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मलिन बस्ती के बच्चों को काबिल बना रहीं शिवांगी
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्पोर्ट्स डे पर हुई प्रतियोगिता में विजेता बच्चों के साथ शिवांगी।
- फोटो : ORAI
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उरई। बीटेक की पढ़ाई कर चुकीं शिवांगी दीक्षित अब बच्चों की जिंदगी में शिक्षा की अलख जगा रही हैं। शिवांगी इन बच्चों को न केवल निशुल्क कोचिंग पढ़ा रहीं हैं, बल्कि उनकी अन्य प्रतिभाओं को भी निखारने का काम कर रही हैं। पांच बच्चों से शुरू हुआ शिवांगी का ये कारवां आज 160 बच्चों तक पहुंच गया है।
शहर के मोहल्ला रामनगर निवासी शिक्षक प्रदीप दीक्षित की बेटी शिवांगी बीटेक करने के बाद पिछले चार वर्षों से मलिन बस्ती में रहने वाले करीब 160 बच्चों को शिक्षित कर रही हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने पांच बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। इसके बाद धीरे-धीरे बच्चे जुड़ते चले गए। शिवांगी रामनगर में ही एक मकान में चार बैच में 160 बच्चों को पढ़ाती हैं। ये बच्चे कक्षा एक से लेकर 10वीं तक के हैं। शिवांगी ने इन्हें विषय और उम्र के हिसाब से पांच अलग-अलग ग्रुपों में बांटा हुआ है। सभी बच्चे सरकारी स्कूलों के छात्र हैं। सुबह साढ़े पांच से साढ़े छह बजे तथा शाम को तीन से सात बजे तक निशुल्क शिक्षा देती हैं। शिवांगी ने बताया कि उनके यहां से पढ़े हुए 13 बच्चों ने प्रथम श्रेणी में हाईस्कूल की परीक्षा पास की है। उनकी ही पढ़ाई छात्रा प्रतिमा ने हाईस्कूल में 86 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
शहर में हाईस्कूल तक पढ़ाई करने के बाद शिवांगी ने लखनऊ से 12वीं पास किया। लखनऊ से बीटेक किया। इसके बाद कोरोना की महामारी के चलते वह घर वापस आ गईं। शिवांगी ने बताया कि वर्ष 2018 में होमगार्ड प्लाटून कमांडेंट के पद पर चयन हो गया था। मामला कोर्ट में चले जाने के बाद उनकी तैनाती नहीं हो सकी है। इसके चलते वह उरई आ गईं। यहां उन्होंने देखा उनके मोहल्ले के आसपास के कई ऐसे बच्चे हैं, जो पढ़ना तो चाहते हैं पर अभाव बाधा बन रहा है। इसलिए उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मलिन बस्ती में घर-घर जाकर बच्चों के अभिभावकों से बात की। उनके बच्चों को निशुल्क पढ़ाने के लिए कहा। इस पर कई लोग तैयार भी हो गए।
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दूसरे हुनर भी सिखा रहीं शिवांगी
शिवांगी ने बताया कि इन बच्चों में आत्मविश्वास भरने के लिए दूसरे हुनर भी सिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि हर रविवार को डांस और ड्राइंग क्लास भी होती है। इसके अलावा इन बच्चों के बीच वाद-विवाद प्रतियोगिताएं भी कराई जाती हैं। पब्लिक स्पीकिंग का भी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे ये बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकें।
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छह बच्चों का जीवन ज्योति एकेडमी में चयन
शिवांगी ने बताया कि सभी बच्चे ऐसे हैं जो प्राइवेट स्कूलों में फीस न होने की वजह से नहीं पढ़ पा रहे हैं। इसके लिए जीवन ज्योति चंद्र कमल एकेडमी की तरफ से एक परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में उनके यहां से पढ़े हुए छह बच्चे चयनित हुए। इन बच्चों को स्कूल प्रबंधन की तरफ से कक्षा 12 तक निशुल्क पढ़ाई के साथ-साथ आने-जाने और पढ़ाई की सभी सामग्री देने की बात कही है।
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शहर के मोहल्ला रामनगर निवासी शिक्षक प्रदीप दीक्षित की बेटी शिवांगी बीटेक करने के बाद पिछले चार वर्षों से मलिन बस्ती में रहने वाले करीब 160 बच्चों को शिक्षित कर रही हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने पांच बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। इसके बाद धीरे-धीरे बच्चे जुड़ते चले गए। शिवांगी रामनगर में ही एक मकान में चार बैच में 160 बच्चों को पढ़ाती हैं। ये बच्चे कक्षा एक से लेकर 10वीं तक के हैं। शिवांगी ने इन्हें विषय और उम्र के हिसाब से पांच अलग-अलग ग्रुपों में बांटा हुआ है। सभी बच्चे सरकारी स्कूलों के छात्र हैं। सुबह साढ़े पांच से साढ़े छह बजे तथा शाम को तीन से सात बजे तक निशुल्क शिक्षा देती हैं। शिवांगी ने बताया कि उनके यहां से पढ़े हुए 13 बच्चों ने प्रथम श्रेणी में हाईस्कूल की परीक्षा पास की है। उनकी ही पढ़ाई छात्रा प्रतिमा ने हाईस्कूल में 86 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
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शहर में हाईस्कूल तक पढ़ाई करने के बाद शिवांगी ने लखनऊ से 12वीं पास किया। लखनऊ से बीटेक किया। इसके बाद कोरोना की महामारी के चलते वह घर वापस आ गईं। शिवांगी ने बताया कि वर्ष 2018 में होमगार्ड प्लाटून कमांडेंट के पद पर चयन हो गया था। मामला कोर्ट में चले जाने के बाद उनकी तैनाती नहीं हो सकी है। इसके चलते वह उरई आ गईं। यहां उन्होंने देखा उनके मोहल्ले के आसपास के कई ऐसे बच्चे हैं, जो पढ़ना तो चाहते हैं पर अभाव बाधा बन रहा है। इसलिए उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मलिन बस्ती में घर-घर जाकर बच्चों के अभिभावकों से बात की। उनके बच्चों को निशुल्क पढ़ाने के लिए कहा। इस पर कई लोग तैयार भी हो गए।
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दूसरे हुनर भी सिखा रहीं शिवांगी
शिवांगी ने बताया कि इन बच्चों में आत्मविश्वास भरने के लिए दूसरे हुनर भी सिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि हर रविवार को डांस और ड्राइंग क्लास भी होती है। इसके अलावा इन बच्चों के बीच वाद-विवाद प्रतियोगिताएं भी कराई जाती हैं। पब्लिक स्पीकिंग का भी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे ये बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकें।
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छह बच्चों का जीवन ज्योति एकेडमी में चयन
शिवांगी ने बताया कि सभी बच्चे ऐसे हैं जो प्राइवेट स्कूलों में फीस न होने की वजह से नहीं पढ़ पा रहे हैं। इसके लिए जीवन ज्योति चंद्र कमल एकेडमी की तरफ से एक परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में उनके यहां से पढ़े हुए छह बच्चे चयनित हुए। इन बच्चों को स्कूल प्रबंधन की तरफ से कक्षा 12 तक निशुल्क पढ़ाई के साथ-साथ आने-जाने और पढ़ाई की सभी सामग्री देने की बात कही है।