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बच्ची से दुष्कर्म में उम्रकैद
अमर उजाला जालौन
Updated Thu, 25 May 2017 11:57 PM IST
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छह माह की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले अधेड़ को एडीजे द्वितीय श्रीनाथ सिंह ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख का जुर्माना भी किया है। बच्ची की पैरवी सरकारी अधिवक्ता बृजराज सिंह राजपूत ने की। करीब दो साल बाद आए कोर्ट के इस फैसले पर बच्ची के परिजनों ने संतोष जताया है।
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जानकारी के मुताबिक 20 मई 2015 की दोपहर एट थाने के एक गांव में छह माह की बच्ची अपने घर की गैलरी में खेल रही थी। इसी दौरान पड़ोस का ही अधेड़ रामकुमार उसे गोद में उठाकर मकान के पीछे ले गया। वहां रामकुमार ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर उसकी दादी मौके पहुंच गई। दादी के शोर मचाने पर ग्रामीण एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने रामकुमार की पिटाई कर पुलिस को सौंप दिया था।
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तब से मामला कोर्ट में चल रहा था। गुरुवार को फैसले की तारीख थी। आरोपी रामकुमार पर दोष सिद्ध होने पर एडीजे द्वितीय श्रीनाथ सिंह ने आजीवन कारावास और एक लाख जुर्माने की सजा सुनाई॥ इस पर पीड़ित पक्ष के लोगों ने राहत की सांस ली। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें कोर्ट पर पूरा यकीन था कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। सरकारी अधिवक्ता बृजराज सिंह राजपूत का कहना है कि अपराध काफी गंभीर श्रेणी का है, इसलिए जब तक आरोपी जीवित रहेगा, तब तक उसकी सजा भी बरकरार रखने का आदेश दिया गया है।
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दोबारा न कर सके कोई हिम्मत
समाजसेवी अंशुमन सिंह का कहना है कि दुष्कर्म करने वाले अधेड़ को कोर्ट ने सही सजा दी। ऐसे फैसलों से शोहदों को सबक मिलेगा। महिलाओं और बच्चियों की आबरू लूटने वाले दरिंदों को ऐसी सजा मिलनी ही चाहिए, ताकि कोई भी इस प्रकार की घिनौनी हरकत करने से पहले सोचने पर मजबूर हो सकें।
पुलिस भी दिखाए सख्ती
रामू महेश्वरी के मुताबिक कोर्ट ने बिल्कुल सही फैसला सुनाया है। कोर्ट के सख्त फैसले से मनचलों में कानून का खौफ पैदा होगा। छेड़छाड़ और दुष्कर्म की घटनाएं न हों, इसके लिए पुलिस को भी शोहदों पर सख्ती करनी चाहिए। ऐसे मामलों को संगीन धाराओं में दर्ज कर उसकी पैरवी करना चाहिए, जिससे सजा मिल सके।