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Jalaun News: बिना प्रसव जारी करा दिया फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
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रामपुरा (उरई)। सीएचसी रामपुरा में स्टाफ की मिलीभगत से फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी करने का मामला सामने आया है। युवक ने मुख्यमंत्री समेत आला अधिकारियों को शिकायतीपत्र भेजा कर आरोप लगाया है कि एक महिला को उसकी फर्जी पत्नी बनाकर अस्पताल में प्रसव करा दिया। यही नहीं टीकाकरण भी करा दिया है। उसे इसकी जानकारी तब मिली जब वह इस मामले में पैरवी करने कोर्ट पहुंचा। मामला संज्ञान में आने पर सीएमओ ने भी मामले की जांच की बात कही है।
इटावा जनपद के बकेवर थाना क्षेत्र के दिलीपनगर निवासी रोहित का कहना है कि रामपुरा थाना क्षेत्र के जगम्मनपुर में मजदूरी करता है। उसकी शादी औरैया जनपद के अछल्दा थाना क्षेत्र के चिमकुनी निवासी विनीता के साथ छह फरवरी 2018 को हुई थी। विवाद के बाद 2021 से दोनों अलग हो गए। मामला औरैया के फैमिली कोर्ट में विचाराधीन है।
रोहित के मुताबिक जब वह मुकदमा पेशी के दौरान 13 अक्तूबर 2025 को कोर्ट पहुंचा तो पता चला कि विनीता ने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी विनीता ने रामपुरा सीएचसी कर्मचारियों के साथ मिलकर अपनी बहन व आशा वर्कर के साथ मिलकर 7 अक्तूबर को फर्जी प्रसव कराया है। प्रसव में प्रेरक के रूप में आशा का भी नाम दर्ज है। प्रसव कराने वाले स्टाफ की महिला शामिल है।
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साथ ही आठ अक्तूबर को उसे पिता बताते हुए अंजुली के पुत्र आर्यन के नाम से जन्म प्रमाणपत्र जारी करा दिया। यही नहीं अनमोल नाम के व्यक्ति ने उस जन्म प्रमाणपत्र को रिसीव भी किया है। साथ ही टीकाकरण भी कराया गया है। आरोप लगाया कि जब वह इस प्रमाणपत्र की जानकारी करने सीएचसी पहुंचा तो स्टाफ ने धमकाकर भगा दिया।
उसने बताया कि इस फर्जीवाड़े को लेकर 19 अक्तूबर को उसने रामपुरा थाने में भी शिकायतीपत्र दिया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शुक्रवार को उसने सीएमओ डॉ.डीके भिटौरिया से मुलाकात की और समस्या बताई। सीएमओ ने जांच कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया है।
मामला संज्ञान में आया है। इस मामले में संबंधित स्टाफ से पूछताछ की जाएगी जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- डॉ.डीके भिटौरिया, सीएमओ
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अब 47 और दवाएं उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अब 47 नई दवाएं शामिल की जाएंगी। इन दवाओं के उपलब्ध होने से मरीजों को बाहर की दवाएं खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खास तौर पर जीवनरक्षक दवाओं की तत्काल उपलब्धता से गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। नई दवाओं में एंटीबायोटिक इंजेक्शन और आपात स्थिति में उपयोग होने वाली दवाएं शामिल हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि दवाओं की नई व्यवस्था से शिकायतें काफी कम होंगी। उनका कहना है कि इससे मरीजों के इलाज में तेजी आएगी और आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। रेफर करने की समस्या में भी कमी आएगी। उन्होंने बताया कि जो दवाएं इमरजेंसी में रखवाई गई है, उन्हें सामने रखवाया जाएगा, साथ ही उनकी सूची भी चस्पा कराई जाएगी कि यह दवाएं इमरजेंसी में उपलब्ध है। इससे मरीजों को बाहर से दवाएं नहीं लेनी पड़ेगी। अस्पताल प्रशासन अब दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और स्टॉक की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था भी लागू करने जा रहा है। इससे मरीजों को निर्बाध उपचार मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध है। बाहर की दवा लिखने वाले चिकित्सक की शिकायतें करें, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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इटावा जनपद के बकेवर थाना क्षेत्र के दिलीपनगर निवासी रोहित का कहना है कि रामपुरा थाना क्षेत्र के जगम्मनपुर में मजदूरी करता है। उसकी शादी औरैया जनपद के अछल्दा थाना क्षेत्र के चिमकुनी निवासी विनीता के साथ छह फरवरी 2018 को हुई थी। विवाद के बाद 2021 से दोनों अलग हो गए। मामला औरैया के फैमिली कोर्ट में विचाराधीन है।
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रोहित के मुताबिक जब वह मुकदमा पेशी के दौरान 13 अक्तूबर 2025 को कोर्ट पहुंचा तो पता चला कि विनीता ने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी विनीता ने रामपुरा सीएचसी कर्मचारियों के साथ मिलकर अपनी बहन व आशा वर्कर के साथ मिलकर 7 अक्तूबर को फर्जी प्रसव कराया है। प्रसव में प्रेरक के रूप में आशा का भी नाम दर्ज है। प्रसव कराने वाले स्टाफ की महिला शामिल है।
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साथ ही आठ अक्तूबर को उसे पिता बताते हुए अंजुली के पुत्र आर्यन के नाम से जन्म प्रमाणपत्र जारी करा दिया। यही नहीं अनमोल नाम के व्यक्ति ने उस जन्म प्रमाणपत्र को रिसीव भी किया है। साथ ही टीकाकरण भी कराया गया है। आरोप लगाया कि जब वह इस प्रमाणपत्र की जानकारी करने सीएचसी पहुंचा तो स्टाफ ने धमकाकर भगा दिया।
उसने बताया कि इस फर्जीवाड़े को लेकर 19 अक्तूबर को उसने रामपुरा थाने में भी शिकायतीपत्र दिया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शुक्रवार को उसने सीएमओ डॉ.डीके भिटौरिया से मुलाकात की और समस्या बताई। सीएमओ ने जांच कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया है।
मामला संज्ञान में आया है। इस मामले में संबंधित स्टाफ से पूछताछ की जाएगी जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- डॉ.डीके भिटौरिया, सीएमओ
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अब 47 और दवाएं उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अब 47 नई दवाएं शामिल की जाएंगी। इन दवाओं के उपलब्ध होने से मरीजों को बाहर की दवाएं खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खास तौर पर जीवनरक्षक दवाओं की तत्काल उपलब्धता से गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। नई दवाओं में एंटीबायोटिक इंजेक्शन और आपात स्थिति में उपयोग होने वाली दवाएं शामिल हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि दवाओं की नई व्यवस्था से शिकायतें काफी कम होंगी। उनका कहना है कि इससे मरीजों के इलाज में तेजी आएगी और आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। रेफर करने की समस्या में भी कमी आएगी। उन्होंने बताया कि जो दवाएं इमरजेंसी में रखवाई गई है, उन्हें सामने रखवाया जाएगा, साथ ही उनकी सूची भी चस्पा कराई जाएगी कि यह दवाएं इमरजेंसी में उपलब्ध है। इससे मरीजों को बाहर से दवाएं नहीं लेनी पड़ेगी। अस्पताल प्रशासन अब दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और स्टॉक की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था भी लागू करने जा रहा है। इससे मरीजों को निर्बाध उपचार मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध है। बाहर की दवा लिखने वाले चिकित्सक की शिकायतें करें, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।