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गोशाला गेट के रास्ते के विवाद में टकराव, पथराव
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कालपी (जालौन)। आलमपुर गोशाला के नए रास्ते पर गेट लगाने को लेकर सोमवार को पालिका प्रशासन व मोहल्लों के लोगों में विवाद हो गया। इस दौरान पालिका अधिकारियों व लोगों में तीखी झड़प हुई। आक्रोशित लोगों ने पालिका कर्मियों के ऊपर पथराव कर दिया। पथराव से मोहल्ले में हड़कंप मच गया। सूचना पर एसडीएम व सीओ भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझा बुझा कर शांत कराया। एसडीएम सुनील शुक्ला ने बताया कि बाशिंदे जहां गेट लगाया जा रहा था, उसे अपनी निजी भूमि बता रहे हैं। जबकि पालिका अधिकारी रास्ते को सरकारी बता रहे है। फिलहाल काम रुकवा दिया गया है और दोनों पक्षों को कागजों के साथ मंगलवार को बुलाया गया है। जांच के बाद ही गोशाला के गेट का निर्माण कराया जाएगा।
10 जनवरी को सीएम के फरमान के बाद आलमपुर गोशाला को नगर पालिका प्रशासन ने चालू करा दिया है। इस गोशाला में नगरीय क्षेत्र के लगभग दो सैकड़ा अन्ना मवेशी रखे गए हैं। गोशाला के विकास के लिए शासन ने नगर पालिका को एक करोड़ पैंसठ लाख रुपये की धनराशि भी उपलब्ध करा दी है। बजट मिलते ही प्रशासन ने गोशाला का मुख्य गेट बनाने की तैयारी तेज कर दी।
बता दें कि गोशाला के मुख्य रास्ते पर वर्षों से स्थायी अतिक्रमण है और वहां पर कई पक्के मकान बन गए हैं। जिससे मुख्य रास्ता बेहद संकरा हो गया है। इसके चलते गोशाला में मवेशियों के लिए भूसा चारा आदि के वाहन नहीं आ पा रहे हैं। इस समस्या के निदान के लिए सोमवार को नगर पालिका के ईओ सुशील कुमार दोहरे पालिका कर्मचारियों के साथ गोशाला पहुंचे।
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यहां पर कुछ लोगों ने ईओ को बताया कि गोशाला के दूसरी तरह से भी एक सरकारी रास्ता है अगर गोशाला का एक गेट वहां बना दिया जाए समस्या का निदान हो सकता है। इस पर पालिका प्रशासन ने जेसीबी मंगाकर गोशाला के दूसरी ओर से गेट बनाने का प्रयास किया तो दूसरी ओर के बाशिंदे आक्रोशित हो उठे। उन्होंने पालिका प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाकर दीवार तोड़ने का विरोध किया और इसे लेकर पालिका अधिकारी व बाशिंदों की तीखी झड़प हुई, लेकिन पालिका के अधिकारी नहीं माने और दीवार तोड़ने लगे।
इस पर बाशिंदे आक्रोशित हो उठे और पथराव शुरू कर दिया। जिससे मोहल्ले में हड़कंप मच गया। सूचना पर एसडीएम, एसीओ व कोतवाल मौके पर पहुंचे व लोंगो को शांत कराया। मोहल्लेवालों का आरोप है कि पालिका प्रशासन मुख्य रास्ते से अतिक्रमण न हटाकर इस निजी रास्ते पर गेट बनाना चाहता है। वहीं पालिका अधिकारियों का दावा है कि यह निजी रास्ता नहीं बल्कि सरकारी रास्ता है। इस संबंध में एसडीएम सुनील शुक्ला ने बताया कि जांच के निर्देश दे दिए है।
हंगामे की सूचना पर पूर्व विधायक छोटे सिंह चौहान मौके पर पहुंचे। बाशिंदों के पक्ष में बोलते हुए प्रशासन पर सत्तापक्ष के इशारे पर परेशान करने का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि मुख्य रास्तों पर भाजपा के लोग कब्जा किए हुए हैं। उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए पालिका दूसरी तरफ से गेट बनाना चाहती है।
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10 जनवरी को सीएम के फरमान के बाद आलमपुर गोशाला को नगर पालिका प्रशासन ने चालू करा दिया है। इस गोशाला में नगरीय क्षेत्र के लगभग दो सैकड़ा अन्ना मवेशी रखे गए हैं। गोशाला के विकास के लिए शासन ने नगर पालिका को एक करोड़ पैंसठ लाख रुपये की धनराशि भी उपलब्ध करा दी है। बजट मिलते ही प्रशासन ने गोशाला का मुख्य गेट बनाने की तैयारी तेज कर दी।
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बता दें कि गोशाला के मुख्य रास्ते पर वर्षों से स्थायी अतिक्रमण है और वहां पर कई पक्के मकान बन गए हैं। जिससे मुख्य रास्ता बेहद संकरा हो गया है। इसके चलते गोशाला में मवेशियों के लिए भूसा चारा आदि के वाहन नहीं आ पा रहे हैं। इस समस्या के निदान के लिए सोमवार को नगर पालिका के ईओ सुशील कुमार दोहरे पालिका कर्मचारियों के साथ गोशाला पहुंचे।
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यहां पर कुछ लोगों ने ईओ को बताया कि गोशाला के दूसरी तरह से भी एक सरकारी रास्ता है अगर गोशाला का एक गेट वहां बना दिया जाए समस्या का निदान हो सकता है। इस पर पालिका प्रशासन ने जेसीबी मंगाकर गोशाला के दूसरी ओर से गेट बनाने का प्रयास किया तो दूसरी ओर के बाशिंदे आक्रोशित हो उठे। उन्होंने पालिका प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाकर दीवार तोड़ने का विरोध किया और इसे लेकर पालिका अधिकारी व बाशिंदों की तीखी झड़प हुई, लेकिन पालिका के अधिकारी नहीं माने और दीवार तोड़ने लगे।
इस पर बाशिंदे आक्रोशित हो उठे और पथराव शुरू कर दिया। जिससे मोहल्ले में हड़कंप मच गया। सूचना पर एसडीएम, एसीओ व कोतवाल मौके पर पहुंचे व लोंगो को शांत कराया। मोहल्लेवालों का आरोप है कि पालिका प्रशासन मुख्य रास्ते से अतिक्रमण न हटाकर इस निजी रास्ते पर गेट बनाना चाहता है। वहीं पालिका अधिकारियों का दावा है कि यह निजी रास्ता नहीं बल्कि सरकारी रास्ता है। इस संबंध में एसडीएम सुनील शुक्ला ने बताया कि जांच के निर्देश दे दिए है।
हंगामे की सूचना पर पूर्व विधायक छोटे सिंह चौहान मौके पर पहुंचे। बाशिंदों के पक्ष में बोलते हुए प्रशासन पर सत्तापक्ष के इशारे पर परेशान करने का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि मुख्य रास्तों पर भाजपा के लोग कब्जा किए हुए हैं। उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए पालिका दूसरी तरफ से गेट बनाना चाहती है।