऐरी रामपुरा के किसान बृजेश राजपूत का कहना है कि बुंदेलखंड में अक्सर बारिश देर से होती है। जिस कारण जनपद में निजी बोरिंग कराने वाले किसान ही धान की पैदावार ठीक से कर पाते हैं, बाकी किसान तो भगवान भरोसे ही रहते हैं।
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बारिश न होने से हो रही परेशानी
मुहम्मदाबाद के किसान रफाकत उल्ला ने बताया कि रोपाई के लिए करीब सात बार पानी लगाने की आवश्यकता होती है और बारिश एक बार भी नहीं हुई। इसलिए उन्होंने 500 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से पानी किराए पर लिया है।
फसल की बढ़ रही लागत
कुठौंदा के किसान धर्मेंद्र सिंह बोले कि एक तो डीजल के मूल्यों में हुई बढ़ोतरी पहले ही परेशान किए थी, अब पानी भी किराए पर लेना पड़ रहा है। जिससे फसल की लागत बढ़ रही है, मुनाफा होगा भी कि नहीं, अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
प्रशासन से भी कोई मदद नहीं
ऐरी गांव के किसान लालसिंह बोले, प्रशासन से भी पानी मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। किसान करे भी तो क्या करे, इधर-उधर से कर्ज लेकर किसान अब पानी का जुगाड़ कर रहा है। नहरों में पानी मिल जाता तो कुछ राहत होती।
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किसानों का कहना है कि आखिर कब तक बारिश का इंतजार किया जाए, भगवान तो रूठे से लग रहे हैं। यदि जल्द ही रोपाई न की गई तो जो कुछ लगाया है, वह भी बर्बाद हो जाएगा। बता दें कि मानसून आने के बाद अभी तक सिर्फ एक बार ही झमाझम बारिश हुई है। इसके बाद बीते दस दिनों से लगातार आसमान पर कभी बादल तो कभी सूरज चमकने लगता है। नहरें और माइनर भी पानी से खाली पड़े हैं। लिहाजा किसानों की चिंता और बढ़ गई है। कुछ किसान अब किराए पर पानी लेकर बोआई करा रहे हैं।
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निजी बोरिंग बिना मुश्किल
ऐरी रामपुरा के किसान बृजेश राजपूत का कहना है कि बुंदेलखंड में अक्सर बारिश देर से होती है। जिस कारण जनपद में निजी बोरिंग कराने वाले किसान ही धान की पैदावार ठीक से कर पाते हैं, बाकी किसान तो भगवान भरोसे ही रहते हैं।
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बारिश न होने से हो रही परेशानी
मुहम्मदाबाद के किसान रफाकत उल्ला ने बताया कि रोपाई के लिए करीब सात बार पानी लगाने की आवश्यकता होती है और बारिश एक बार भी नहीं हुई। इसलिए उन्होंने 500 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से पानी किराए पर लिया है।
फसल की बढ़ रही लागत
कुठौंदा के किसान धर्मेंद्र सिंह बोले कि एक तो डीजल के मूल्यों में हुई बढ़ोतरी पहले ही परेशान किए थी, अब पानी भी किराए पर लेना पड़ रहा है। जिससे फसल की लागत बढ़ रही है, मुनाफा होगा भी कि नहीं, अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
प्रशासन से भी कोई मदद नहीं
ऐरी गांव के किसान लालसिंह बोले, प्रशासन से भी पानी मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। किसान करे भी तो क्या करे, इधर-उधर से कर्ज लेकर किसान अब पानी का जुगाड़ कर रहा है। नहरों में पानी मिल जाता तो कुछ राहत होती।

लाल सिंह- फोटो : ORAI

डकोर ब्लॉक के रामपुरा में खेत में लगी धान- फोटो : ORAI

बृजेश राजपूत- फोटो : ORAI

रफाकत उल्ला- फोटो : ORAI