फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   The village is transformed into a cantonment between gum and anger

गम और गुस्से के बीच छावनी में तब्दील रहा गांव

Tue, 11 Jun 2019 12:34 AM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूूराे जालाैन
अमर उजाला ब्यूूराे जालाैन Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 11 Jun 2019 12:34 AM IST
विज्ञापन
The village is transformed into a cantonment between gum and anger
गांव की गलियों में पसरा सन्नाटा। - फोटो : amar ujala
बता दें कि रविवार को कुठौंद क्षेत्र के एक गांव में बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में पुलिस ने पुराने विवाद के चलते दो लोगों को गिरफ्तार किया था। जबकि गांव वालों ने डीआईजी सुभाष बघेल और राज्य महिला आयोग की सदस्य कंचन जायसवाल से कहा था कि पुलिस निर्दोषों को फंसा रही है। तब जनपद पुलिस को मामले में उचित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। रविवार तक जो पुलिस अपनी कार्रवाई से स्वयं को अलीगढ़, हमीरपुर की घटनाओं से बचा हुआ महसूस कर रही थी, सोमवार को वही पुलिस उसी आग की लपटों से घिरी दिखाई दे रही थी।
विज्ञापन


आरोपियों से कई चक्र हुई बातचीत के बाद भी पुलिस अभी तक उनसे जुर्म स्वीकार नहीं करा सकी है। पसीने छूटने के बाद अब पुलिस ने गांव के ही संदिग्धों को उठाना शुरू कर दिया है। करीब 10 से 15 संदिग्धों को उठाकर भी उनसे पूछताछ की जा रही है। संदिग्धों के मोबाइल भी चेक किए जा रहे हैं, जिनके भी फोन पर अश्लील फिल्म वगैरह मिली तो उनसे अलग से पूछताछ की जा रही है। कुल मिलाकर सोमवार को पुलिस कुछ बैकफुट पर नजर आई और आरोपियों को देर शाम तक जेल भेजने के बजाए कोतवाली में ही बैठाए रही। एसपी का कहना है कि किसी भी निर्दोष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।    
विज्ञापन


गलती सुधारने को बच्चों के साथ ‘बच्चा’ बनी पुलिस
वारदात के करीब 24 घंटे बीतने के बाद पुलिस को भी लगने लगा है कि कहीं न कहीं वह भी जल्दबाजी कर गई। बिना फोरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट और किसी अन्य सबूत के गंभीर धाराओं में गांव के ही मोती और जाहर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी भी कर ली। अब पुलिस एक बार फिर नए सिरे से मामले की पड़ताल में जुट गई है। जिसके चलते सोमवार को कई थानेदार ही नहीं बल्कि एसपी स्वामी प्रसाद भी गांव के उन बच्चों से मिले। जिनके साथ खेलते वक्त बच्ची गायब हुई थी, उनके दोस्त बनकर घटना के बारे में पूछताछ करते नजर आए। दिनभर की माथा पच्ची के बाद भी कोई बच्चा नहीं बता पाया कि बच्ची को कौन, कब और कैसे घर के बाहर से ले गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


दुष्कर्म पता करने में लगे पुलिस को 13 घंटे
इसमें कोई दो राय नहीं कि रविवार को घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिस का पूरा प्रयास था कि मामला कहीं अलीगढ़ और हमीरपुर का रुप न ले सके। जिसके लिए पुलिस बच्ची के शव की स्थिति और आसपास मिले साक्ष्य को भी नजरअंदाज करती दिखी। थानेदार से लेकर सीओ, एसपी और डीआईजी तक किसी ने रेप का शब्द अपनी जुबां से नहीं लिया। फिर शाम को पांच बजे जब पोस्टमार्टम पूरा हुआ और रिपोर्ट सामने आई। तब जाकर पुलिस ने देर रात 10 बजे के बाद माना कि बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या हुई। तब जाकर धाराएं बढ़ाई गईं।


पहले भी हैवानियत का शिकार हुई मासूम
कुठौंद क्षेत्र में हैवानियत की यह घटना कोई पहली नहीं है बल्कि करीब साल भर पूर्व भी इसी तरह बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या हुई थी। जिसमें ग्रामीणों ने आरोपी को खंभे से बांधकर पीटा भी था। करीब एक साल पूर्व ही उरई कोतवाली क्षेत्र के हाईवे पर भी बच्ची का शव मिला था, जिसकी टाई से गला दबाकर हत्या की गई थी। अभी तीन माह पूर्व आटा में गेस्ट हाउस के बाहर से बच्ची को अगवा कर दुष्कर्म किया गया था। जिसका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed