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भीषण गर्मी से झुलस रही गुलाब की खेती
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मुहम्मदाबाद (जालौन)। भीषण गर्मी में आसमान से बरसने वाली आग ने फूलों की खेती को भी झुलसा दिया है। खासतौर पर गुलाब की खेती तो न के बराबर रह गई है। पैदावार घटी तो बाजारों में भी गुलाब की आवक कम हो गई। जिस कारण गुलाब के दामों में भी काफी उछाल आया है। गुलाब की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि इस बार मई से ही प्रचंड गर्मी पड़ने लगी थी और जून आते-आते तो मौसम गुलाब के लायक रहा ही नहीं। किसान गुलाब की बौर को अगले सीजन तक जिंदा रखने के लिए जैसे-तैसे घाटे का सौदा ही सही लेकिन गुलाब की खेती करने को मजबूर है।
बता दें कि डकोर ब्लाक के कुछ गांव मुहम्मदाबाद, कुठौंदा, मुहाना व सिमरिया आदि में फूलों की खेती की जाती है। फूलों में भी सबसे अधिक खेती गुलाब की ही होती है। यहां का गुलाब जनपद के अलावा आसपास के जिलों हमीरपुर, चित्रकूट और झांसी तक जाता है। जिससे गुलाब की खेती करने वाले किसानों की अच्छी आमदनी भी हो जाती है। इस बार मई और जून माह में पड़ रही भीषण गर्मी ने गुलाब की खेती को झुलसा दिया है। जिससे पैदावार आधे से भी कम रह गई है। कुठौंदा के किसान उदल, राजू और रामप्रकाश आदि का कहना है कि एक तो पानी की किल्लत उस पर आसमान से बरसती आग आखिर गुलाब जैसी नाजुक चीज कितनी गर्मी बर्दाश्त कर पाएगी। पैदावार कम होने से फूलों के दामों में भी तेजी आई है।
40 की जगह 5 किलो ही रह गई पैदावार
मुहम्मदाबाद के किसान रमेश सैनी ने बताया कि जहां पर पहले 30 से 40 किलो गुलाब होता था, वहीं अब 5 से 10 किलो गुलाब पैदा करना मुश्किल हो रहा है। धूप के कारण बौर झुलस रही है। मार्च माह तक तो सप्ताह में एक बार पानी लगाना पड़ता था, अब स्थिति यह है कि हर दूसरे तीसरे दिन गुलाब को पानी देना पड़ रहा है, वह भी किराए पर, फिर घाटा तो होना ही है।
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दुकान पर बर्फ लगाकर रख रहे गुलाब
उरई के फूल विक्रेता सुरेश सैनी का कहना है कि माल तो महंगा मिल ही रहा है, उससे ज्यादा परेशानी उसे सहेज कर रखने की है क्योंकि गर्मी के कारण दुकान पर भी गुलाब मुरझा रहा है। इस वक्त सहालगों का सीजन भी चल रहा है, सभी को ताजे गुलाब ही चाहिए, लिहाजा गुलाब को बर्फ के बीच रखकर बेचना पड़ रहा है। जिस कारण भी गुलाब के दाम बढ़े हैं।
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बता दें कि डकोर ब्लाक के कुछ गांव मुहम्मदाबाद, कुठौंदा, मुहाना व सिमरिया आदि में फूलों की खेती की जाती है। फूलों में भी सबसे अधिक खेती गुलाब की ही होती है। यहां का गुलाब जनपद के अलावा आसपास के जिलों हमीरपुर, चित्रकूट और झांसी तक जाता है। जिससे गुलाब की खेती करने वाले किसानों की अच्छी आमदनी भी हो जाती है। इस बार मई और जून माह में पड़ रही भीषण गर्मी ने गुलाब की खेती को झुलसा दिया है। जिससे पैदावार आधे से भी कम रह गई है। कुठौंदा के किसान उदल, राजू और रामप्रकाश आदि का कहना है कि एक तो पानी की किल्लत उस पर आसमान से बरसती आग आखिर गुलाब जैसी नाजुक चीज कितनी गर्मी बर्दाश्त कर पाएगी। पैदावार कम होने से फूलों के दामों में भी तेजी आई है।
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40 की जगह 5 किलो ही रह गई पैदावार
मुहम्मदाबाद के किसान रमेश सैनी ने बताया कि जहां पर पहले 30 से 40 किलो गुलाब होता था, वहीं अब 5 से 10 किलो गुलाब पैदा करना मुश्किल हो रहा है। धूप के कारण बौर झुलस रही है। मार्च माह तक तो सप्ताह में एक बार पानी लगाना पड़ता था, अब स्थिति यह है कि हर दूसरे तीसरे दिन गुलाब को पानी देना पड़ रहा है, वह भी किराए पर, फिर घाटा तो होना ही है।
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दुकान पर बर्फ लगाकर रख रहे गुलाब
उरई के फूल विक्रेता सुरेश सैनी का कहना है कि माल तो महंगा मिल ही रहा है, उससे ज्यादा परेशानी उसे सहेज कर रखने की है क्योंकि गर्मी के कारण दुकान पर भी गुलाब मुरझा रहा है। इस वक्त सहालगों का सीजन भी चल रहा है, सभी को ताजे गुलाब ही चाहिए, लिहाजा गुलाब को बर्फ के बीच रखकर बेचना पड़ रहा है। जिस कारण भी गुलाब के दाम बढ़े हैं।